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Covid-19 Vaccine: कोविशील्ड और फाइजर की वैक्सीन अदला-बदली करके देना ज्यादा कारगर, स्टडी में जबरदस्त इम्यूनिटी का दावा

ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में किए गए अध्ययन के दौरान दोनों वैक्सीन को मिक्स एंड मैच करके परीक्षण किया गया, जिसके नतीजे उत्साह बढ़ाने वाले रहे हैं.

Updated: Jun 30, 2021 7:36 PM
कोरोना वैक्सीन के मिक्स-मैच परीक्षण के नतीजे अच्छे निकले हैं.

दुनिया भर में कोरोना वैक्सीन के असर पर कई अध्ययन चल रहे हैं. ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक स्टडी में कहा गया है कि कोविड-19 से बचाव के लिए अगर एक डोज़ ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका (Oxford-AstraZeneca) की बनाई वैक्सीन की और दूसरी डोज़ फाइजर-बायोएनटेक (Pfizer-BioNTech) के टीके की लगाई जाए तो काफी बेहतर इम्यूनिटी मिलती होती है. भारत में एस्ट्राजेनेका का टीका कोविशील्ड के नाम से लगाया जा रहा है. रिसर्च के मुताबिक इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि दोनों में कौन सी वैक्सीन पहले लगाई गई और कौन सी बाद में.

दोनों टीकों की एक-एक खुराक ज्यादा असरदार!

अब तक प्रकाशित नहीं हुई एक स्टडी में कहा गया है कि वैक्सीन की मिक्स्ड डोज के दौरान पहले फाइजर और बाद में एस्ट्रेजेनेका के टीका दिया जाए या फिर इससे उलटे क्रम में, दोनों ही हालत में बेहतर नतीजे मिलते हैं. दोनों ही तरह के प्रयोगों में पाया गया कि इससे कोविड के वायरस (SARS-CoV2) के स्पाइक प्रोटीन के खिलाफ काफी ज्यादा एंटीबॉडी बनी. प्रयोग के दौरान दोनों वैक्सीन के डोज़ में चार सप्ताह का अंतर रखा गया था. वायरस का स्पाइक प्रोटीन संक्रमण फैलाने और मानव कोशिका के भीतर घुसने में मदद करता है. मौजूदा वैक्सीन इसी के खिलाफ काम करती हैं.

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एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की दूसरी और तीसरी खुराक देरी के बावजूद कारगर

लांसेट प्री-प्रिंट सर्वर पर 25 जून को पोस्ट किए गए इस अध्ययन में एस्ट्राजेनेका (भारत में इसे कोविशील्ड कहा जाता है) और फाइजर वैक्सीन का संभावित शेड्यूल प्रकाशित किया गया है. इस शेड्यूल का इस्तेमाल कोविड-19 के खिलाफ किया जा सकता है.इस अध्ययन के तहत दो वैक्सीन के मिक्स एंड मैच नतीजों का मूल्यांकन किया गया. इसमें देखा गया कि दोनों वैक्सीन को बदल-बदल कर किस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है . इस स्टडी में 830 भागीदार थे. इनमें से 463 को 28 दिनों के अंतराल पर वैक्सीन की  दूसरी डोज दी गई थी.

इससे पहले ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के अध्ययन में पता चला था कि एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की दूसरी और तीसरी खुराक में देर होने के बावजूद इसकी वायरस से बचाने की क्षमता बनी रहती है. तीसरी खुराक को बूस्टर डोज के तौर पर इस्तेमाल करने के नतीजे भी सकारात्मक मिले हैं. हालांकि अभी यह नहीं पता कि इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए या वायरस के विभिन्न स्वरूपों के खिलाफ इम्यूनिटी के लिए तीसरी खुराक की जरूरत होगी या नहीं.

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