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सऊदी तेल संयंत्रों पर हमले के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने पर ईरान का जवाब, पूर्ण युद्ध के लिए हमेशा से तैयार

ईरान ने अमेरिका के इन आरोपों का रविवार को खंडन किया कि सऊदी अरब के तेल संयंत्रों पर हुए हमले में उसका हाथ है.

September 15, 2019 8:05 PM

 

ईरान ने अमेरिका के इन आरोपों का रविवार को खंडन किया कि सऊदी अरब के तेल संयंत्रों पर हुए हमले में उसका हाथ है. साथ ही यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने के लिए कोई बहाना ढूंढ रहा है. इस बीच, इस्लामिक रेवोल्युशनरी गार्ड कोर की हवाई शाखा के कमांडर ने कहा कि ईरान की मिसाइलें 2000 किलोमीटर की दूरी तक अमेरिकी ठिकानों और जहाजों को निशाना बना सकती हैं.

सऊदी अरब में विश्व के सबसे बड़े तेल शोधन संयंत्र और एक प्रमुख तेल क्षेत्र पर शनिवार को ड्रोन से हमला किया गया था. यमन में ईरान समर्थक हुती विद्रोहियों ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली थी. इस हमले से भड़की आग के चलते सऊदी अरब की आधी से अधिक तेल आपूर्ति बाधित हो गई है. पिछले कुछ सप्ताह से सऊदी अरब के तेल संयंत्रों पर ड्रोन से हमले की कई घटनाएं हुई हैं. ताजा हमला सबसे अधिक क्षतिकारक साबित हुआ है.

इसी बीच अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने इन हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया. पोम्पिओ ने कहा, ‘‘यह हमला यमन से होने का कोई सबूत नहीं मिला है. ईरान ने अब वैश्विक कच्चा तेल आपूर्ति पर अप्रत्याशित हमला किया है.’’ ईरान और अमेरिका के बीच पहले से जारी तनाव के बीच खाड़ी क्षेत्र में तनाव के और बढ़ जाने की आशंका भी गहराने लगी है.

देश की छवि खराब करने के लिए खुफिया संगठनों का कुचक्र

अमेरिका के आरोपों पर ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्बास मूसावी के हवाले से एक बयान में कहा गया, ‘‘ऐसे निराधार और बिना सोचे-समझे लगाए गए आरोप एवं टिप्पणियां निरर्थक और समझ से परे हैं.’’ मूसावी ने कहा कि पूर्वी प्रांत के अब्कैक और खुरैस पर हुए हमलों को लेकर लगाए जा रहे आरोप ईरान के खिलाफ कार्रवाई को उचित ठहराने के लिए हैं. उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी टिप्पणियां… किसी देश की छवि खराब करने के लिए खुफिया संगठनों का कुचक्र रचने और भविष्य के कदमों की रूपरेखा तैयार करने के लिए की गईं ज्यादा लगती हैं.’’

‘न हम, न ही अमेरिकी युद्ध चाहते हैं’

रविवार को प्रकाशित टिप्पणी में इस्लामिक रेवोल्युशनरी गार्ड कोर की हवाई शाखा के कमांडर ने कहा कि ईरान की मिसाइलें 2,000 किलोमीटर की रेंज में अमेरिकी ठिकानों एवं पोतों को निशाना बना सकती है. तस्रीम संवाद समिति ने ब्रिगेडियर जनरल अमीरअली हाजीजदेह के हवाले से कहा, ‘‘न हम, न ही अमेरिकी युद्ध चाहते हैं.’’ कमांडर ने कहा, ‘‘निश्चित तौर पर क्षेत्र में एक-दूसरे का सामना कर रहे कुछ बल ऐसा कुछ कर सकते हैं, जिससे युद्ध शुरू हो सकता है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने एक पूर्ण युद्ध के लिए हमेशा से खुद को तैयार रखा है…हर किसी को पता होना चाहिए कि 2000 किलोमीटर की रेंज में मौजूद सभी अमेरिकी ठिकानों एवं उनके पोतों को हमारी मिसाइलें निशाना बना सकती हैं.’’

मई से दोनों देशों में बढ़ा हुआ है तनाव

ईरान और अमेरिका के बीच पिछले साल मई से तनाव बढ़ा हुआ है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2015 में हुए एक सौदे से अमेरिका को बाहर कर लिया था. इस सौदे के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नियंत्रित करने के बदले उस पर लगे प्रतिबंधों में कुछ ढील देने का वादा किया गया था. सौदे से बाहर होने के बाद से अमेरिका ने अधिकतम दबाव बनाने के अपने अभियान के तहत ईरान पर बेहद सख्त प्रतिबंध लगाए हैं और इस्लामी गणराज्य ने इसका जवाब देने के लिए परमाणु समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धताएं कम की हैं.

अमेरिका और ईरान में जून में युद्ध होने की स्थिति पैदा हो गई थी, जब ईरान ने एक अमेरिकी ड्रोन विमान को मार गिराया था और ट्रंप ने जवाबी हमले करने का आदेश दे दिया था. हालांकि अंतिम क्षण में उन्होंने इसे रोक लिया था.

Input: AP/AFP

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