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COVID-19 Vaccine: Moderna की वैक्सीन कोरोना से लड़ने वाली न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज विकसित करने में सक्षम, जानिए नई स्टडी की डिटेल

यह जानकारी मॉडर्ना की कैंडीडेट वैक्सीन के चल रहे ट्रायल के शुरुआती चरणों की नई स्टडी से मिली है.

Updated: Jul 15, 2020 2:48 PM
coronavirus vaccine, Moderna COVID-19 vaccine can produce immune response against coronavirus: Studyये फाइंडिंग्स न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हुई है. Image: Reuters

अमेरिका की बायोटेक कंपनी मॉडर्ना (Moderna) द्वारा विकसित की गई एक्सपेरिमेंटल कोविड19 वैक्सीन स्वस्थ वयस्कों में कोरोना से लड़ने वाली न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज विकसित करने में सक्षम है. हालांकि कई मरीजों में इसके माइनर साइड इफेक्ट्स भी मिले हैं. यह जानकारी मॉडर्ना की कैंडीडेट वैक्सीन के चल रहे ट्रायल के शुरुआती चरणों की नई स्टडी से मिली है.

ये फाइंडिंग्स न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हुई है. ये फाइंडिंग्स उस स्टडी की हैं, जो अमेरिका के सियाटल और एमोरी यूनिवर्सिटी में 18 से 55 साल की उम्र के 45 पार्टिसिपेंट्स पर की गई. स्टडी के मुताबिक, कैं​डीडेट वैक्सीन mRNA-1273 ने सभी पार्टिसिपेंट्स में नोवल कोरोनावायरस SARS-CoV-2 के खिलाफ इम्यून रिस्पॉन्सेज को प्रेरित किया. इस दौरान परीक्षण को सीमित करने वाली सुर​क्षा चिंताएं नहीं मिलीं.

वॉशिंगटन हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट की लीजा ए जैक्सन की अगुवाई वाली रिसर्चर्स टीम का कहना है कि mRNA-1273 कोरोना से लड़ने वाली न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज प्रेरित करती है. इस कैंडीडेट वैक्सीन को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इन्फेक्शियस डिसीसेज (NIAID) में और मॉडर्ना इंक कैंब्रिज, मैसाचुसेट्स में विकसित किया जा रहा है.

55 साल से अधिक उम्र वालों पर भी हो रहा ट्रायल

स्टडी में 15 पार्टिसिपेंट्स के 3 ग्रुप बनाए गए और उन्हें अलग-अलग 28 दिन एक्सपेरिमेंटल वैक्सीन के 25, 100 या 250 माइक्रोग्राम के दो इंट्रामस्क्युलर इंजेक्शन लगाए गए. वैज्ञानिकों का कहना है कि अप्रैल में ट्रायल के लिए 55 साल से अधिक उम्र के वयस्कों को इनरॉल किया गया. अभी 120 लोग ट्रायल में भाग ले रहे हैं. जो नई फाइंडिंग्स मिली हैं, वे केवल 18 से 55 साल की उम्र के लोगों को कवर करती हैं.

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नए डेटा से वैक्सीन की डोज को फिर से किया गया फॉर्म्युलेट

एक्सपेरिमेंटल वैक्सीन के अच्छे असर के साथ माइनर साइड इफेक्ट्स भी मिले हैं. आधे से ज्यादा पार्टिसिपेंट्स ने थकान, सिरदर्द, ठंड लगने और इंजेक्शन लगने वाली जगह पर दर्द की शिकायत की. हालांकि ये माइनर साइड इफेक्ट्स सामान्य हैं और अन्य प्रकार के वैक्सीनेशन के बाद भी होते हैं. वैज्ञानिकों ने कहा कि सिस्टेमेटिक प्रतिकूल प्रभाव दूसरे वैक्सीनेशन के बाद अधिक कॉमन रहे. उन 3 लोगों में साइड इफेक्ट्स उच्च रहे, जिन्हें वैक्सीन की सबसे उच्च डोज दी गई.

साइड इफेक्ट्स और इम्यून रिस्पॉन्सेज पर मिले इस डेटा का इस्तेमाल कर स्टडी के वैज्ञानिकों ने mRNA-1273 के दूसरे और तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल के लिए वैक्सीन की डोज को फिर से फॉर्म्युलेट किया है. वैक्सीन के दूसरे चरण की स्टडी चल रही है. लेकिन यह वैक्सीन वास्तव में कोविड19 को रोकने में सक्षम है या नहीं यह स्पष्ट तौर पर तीसरे चरण की स्टडी पूरी होने क बाद ही कहा जा सकेगा.

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