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H-1B वीजा रद्द होने का भारतीयों पर कैसे होगा असर? ट्रम्प के फैसले का अमेरिका में क्यों हो रहा विरोध

US प्रेसिडेंट ट्रम्प के फैसले का अमेरिका में ही व्यापक विरोध हो रहा है. इस फैसले से असहमति जताने वालों में गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई भी हैं.

Published: June 23, 2020 11:59 AM
What is H1B Visa who can availराष्ट्रपति ट्रम्प के इस फैसले से भारत के सबसे अधिक 1.70 लाख लोग प्रभावित होंगे. (File Image: Reuters)

H-1B Visa: अमेरिका में नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प ने H1B समेत दूसरे विदेशी वर्क परमिट को को इस साल के अंत तक निलंबित करने की घोषणा कर दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने H-1B वीजा के एक्जक्यूटिव फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. यह आदेश 24 जून से लागू होगा. जल्द ही यह देश में कानून बना जाएगा और आगे से यह वीजा किसी को नहीं मिलेगा. राष्ट्रपति ट्रम्प के इस फैसला को वहां स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के तौर पर देखा जा रहा है. भारतीयों के बीच H1B वीजा काफी लोकप्रिय है. खासकर आईटी के पेशेवरों के बीच यह वीजा बेहद अहम है. ऐसे में निश्चित रूप से राष्ट्रपति ट्रम्प का यह फैसला भारतीयों के एक तगड़ा झटका है. हालांकि ट्रम्प के फैसले का अमेरिका में ही व्यापक विरोध हो रहा है. इस फैसले से असहमति जताने वालों में गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई भी हैं.

H1B वीजा निलंबन: भारतीयों पर कैसे होगा असर?

अमेरिका में वर्क परमिट के लिए H-1B वीजा पाने वाले सबसे अधिक भारतीय आईटी पेशेवर होते हैं. ऐसे में निश्चित रूप से राष्ट्रपति ट्रम्प के इस फैसले का सर्वाधिक असर भारतीय प्रोफेशनल्स पर होगा. इसके साथ ही कई अमेरिकी और भारतीय कंपनियां भी प्रभावित होंगी, जिन्हें 1 अक्टूबर से शुरू हो रहे वित्तीय वर्ष 2021 के लिए अमेरिकी सरकार की ओर से H-1B वीजा जारी किए गए थे. इसका मतलब यह कि जो आईटी पेशेवर का H1B वीजा अप्रैल लॉटरी में अप्रूव हो गया था, वो भी नहीं यूएस नहीं जा सकेंगे. ट्रम्प सरकार ने L1 और अन्य अस्थायी कामकाजी वीजा को सस्पेंड कर दिया है.

अमेरिकी राष्ट्रपति के इस फैसले से दुनियाभर के 2.4 लाख लोग प्रभावित हो सकते हैं. जिसमें भारत से सबसे अधिक 1.70 लाख लोग प्रभावित होंगे. यानी तकरीबन 1.70 लाख भारतीयों को अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है. यह वीजा अमेरिकी कंपनियों को विदेशियों को अपने यहां नियुक्त करने की अनुमति देता है.

अमेरिका में भी हो रहा विरोध

चुनावी मजबूरी के चलते राष्ट्रपति ट्रम्प की तरफ से लिए गए इस फैसले का विरोध अमेरिका के कुछ नेताओं की तरफ से भी किया जा रहा है. उन्होंने इस फैसले को गलत बताया है.अमेरिकी सीनेटर डिक डर्बिन का कहना है कि यह गलत तरीका है. H1B में बदलाव करने हैं न ही इसे खत्म करना है. भारतीय अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति का कहना है, मैं राष्ट्रपति ट्रम्प के गुमराह करने वाले फैसले से निराश हूं. मेरी उनसे गुजारिश है कि वे इस फैसले की समीक्षा करें. इससे हमारे हेल्थकेयर सिस्टम को मदद मिलेगी.

मानवाधिकार संगठन अमेरिकन इमिग्रेशन लायर्स एसोसिएशन (AILA) का कहना है कि H-1B, H-2B, J-1 और L-1 वीजा पर प्रतिबंध से कंपनियों, परिवारों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों, समुदायों को नुकसान पहुंचाएगा और इससे अमेरिका की अर्थव्यवस्था की रिकवरी में देरी होगी.

गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने भी ट्रम्प प्रशासन के इस फैसले को गलत बताया है. पिचाई का कहना है कि इमिग्रेशन की वजह से अमेरिका को इतना फायदा हुआ है. इसकी वजह से वह ग्लोबल टेक लीडर बना है. वह आज के आर्डर से निराश हैं.

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क्या ट्रम्प ने चला 5.25 लाख नौकरियों दांव!

राष्ट्रपति ट्रम्प के इस फैसले पर व्हाइट हाउस का कहना है कि H-1B, H-2B, J-1 और L-1 वीजा पर लगी अस्थायी रोक से अमेरिका में 5.25 लाख नौकरियों की जगह खाली रहेगी. कहा जा रहा है कि कोरोना महामारी के चलते नौकरियां गंवा चुके लाखों अमेरिकी लोगों की राहत देने के लिए यह फैसला किया गया है.

H-1B वीजा क्या है?

अमेरिका में कार्यरत कंपनियां अगर किसी विदेशी व्यक्ति को नियुक्त करना चाहती हैं तो इम्प्लाई के लिए H-1B वीजा लेना अनिवार्य है. इस वर्क परमिट के बिना वह अमेरिका में किसी कंपनी में काम नहीं कर सकता है. भारत से बड़ी संख्या में आईटी पेशेवर इस चीजा पर अमेरिका काम करने जाते हैं. H1B Visa के लिए कोई भी व्यक्ति आवेदन नहीं कर सकता है बल्कि किसी व्यक्ति की तरफ से कंपनी को आवेदन करना होता है. H-1B वीजा 3 साल के लिए जारी होता है, जिसे अधिकतम 6 साल तक बढ़ाया जा सकता है.

 

(Input: PTI)

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