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पैरासिटामॉल सहित जरूरी दवाएं 40 से 70% तक महंगी, कोरोना वायरस से और बिगड़ सकती है स्थिति

Coronavirus Impact: चीन में कोरोना वायरस आउटब्रेक के चलते सप्लाई चेन बुरी तरह से बाधित हुआ है.

February 18, 2020 11:34 AM
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Coronavirus Impact On Pharma Industry: चीन में कोरोना वायरस आउटब्रेक के चलते सप्लाई चेन बुरी तरह से बाधित हुआ है. इसका असर अब घरेलू फार्मा इंडस्ट्री और मोबाइल इंडस्ट्री पर भी दिखने लगा है. चीन से आने वाले जरूरी फॉर्म्युलेशन अचानक से ठप पड़ गया है, जिससे फार्मा इंडस्ट्री की लागत बढ़ गई है. इसकी वजह से रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली दवाएं 70 फीसदी तक महंगी हो गई हैं. ब्लूमबर्ग में छपी रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस के चलते घर घर में इस्तेमाल होने वाली दवा पैरासिटामॉल की कीमतें जहां 40 फीसदी तक बढ़ गई हैं, वहीं बैक्टीरियल इन्फेक्शन में इस्तेमाल होने वाले एंटीबॉयोटिक एजिथ्रोमाइसिन की कीमत में 70 फीसदी तक इजाफा हुआ है.

भारत करता है आयात

बता दें कि घरेलू फार्मा इंडस्ट्री चीन से आने वाले इनग्रेडिएंट्स पर बहुत ज्यादा निर्भर है, जिनके इस्तेमाल से यहां दवाएं बनाई जाती हैं. लेकिन कोरोना वायरस के चलते चीन में कई प्लांट ने अपने यहां प्रोडक्शन बंद कर दिया है. जिससे इन इनग्रेडिएंट्स की भारत में सप्लाई ठप पड़ गई है. जाइडस कैडिला के चेयरमैन आर. पटेल ने बताया कि इसकी वजह से सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले पेरासिटामोल की कीमतें भारत में 40 फीसदी तक बढ़ गई हैं, जबकि बैक्टीरियल इन्पफेक्शन में काम आने वाली दवा एजिथ्रोमाइसिन की कीमत में 70 फीसदी का इजाफा हुआ है.

आने वाले दिनों में और बुरे हो सकते हैं हालात

उन्होंने कहा कि अगर अगले महीने के पहले हफ्ते तक सप्लाई पहले की तरह बहाल नहीं होती है तो फार्मा इंडस्ट्री की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं. फार्मा कंपनियों को अप्रैल से शुरू होने वाले ड्रग फॉर्म्युलेशन में कमी का सामना करना पड़ सकता है. इस वजह से रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतें और बढ़ सकती हैं.

मोबाइल फोन प्रोडक्शन पर भी होगा असर

कोरोना वायरस का असर मोबाइल फोन के उत्पादन पर भी दिख रहा है. इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज महिन्द्रू के अनुसार, चीन में शटडाउन के कारण मोबाइल फोन के कुछ भारतीय मैन्युफैक्चररर्स को प्रोडक्शन में दिक्कत हो रही है. उन्होंने कहा कि इसका असर अब दिखने लगा है और जल्द ही हालात नहीं सुधरे तो प्रोडक्शन बंद करना होगा. निर्माताओं के साथ इन्वेंटरी लगभग दो हफ्ते तक चलेगी और उसके बाद प्रोडक्शन में दिक्कत होगी.

बता दें कि भारत ने 2017-18 में 55 बिलियन डॉलर का इलेक्ट्रॉनिक सामान इंपोर्ट किया था. एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, सेलुलर मोबाइल हैंडसेट का प्रोडक्शन मार्च 2018 में समाप्त वर्ष में 225 मिलियन यूनिट तक पहुंच गया, जबकि 2015 में यह 60 मिलियन यूनिट था.

चीन में कारोनावायरस के चलते अबतक 1000 से ज्यादा लोगों की डेथ हो चुकी है. अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है. चीन में प्रोडक्शन ठप पड़ने से कई वस्तुओं को लेकर ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित हुआ है. चीन के मैन्युफैक्चरर फिर कारखानों को शुरू करते हैं, तो भारत को वहां से आयात होने वाले रॉ मटेरियल पर निर्भर रहना होगा.

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