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कोरोना से ठीक हो चुके लोगों को वैक्सीन की एक ही डोज जरूरी, रिसर्च में हुआ खुलासा

एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि जिन लोगों को कोरोना संक्रमण हुआ था और अब वे स्वस्थ हो चुके हैं, उन्हें सिर्फ एक शॉट ही देने की जरूरत है.

February 4, 2021 1:26 PM
Recovered COVID-19 patients may need only one shot of mRNA vaccines like Moderna and Pfizer say scientistsशरीर में पहले से एंटीबॉडी हो तो वैक्सीन की सिंगल डोज भी कोरोना वायरस के खिलाफ बेहतर प्रतिरोधी क्षमता बनाने में सक्षम है. (Representative Image)

कोरोना महामारी के प्रति प्रतिरोधी क्षमता विकसित करने के लिए बनाए गए टीके के दुनिया भर में दो शॉट्स लगाए जा रहे हैं. हालांकि एक नए अध्ययन में खुलासा हुआ है कि जिन लोगों को कोरोना संक्रमण हुआ था और अब वे स्वस्थ हो चुके हैं, उन्हें सिर्फ एक शॉट ही देने की जरूरत है, अगर उन्हें Moderna या Pfizer की कोरोना वैक्सीन के टीके लगाए जा रहे हैं. स्टडी में सीमित आपूर्ति को लेकर यह सुझाव दिया गया है. हेल्थ साइंस के प्रीप्रिंट सर्वर medRxiv की स्टडी में 109 इंडिविजुअल्स में एंटीबॉडी रिस्पांस को एसेस किया गया. इनमें नोवल कोरोना वायरस को लेकर डॉक्यूमेंटेंड प्री-एग्जिस्टिंग इम्यूनिटी के साथ और उसके बिना वाले इंडिविजुअल्स पर अध्ययन किया गया.

सिंगल डोज भी कोरोना वायरस के खिलाफ बेहतर प्रतिरोधी क्षमता

शोधार्थियों के मुताबिक mRNA वैक्सीन की एक सिंगल डोज भी ऐसे लोगों के शरीर में कोरोना वायरस को लेकर बेहतर प्रतिरोधी क्षमता विकसित करनें में सक्षम है जिनके शरीर में पहले से इसकी एंटीबॉडी हो. उनके शरीर में एंटीबॉडी का निर्माण इसलिए हुआ क्योंकि वे कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके थे और उससे ठीक हो चुके हैं. शोधार्थियों में अमेरिका के Ichan School of Medicine के फ्लोरियान क्रेमर भी शामिल रहे.
शोध में वैज्ञानिकों ने एमआरएनए वैक्सीन को एनालाइज किया जो वायरल जेनेटिक मैटेरियल के सेग्मेंट्स का प्रयोग करती है. यह शरीर के अंदर कोशिकाओं को कोरोना वायरस स्पाइक प्रोटीन बनाने के लिए तैयार करती है. ये प्रोटीन शरीर की प्रतिरोधी क्षमता को प्रशिक्षित करती है और जब शरीर में कोरोना वायरस प्रवेश करती है तो प्रतिरोधी क्षमता उसे नष्ट कर देती है.

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कोरोना संक्रमित लोगों को वैक्सीनेशन प्रोग्राम में कम प्रॉयोरिटी

वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पाया कि कोरोना वायरस से ठीक हो चुके लोगों में वैक्सीन की एक डोज देने के बाद उनके शरीर में एंटीबॉडी का स्तर वही पाया गया जो कोरोना वायरस से संक्रमित न हुए लोगों में वैक्सीन की दो डोज लेने के बाद रही. शोध परिणामों के मुताबिक वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि जो लोग कोरोना वायरस से पहले संक्रमित हो चुके हैं, उन्हें वैक्सीनेशन प्रॉयोरिटी लिस्ट में नीचे रखा जा सकता है. उन्होनें ऐसे सभी लोगों के लिए सिंगल डोज वैक्सीनेशन का सुझाव दिया है.

अतिरिक्त शोध की जरूरत बताई वैज्ञानिकों ने

ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक में मॉलिक्यूलर ऑनकोलॉजी के प्रोफेसर और वायरोलॉजिस्ट लॉरेंस यंग के मुताबिक इस मामले में और शोध किए जाने की जरूरत है. हालांकि वह शोध में शामिल नहीं थे. उनका मानना है कि अगल mRNA वैक्सीन की सिंगल डोज से बेहतर प्रतिरोधी क्षमता विकसित हो जा रही है तो यह ऐसे स्थानों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है जहां सप्लाई को लेकर चिंता जताई जा रही है. ब्रिटेन में यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग में इम्यूनोलॉजी और इंफेक्शस डिजीज के प्रोफेसर एलेनॉर रिले का मानना है कि सभी को दो डोज देना बेहतर रहेगा. रिले भी शोध में शामिल नहीं हुए थे. अभी इस शोध पर और अध्ययन किया जाना बाकी है और medRxiv के मुताबिक यह प्रारंभिक चरण के परिणाम हैं जिसका रिव्यू किया जाना बाकी है.

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