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Antibody Cocktail: Zydus Cadila ने एंटीबॉडी कॉकटेल के ह्यूमन ट्रायल की मांगी मंजूरी, कोरोना से जंग में हो सकता है असरदार

कोरोना के इलाज के लिए Zydus Cadila के मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज कॉकटेल का जल्द ही इंसानों पर क्लीनिकल ट्रॉयल हो सकता है.

Updated: May 27, 2021 1:50 PM
Zydus Cadila seeks DCGI nod for human clinical trials of antibodies cocktail to treat COVID-19

कोरोना के इलाज के लिए Zydus Cadila के मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज कॉकटेल का जल्द ही इंसानों पर क्लीनिकल ट्रायल हो सकता है. जायडस कैडिला ने इसके लिए दवा नियामक ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से मंजूरी मांगी है. कैडिला हेल्थकेयर ने नियामकीय फाइलिंग में जानकारी दी कि जायडस ZRC-3308 के ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल के लिए दवा नियामक से मंजूरी मांग रही है. ZRC-3308 दो सार्स-कोवी-2-न्यूट्रिलाइजिंग मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज (mAbs) का कॉकटेल है और कैडिला हेल्थकेयर के दावे के मुताबिक यह कोरोना के इलाज में मुख्य इलाज के रूप में उभर सकता है. ZRC-3308 को एनिमल टॉक्सीलॉजी स्टडीज में सुरक्षित पाया गया है.

मोनोक्लोनल एंटीबॉडी हानिकारक रोगजनक वायरस से लड़ने की प्रतिरक्षा प्रणाली की क्षमता की नकल करते हैं. ऐसा एंटीबॉडी कॉकटेल पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को दिया गया था जब वे कोरोना से संक्रमित हुए थे.

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कंपनी ने किया है सुरक्षित इलाज का दावा

जाडस का कहना है कि वह इकलौती भारतीय कंपनी है जिसने कोरोना के इलाज के लिए न्यूट्रलाइजिंग मोनोक्लोनल एंटीबॉडी आधारित कॉकटेल विकसित किया है. इस ग्रुप की कैडिला हेल्थकेयर लिस्टेड कंपनी है. कैडिला हेल्थकेयर के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ शर्विल पटेल का कहना है कि इस समय कोरोना से लड़ाई में अधिक सुरक्षित और अधिक प्रभावकारी इलाज की जरूरत है. ऐसे में बीमारी बढ़ने के विभिन्न चरणों को देखकर सभी विकल्पों पर गौर करना जरूरी है ताकि मरीजों को होने वाली तकलीफ को कम किया जा सके. पटेल का मानना है कि ZRC-3308 इन सभी चिंताओं को खत्म कर सुरक्षित इलाज उपलब्ध करा सकता है.

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भारत में मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल का पहला सफल इलाज

भारत में मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल का पहला सफल इलाज हुआ है. गुड़गांव स्थित अस्पताल में 82 साल के मरीज को मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल की खुराक दिए जाने के एक दिन बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई है. उन्हें मेदांता अस्पताल में खुराक देने के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है. एंटीबॉडी-ड्रग कॉकटेल Casirivimab और Imdevimab को स्विस कंपनी Roche ने Regeneron के साथ मिलकर तैयार किया है और भारतीय कंपनी सिप्ला इसकी मार्केटिंग सहयोगी है. दवा बनाने वाली कंपनी ने सोमवार को घोषणा की थी कि यह दवा अब भारत में भी उपलब्ध है. हर मरीज के लिए इसकी एक खुराक की लागत 59,750 रुपये होगी.

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