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जुलाई में क्रूड इम्पोर्ट बिल बढ़कर 73000 करोड़ हुआ, रुपये की रिकॉर्ड गिरावट से मोदी सरकार को झटका

रुपया इस साल एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करंसी रही. इसमें 11 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है. बुधवार को रुपया 71.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक लुढ़क गया.

September 6, 2018 11:37 AM
India's crude import bill in July, rupee, dollar, crude, crude latest news, CAD, Fiscal deficit, Modi Govt, PM Modiरुपया इस साल एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करंसी रही. इसमें 11 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है. बुधवार को रुपया 71.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक लुढ़क गया. (Reuters)

भारतीय रुपये में डॉलर के मुकाबले लगातार आ रही गिरावट से मोदी सरकार को बड़ा झटका लगा है. बीते तीन साल के दौरान अगस्त में रुपये का प्रदर्शन सबसे खराब रहा. ईरान पर प्रतिबंध के चलते ग्लोबल सप्लाई गिरने की अटकलों से कच्चे तेल (क्रूड) की कीमतों में तेजी आई और इससे रुपये पर दबाव बढ़ा. नतीजा रहा कि भारत का क्रूड इम्पोर्ट बिल जुलाई में 76 फीसदी बढ़कर 10.2 अरब डॉलर (करीब 73 हजार करोड़ रुपये) हो गया. इसके चलते भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 18 अरब डॉलर हो गया, जोकि पांच साल में सबसे ज्यादा है.

सिंगापुर में मिझुओ बैंक लिमिटेड के हेड (इकोनॉमिक्स एंड स्ट्रैटजी) विष्णु वराथन का कहना है कि ईरान पर प्रतिबंधों के बीच कूड के लिए डॉलर की डिमांड बढ़ी है, जिसका रुपये पर असर हो रहा है. डॉलर की डिमांड ज्यादा और व्यापक है और इसमें तेजी का रुख है. जोकि तेल की बढ़ती कीमतें और तेल की वास्तविक डिमांड में बढ़ोतरी को लेकर है.

रुपये का एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन

रुपया इस साल एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करंसी रही. इसमें 11 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है. बुधवार को रुपया 71.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक लुढ़क गया.

80 डॉलर को पार जा चुका है क्रूड

ब्रेंट कूड की बात करें तो इसमें पिछले साल के मध्य से अबतक 70 फीसदी से ज्यादा की तेजी आ चुकी है. क्रूड अभी 77.10 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर है. इस साल मई में क्रूड तीन साल के सबसे उच्चत स्तर 80.50 डॉलर प्रति बैरल तक जा चुका है.

क्रूड आयात बिल तीन महीने से 10 डॉलर के पार

क्रूड की लगातार बढ़ती कीमतों के लिए भारत का मंथली तेल आयात बिल जुलाई से लगातार तीन महीने के दौरान 10 अरब डॉलर से अधिक रहा है. जबकि पिछले साल जून जुलाई में तेल आयात बिल 5.8 अरब डॉलर के आसपास रहा था.

सरकार का घाटा बढ़ेगा

कॉमर्सबैंक एजी के अनुसार, तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव भारत के चालू खाता घाटा (CAD) और राजकोषीय घाटा पर पड़ रहा है. इसमें रुपये की गिरावट से स्थिति और बिगड़ रही है. आॅस्ट्रेलिया एंड न्यूजीलैंड बैंकिंग ग्रुप लिमिटेड के अनुसार, तेल की बढ़ती कीमतों के चलते चालू वित्त वर्ष 2018—19 में भारत का चालू खाता घाटा जीडीपी का 2.6 फीसदी कर दिया है. जोकि एक साल पहले 1.5 फीसदी था.

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