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कोरोना वैक्सीन पर WTO में भारत और दक्षिण अफ्रीका, प्रस्ताव के विरोध में अमेरिकी सीनेटर्स ने राष्ट्रपति बाइडेन को लिखा पत्र

Covid-19 Vaccine Updates: रिपब्लिकन पार्टी के चार अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति जो बाइडेन से अनुरोध किया है कि वह कोरोना वैक्सीन को लेकर भारत व दक्षिण अफ्रीका द्वारा डब्ल्यूटीओ में दिए गए प्रस्ताव को स्वीकार न करें.

Updated: Mar 06, 2021 1:14 PM
Covid-19 Vaccine Updates Biden urged not to accept India and S African proposal at WTO on COVID-19भारत और दक्षिण अफ्रीका ने डब्ल्यूटीओ में कोरोना वैक्सीन की सप्लाई बढ़ाने के लिए इसे पेटेंट से मुक्त करने का प्रस्ताव रखा है.

Covid-19 Vaccine Updates: रिपब्लिकन पार्टी के चार अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति जो बाइडेन से अनुरोध किया है कि वह कोरोना वैक्सीन को लेकर भारत व दक्षिण अफ्रीका द्वारा डब्ल्यूटीओ में दिए गए प्रस्ताव को स्वीकार न करें. इस प्रस्ताव में भारत और दक्षिण अफ्रीका ने कोरोना वैक्सीन की सप्लाई बढ़ाने के लिए कोरोना वैक्सीन के पेटेंट से मुक्त करने का प्रस्ताव रखा है. बाइडेन को लिखे पत्र में चार सीनेटर्स ने लिखा है कि भारत व दक्षिण अफ्रीका ने Covid-19 से संबंधित किसी भी खोज को इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के दायरे से बाहर रखने का प्रस्ताव रखा है.
चारों सीनेटर्स का कहना है कि अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है और अमेरिकन कंपनियों द्वारा विकसित किए इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को खत्म कर दिया जाता है तो कोरोना वैक्सीन के कई मैनुफैक्चरर्स हो जाएंगे. सीनेटर्स माइक ली, टॉम कॉटन, जोनी अर्न्स्ट और टॉड यंग ने WTO में रखे जाने वाले इस प्रस्ताव को रिजेक्ट करने का आग्रह किया है.

राइट्स खत्म होने के बाद भी नहीं बढ़ेगी सप्लाई- सीनेटर्स

सीनेटर्स का कहना है कि हर अमेरिकन कंपनी के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को खत्म करने से Operation Wars Speed के तहत शुरु किए गए कोरोना वैक्सीन और ट्रीटमेंट की प्रोग्रेस खत्म हो सकती है. इस ऑपरेशन के तहत ऐतिहासिक तौर पर सबसे तेज गति से वैक्सीन का निर्माण हुआ है. सीनेटर्स के मुताबिक इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के अधिकार खत्म किए जाने से इनोनेशन खत्म हो सकता है और इससे वायरस के नए वैरिएंट्स के लिए नई वैक्सीन या बूस्टर्स का डेवलपमेंट थम सकता है. सीनेटर्स का कहना है कि अगर अमेरिकी कंपनियों के अधिकार खत्म कर दिए जाएंगे तो भी वैक्सीन की सप्लाई नहीं बढ़ेगी क्योंकि नए मैनुफैक्चरिंग प्लांट्स बनाने के लिए रिसोर्सेज और समय लगेगा. इसके अलावा कांप्लैक्स मेडिसिन्स बनाने की प्रक्रिया समझनी होगी. इसके अलावा उन्होंने सबसे बड़ी चिंता क्वालिटी कंट्रोल को लेकर जताई.

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भविष्य के लिए जताई आशंका

अमेरिकी सीनेटर्स ने राष्ट्रपति बाइडेन को वैश्विक नेता के तौर पर फैसला लेने के लिए कहा कि अमेरिका अन्य देशों को कोरोना वायरस से निपटने में मदद कर सकता है. सीनेटर्स के मुताबिक इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के अधिकार खत्म किए जाने से न सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया के लिए स्थिति और गंभीर हो सकती है.
यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स ग्लोबल इनोवेशन पॉलिसी सेंटर (GIPC) कते सीनियर वाइस प्रेसिडेंट पैट्रिक किलब्राइड का कहना है कि इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स को खत्म करने से भविष्य में अगर कोई महामारी कभी आती है तो वैक्सीन या ट्रीटमेंट को जल्द से जल्द डेवलप करना और उसे डिस्ट्रिब्यूट करने में बड़ी कठिनाई होगी.

भारत और दक्षिण अफ्रीका के प्रस्ताव का समर्थन भी

इस हफ्ते की शुरुआत में सैकड़ों अमेरिकन सिविल सोसायटी ऑर्गेनाइजेशंस और तीन शीर्ष कांग्रेसमेन ने डब्ल्यूटीओ में कोरोना वैक्सीन को इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के दायरे से बाहर रखने को प्रस्ताव को खारिज नहीं करने का आग्रह किया है. इनका कहना है कि कोरोना महामारी किसी देश की सीमा को नहीं मानता और दुनिया भर के लोगों को इसके वैक्सीन की जरूरत है. हाउस एप्रोप्रिएशंस कमेटी के चेयरमैन और कांग्रेसमेन रोसा डिलॉरो के मुताबिक भारत और दक्षिण अफ्रीका के WTO में प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो इससे कोरोना वायरस को हराने में मदद मिलेगी क्योंकि विकासशील देशों में इलाज और वैक्सीन आसानी से उपलब्ध हो सकेगी

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