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COVID-19 Testing: छोटी सी चिप का कमाल, बगल के मेडिकल स्टोर पर भी हो जाएगा कोरोना टेस्ट; 1 घंटे में ही मिल जाएगी रिपोर्ट

COVID-19 Testing: कोरोना का टेस्ट अब उतनी ही आसानी से हो जाएगा, जितनी आसानी से अभी ब्लड शुगर की जांच होती है.

Updated: Mar 31, 2021 2:00 PM
COVID-19 testing New chip to deliver results to your smartphone in less than an hourवैज्ञानिकों ने स्टांप के आकार की ऐसी चिप तैयार की है जिसके जरिए Covid-19 टेस्टिंग आसान हो जाएगी और इसके परिणाम एक घंटे में ही स्मार्टफोन पर मिल जाएंगे.

COVID-19 Testing: कोरोना का टेस्ट अब उतनी ही आसानी से हो जाएगा, जितनी आसानी से अभी ब्लड शुगर की जांच होती है. वैज्ञानिकों ने स्टांप के आकार की ऐसी चिप तैयार की है जिसके जरिए Covid-19 टेस्टिंग आसान हो जाएगी और इसके परिणाम एक घंटे में ही स्मार्टफोन पर मिल जाएंगे. माइक्रोफ्लूडिक चिप ब्लड सीरम में सार्स-कोवी-2 न्यूक्लियोकैप्सिड (एन) प्रोटीन की सांद्रता को मापेगा. यह ब्लड सीरम एक उंगली में हल्की सी सूई चुभोकर कलेक्ट की जाती है. यह सिस्टम इतना आसान है कि बगल के मेडिकल स्टोर पर भी कोरोना टेस्ट करा सकते हैं और एक घंटे में परिणाम जान सकते हैं. सैंपल को लेबोरेटरी ले जाने की जरूरत ही नहीं रहेगी.
इस चिप को राइस यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों ने तैयार किया है और यह रिसर्च जर्नल एसीएस सेंसर्स में प्रकाशित किया गया है. इस शोध के मुताबिक चिप में जो नैनोबीड्स है, वह सार्स-कोवी-2एन प्रोटीन से चिपक जाता है और इसके बाद यह एक इलेक्ट्रोकेमिकल सेंसर में जाता है. यह सेंसर बॉयोमार्कर की छोटी मात्रा भी डिटेक्ट कर सकता है.

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स्वैब टेस्ट के मुकाबले आसान है चिप वाली टेक्नोलॉजी

रिसर्चर्स के मुताबिक वर्तमान में कोरोना टेस्टिंग के लिए जो प्रक्रिया अपनाई जाती है, उसकी तुलना में चिप वाली तकनीक बहुत आसान है. वर्तमान में स्वैब आधारित पीसीआर टेस्ट्स किए जाते हैं. राइस लैब में मैकेनिकल इंजीनियर पीटर लिल्लेहोज के मुताबिक इस डिवाइस के जरिए कोरोना टेस्ट के लिए लेबोरेटरी की जरूरत नहीं रहेगी बल्कि इसका टेस्ट कलेक्शन साइट, हेल्थ क्लीनिक या किसी दवा की दुकान पर भी हो सकती है. इसके अलावा इस पूरे सिस्टम को प्रयोग करना और कहीं ले आना-जाना भी बहुत आसान है.

55 मिनट में पता लगा लिया कोरोना का

शोध के लिए वर्तमान बॉयोसेंसिंग टूल्स का इस्तेमाल किया गया और जिस तरह से पिछले साल 2020 में मलेरिया के इलाज के लिए माइक्रोनीडल पैच का इस्तेमाल किया गया, वैसे ही कोरोना टेस्ट के लिए किया गया. हालांकि कोरोना टेस्टिंग के लिए जो टूल्स डेवलप किया गया है, वह अधिक कांप्लेक्स डिटेक्शन सिस्टम है लेकिन रिसर्चर्स का मानना है कि इससे कम समय में एक्यूरेट और क्वांटेटिव रिजल्ट्स हासिल किए जा सकते हैं. इस डिवाइस का परीक्षण कुछ स्वस्थ लोगों के डोनेटेड ब्लड सीरम के जरिए किया गया जिसमें एक को कोरोना संक्रमण था. टेस्टिंग के दौरान करीब 55 मिनट में माइक्रोचिप ने सार्स-कोवी-2 एन प्रोटीन (प्रति मिलीलीटर सीरम में 50 पिकोग्राम कंसेंट्रेशन) को डिटेक्ट कर लिया. ब्लड सैंपल को एक कैपिलरी ट्यूब के जरिए चिप तक पहुंचाया जाता है. उस पर लगे बीड्स एंटीबॉडीज से जुड़ते हैं और एक सैंपल मैं बॉयोमार्कर के कंसेट्रेशन के अनुपात में करेंट पैदा करता है. पोटेंशस्टैट इस करेंट को पढ़ता है और फोन ऐप पर सिग्नल भेजता है.

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