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2019 चुनाव से पहले महंगा क्रूड मोदी के लिए बनेगा मुसीबत, सरकार से आम आदमी पर होंगे ये बड़े असर

महंगा क्रूड सरकार के लिए मुसीबत बनता जा रहा है. जानकार मान रहे हैं कि अगले कुछ महीने क्रूड में ज्यादा गिरावट के आसार नहीं दिख रहे हैं. वहीं, रुपए में लगातार गिरावट से सरकार की बैलेंसशीट बिगड़ सकती है. दूसरी ओर इससे देश में महंगाई बढ़ने का भी खतरा बढ़ गया है.

August 30, 2018 7:55 AM
crude, rupee, high price, क्रूड, रुपया, inflation, CAD, import bill, petrol, diesel, comman man, economy, election, modi government, challengeमहंगा क्रूड सरकार के लिए मुसीबत बनता जा रहा है. जानकार मान रहे हैं कि अगले कुछ महीने क्रूड में ज्यादा गिरावट के आसार नहीं दिख रहे हैं. वहीं, रुपए में लगातार गिरावट से सरकार की बैलेंसशीट बिगड़ सकती है. दूसरी ओर इससे देश में महंगाई बढ़ने का भी खतरा बढ़ गया है. ऐसे में क्रूड 2019 में आम चुनाव के पहले सरकार के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है. (Reuters)

महंगा क्रूड सरकार के लिए मुसीबत बनता जा रहा है. पिछले कुछ महीनों से उतार-चढ़ाव के बाद भी क्रूड की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं. जानकार मान रहे हैं कि अगले कुछ महीने क्रूड में ज्यादा गिरावट के आसार नहीं दिख रहे हैं. वहीं, रुपए में लगातार गिरावट से सरकार की बैलेंसशीट बिगड़ सकती है. दूसरी ओर इससे देश में महंगाई बढ़ने का भी खतरा बढ़ गया है. ऐसे में क्रूड 2019 में आम चुनाव के पहले सरकार के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है.

इस साल 14% महंगा हुआ क्रूड

इस साल की बात करें तो 1 जनवरी से अबतक क्रूड की कीमतों में 14 फीसदी इजाफा हो चुका है. जनवरी के शुरू में क्रूड 66.57 प्रति डॉलर बैरल के भाव था जो 28 अगस्त को 76 डॉलर प्रति बैरल का स्तर पार कर यगा. यानी, इस साल क्रूड में 14 फीसदी तेजी आ चुकी है. वहीं, पिछले साल जून से अब तक की बात करें तो क्रूड 44 डॉलर प्रति बैरल से 72 फीसदी महंगा हो चुका है.

और महंगा होगा क्रूड?

केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया ने Fe Hindi online को बताया कि अगर अगले कुछ हफ्तों की बात करें तो क्रूड में गिरावट के आसार बहुत कम हैं. क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल की रेंज तक भी जा सकता है. नीचे की ओर क्रूड के 74 डॉलर प्रति बैरल से नीचे जाने की उम्मीद नहीं है. यूएस द्वारा ईरान पर प्रतिबंध लगाने की वजह से ग्लोबल टेंशन में इजाफा हुआ है. यूएस में हेरिकेन सीजन की वजह से रिग्स काउंट कम हो सकता है, जिससे क्रूड को सपोर्ट मिलेगा.

एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट, रिसर्च (कमोडिटी एंड करंसी) ने Fe Hindi online को बताया कि ईरान पर यूएस के प्रतिबंध के बाद क्रूड की कीमतों को सपोर्ट मिला है. कुछ देशों ने पहले से ही ओपेक के तीसरे सबसे बड़े क्रूड उत्पादक ईरान से क्रूड का इंपोर्ट घटा दिया है. वहीं, आगे विंटर सीजन में डिमांड बढ़ने से भी क्रूड को सपोर्ट मिल रहा है. अनुज का कहना है कि क्रूड की कीमतें एक बार फिर 80 डॉलर प्रति बैरल छू सकती हैं.

