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6 हफ्ते में क्रूड की कीमतें दोगुनी, आगे भी रहेगी तेजी! क्या बढ़ने वाले हैं पेट्रोल और डीजल के भाव

21 अप्रैल के बाद से पिछले 6 हफ्तों के दौरान ब्रेंट क्रूड का भाव दोगुना होकर 38.78 डॉलर प्रति बैरल के आस पास पहुंच गया.

Published: June 2, 2020 12:54 PM
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क्रूड की कीमतों में 21 अप्रैल के बाद से ही लगातार तेजी बनी हुई है. 21 अप्रैल के बाद से पिछले 6 हफ्तों के दौरान ब्रेंट क्रूड का भाव दोगुना होकर 38.78 डॉलर प्रति बैरल के आस पास पहुंच गया. जबकि 21 अप्रैल को ब्रेंट क्रूड 19.33 डॉलर के भाव पर बंद हुआ था. एक्सपर्ट का कहना है कि क्रूड में अब तेजी जारी रहने वाली है. अगले हफ्ते ओपेक देशों की बैठक होने वाली है, जिसमें क्रूड का प्रोडक्शन आगे भी कम करने पर सहमति तय मानी जा रही है. ओपेक व अन्य तेल उत्पादक देशों द्वारा लगातार उत्पादन घटाए जाने और लॉकडाउन खुलने के बीच डिमांड बढ़ने से ही क्रूड की कीमतों को सपोर्ट मिला है.

कुल उत्पादन का 10 फीसदी कटौती

ओपेक देशों की यह बैठक 9-10 जून को होगी. कोरोना के चलते यह बैठक वीडियो क्रांफेसिंग के जरिये होगी. इस बैठक में ओपेक और गैर ओपेक देश कच्चे तेल के उत्पादन में भारी कटौती करने के लिए सहमत हो सकते हैं. जुलाई या अगस्त से यह कटौती 97 लाख बैरल रोजाना की हो सकती है जो कुल क्रूड उत्पादन का करीब 10 फीसदी है. कटौती के चलते क्रूड के भाव बढ़कर 38.78 डॉलर तक पहुंचे हें, लेकिन अभी भी पिछले साल के मुकाबले ब्रेंट क्रूड 40 फीसदी नीचे ट्रेड कर रहा है.

6 हफ्तों में भाव डबल

क्रूड के भाव 21 अप्रैल के बाद से दोगुने हो गए हैं. 21 अप्रैल को क्रूड 19.33 के भाव पर था, जो अब बढ़कर 38.78 डॉलर हो गया है. हालांकि इस साल अबतक क्रूड में अभी भी 38.57 फीसदी की गिरावट है. जबकि पिछले एक साल में हह करीब 35 फीसदी सस्ता हुआ है. बता दें कि पिछले दिनों लॉकडाउन के चलते डिमांड गिर जाने और ओवरसप्लाई की स्थिति की वजह से क्रूड में बहुत ज्यादा गिरावट आई थी.

आगे भी जारी रहेगी तेजी

एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी एंड करंसी), अनुज गुप्ता का कहना है कि ओपेक देश लंबे समय तक क्रूड के प्रोडक्शन को कम करने पर सहमत हो सकते हैं. इनमें से कई देशों की अर्थव्यवस्था बहुत हद तक क्रूड पर निर्भर है. जबकि पिछले दिनों जिस तरह से क्रूड में गिरावट आई, सउदी अरब सहित ओपेक देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है. ऐसे में ये देश किसी भी तरह क्रूड इकोनॉमी को पटरी पर लाने की कोशिश करेंगे. उनका कहना है कि उत्पादन में कटौती पर सहमति से क्रूड की कीमतों में और तेजी आ सकती है. क्रूड के लिए अभी 40 डॉलर एक रेजिस्टेंस है. यह लेवल टूटने पर क्रूड आगे 45 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है.

पेट्रोल, डीजल के बढ़ सकते हैं दाम?

इसका असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिलेगा. अभी एमसीएक्स पर क्रूड 2000 रुपये के आस पास है जो 3000 रुपये तक जा सकता है. इससे तेल कंपनियां पेर्ओल और डीजल के दाम में मामूली बढ़ोत्तरी कर सकती हैं. बता दें कि पेट्रोल और डीजल के दाम अभी स्थिर हैं. हालांकि पेट्रोल और डीजल में ज्यादा बढ़ोत्तरी की उम्मीद अभी नहीं है. क्योंकि सरकार के पास पर्याप्त स्टोरेज है, जिसका फायदा कंज्यूमर को मिल सकता है.

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