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Covid-19: लंबा चला तो मौसमी बीमारी बन जाएगा कोरोना वायरस, UN रिसर्च टीम का दावा

UN Research on Covid-19: संयुक्त राष्ट्र के अनुसार अगर कोरोना वायरस लंबे समय तक बना रहा तो यह एक सीजनल यानी मौसमी बीमारी बन जाएगा.

March 18, 2021 11:54 AM
UN Research on Covid-19UN Research on Covid-19: संयुक्त राष्ट्र के अनुसार अगर कोरोना वायरस लंबे समय तक बना रहा तो यह एक सीजनल यानी मौसमी बीमारी बन जाएगा.

UN Research on Covid-19: चीन में पहली बार कोरोनावायरस के मामले सामने आने के बाद 1 साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन इस बीमारी को लेकर कई रहस्य अभी भी नहीं सुलझ पाए हैं. 1 साल से ज्यादा समय बाद भी अभी इस महामारी ने दुनियाभर में दहशत बनाई हुई है. इस बीच संयुक्त राष्ट्र की एक रिसर्च टीम ने बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार अगर कोरोना वायरस लंबे समय तक बना रहा तो यह एक सीजनल यानी मौसमी बीमारी बन जाएगा. इसका खतरा लंबे समय तक बना रह सकता है. बता दें कि इस महामारी के चलते दुनियाभर में करीब 27 लाख लोगों की जान चुकी है. यह सिलसिला अभी भी जारी है.

अभी पाबंदियां जरूरी

हालांकि, रिसर्च टीम ने चेताया है कि मौसम के आधार पर महामारी को रोकने के लिए लगाई गई पाबंदियों में ढील नहीं दी जानी चाहिए. संयुक्त राष्ट्र ने कोरोना संक्रमण पर मौसम संबंधी फैक्टर्स और हवा की क्वालिटी से पड़ने वाले असर को जानने के लिए एक विशेषज्ञ टीम बनाई थी. इस टीम की पहली रिपोर्ट में सामने आया है कि अगर यह महामारी लंबे समय तक जारी रहती है तो कुछ सालों में यह मौसमी बीमारी बनकर रह जाएगी. UN के विश्व मौसम विज्ञान संगठन की तरफ से बनाई गई 16 सदस्यों वाली टीम ने कहा है कि इस तरह की बीमारियां आमतौर पर मौसमी होती हैं.

कोरोना को रोकने के उपाय बेअसर न हो जाएं

संयुक्त राष्ट्र द्वारा बनाई गई रिसर्च टीम ने बताया कि सांस संबंधी संक्रमण अक्‍सर मौसमी होते हैं. कोरोना वायरस भी मौसम और तापमान के मुताबिक अपना असर दिखाएगा. वैज्ञानिकों की टीम ने कहा कि अभी तक कोरोना वायरस को काबू करने के लिए जिस तरह के प्रयास किए गए हैं उस पर पानी फिरता दिखाई दे रहा है. अगर यह कई सालों तक इसी तरह से कायम रह जाता है तो कोविड-19 एक मजबूत मौसमी बीमारी बनकर उभरेगा.

मौसम के आधार पर छूट ना मिले

रिसर्च टीम ने कहा है कि अभी तक संक्रमण की रफ्तार मौसम की बजाय सरकारों के कदमों से प्रभावित रही है. इन कदमों में मास्क अनिवार्य करना और यात्राओं पर प्रतिबंध आदि शामिल हैं. इसलिए मौसम पर निर्भर न रहने की सलाह दी जाती है. टीम में शामिल अमेरिका की जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के बेन जेचिक ने कहा कि ऐसे कोई सबूत नहीं है, जो सरकारों को मौसम के आधार पर पाबंदियां कम करने की इजाजत देते हों. महामारी के शुरुआती दौर में कुछ जगहों पर गर्मी के मौसम में भी मामले बढ़े थे और इस बार भी ऐसा हो सकता है.

कहां ज्यादा एक्टिव होता है वायरस

टीम ने अपने रिसर्च में सिर्फ बाहर के मौसम और हवा की क्वालिटी को आधार बनाया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि लैब में की गई स्टडी में सामने आया है कि कोरोना वायरस ठंड में, सूखे मौसम के अलावा जहां अल्ट्रावायलेट किरणें कम होती हैं, वहां ज्यादा दिनों तक सर्वाइव करता है. लेकिन अभी तक यह साफ नहीं है कि मौसम संबंधी फैक्टर्स का ट्रांसमिशन रेट पर क्या असर होता है. हालांकि कुछ ऐसे सबूत मिले हैं हवा की खराब क्वालिटी इसके खतरे को बढ़ा सकती है.

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