रुपया और होगा कमजोर

जानकारों का कहना है कि अगले कुछ हफ्तों में रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 72 का स्तर छू सकता है, जिससे क्रूड खरीदना और महंगा होगा. जीएसटी कलेक्शन उम्मीद के अनुसार न आने, डॉलर की बढ़ रही डिमांड, राजनीतिक अनिश्चितता और यूएस फेड द्वारा दरें बढ़ाए जाने के संकेत से रुपये में और कमजोरी आती दिख रही है.

चालू खाता घाटा बढ़ने की आशंका

भारत अपनी जरूरतों का करीब 82 फीसदी क्रूड खरीदता है. ऐसे में क्रूड की कीमतें बढ़ने से देश का करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) बढ़ सकता है. क्रूड की कीमतें लगातार बढ़ने से भारत का इंपोर्ट बिल उसी रेश्‍यो में महंगा होगा, जिससे करंट अकाउंट डेफिसिट की स्थिति बिगड़ेगी.

बढ़ेगा क्रूड ऑयल इंपोर्ट बिल

महंगे क्रूड और रुपये में रिकॉर्ड कमजोरी से वित्त वर्ष 2018-19 के लिए भारत का क्रूड ऑयल इंपोर्ट बिल लगभग 26 अरब डॉलर (1.82 लाख करोड़ रुपए) बढ़ने का अनुमान है. यह अनुमान सरकारी एजेंसियों द्वारा लगाया गया है. वित्त वर्ष 2017-18 में 22.043 करोड़ टन क्रूड के इंपोर्ट पर 87.7 अरब डॉलर यानी 5.65 लाख करोड़ रुपए खर्च किए थे. वित्त वर्ष 2018-19 में 22.7 करोड़ क्रूड का इंपोर्ट किए जाने का अनुमान है, जिसपर 7.5 लाख करोड़ रुपये खर्च हो सकता है.

देश में बढ़ेगी महंगाई

क्रूड की ऊंची कीमतों का असर पेट्रोल और डीजल पर भी दिख रहा है. डीजल रिकॉर्ड हाई पर है, वहीं पेट्रोल भी मुंबई में 85.60 रुपये प्रति लीटर हो गया है. जानकारों का कहना है कि अभी इसमें और बढ़ोतरी हो सकती है. इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड महंगा होने से इंडियन बास्केट में भी क्रूड महंगा हो जाता है. इससे तेज कंपनियों पर मार्जिन का दबाव भी बढ़ता है। दूसरी ओर, पेट्रोल और डीजल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का भी डर होता है. फॉरेन ब्रोकरेज हाउस यूबीएस के अनुसार क्रूड 10 फीसदी महंगा होता है तो सीपीआई इन्फलेशन में 25 बेसिस प्वॉइंट की बढ़ोतरी हो सकती है.

एक्साइज ड्यूटी घटाने का दबाव

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकार पर एक्साइज ड्यूटी घटाने का दबाव है. अजय केडिया का कहना है कि एक्साइज ड्यूटी से सरकार को अच्छी कमाई होती है. वहीं, दूसरी ओर रेवेन्यू कलेक्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं आ रहा है. ऐसे में सरकार यह जोखिम उठाए, इसकी संभावना कम है. बता दें, 2013-14 में केंद्र सरकार को पेट्रोलियम पर टैक्स से 1.1 लाख करोड़ रुपये की आमदनी हुई, जो साल 2016-17 में बढ़कर 2.5 लाख करोड़ रुपये हो गई. ऐसे में जब बैलेंसशीट बिगड़ने का डर है, एक्साइज ड्यूटी में कटौती आसान नहीं है.

क्रूड और इकोनॉमिक ग्रोथ का कनेक्शन

इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, क्रूड की कीमतें अब 10 डॉलर बढ़ती हैं तो करंट अकाउंट डेफिसिट 1000 करोड़ डॉलर बढ़ सकता है. वहीं, इससे इकोनॉमिक ग्रोथ में 0.2 से 0.3 फीसदी तक कमी आती है. बता दें कि जनवरी से अबतक क्रूड 10 डॉलर के करीब महंगा हो चुका है. WPI इनफ्लेशन में 1.7 फीसदी की बढ़ोत्तरी होती है.

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