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पेट्रोल, डीजल होगा सस्ता! बिना रेवेन्यू घटाए एक्साइज ड्यूटी में 8.5 रु कटौती की गुंजाइश

Excise Duty on Petrol & Diesel: एक्सपर्ट का मानना है कि सरकार के पास पेट्रोल, डीजल पर 8.50 रुपये प्रति लीटर तक उत्पाद शुल्क में कटौती की गुंजाइश है.

March 4, 2021 8:24 AM
Excise Duty on Petrol & DieselExcise Duty on Petrol & Diesel: एक्सपर्ट का मानना है कि सरकार के पास पेट्रोल, डीजल पर 8.50 रुपये प्रति लीटर तक उत्पाद शुल्क में कटौती की गुंजाइश है.

Excise Duty on Petrol & Diesel: इस साल पेट्रोल और डीजल की कीमतें देशभर में रिकॉर्ड स्तरों पर हैं. ऐसा पहली बार हुआ है, जब नॉर्मल पेट्रोल किसी शहर में 100 रुपये प्रति लीटर के पार बिक रहा है. दिल्ली में पेट्रोल पहली बार 91 रुपये और डीजल 81 रुपये प्रति लीटर के पार निकल गया है. ऐसे में आम आदमी पर महंगाई की मार पड़ रही है. एक्सपर्ट का मानना है कि सरकार के पास पेट्रोल और डीजल पर 8.50 रुपये प्रति लीटर तक उत्पाद शुल्क में कटौती करने की गुंजाइश है. इन फ्यूल से मिलने वाले रेवेन्यू पर असर डाले बिना यह कटौती की जा सकती है.

रेवेन्यू पर नहीं होगा असर

ICICI सिक्योरिटीज के एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार ने बजट में वित्त वर्ष 2021-22 के लिए पेट्रोल और डीजल पर टैक्स से 3.2 लाख करोड़ रेवेन्यू जेनरेट करने का लक्ष्य रखा है. वहीं अभी जो टैक्स है उसके हिसाब से सरकार पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी से 4.35 लाख करोड़ रुपये जुटा लेगी. ऐसे में सरकार अगर पेट्रोल और डीजल पर लहने वाले आयात शुल्क में प्रति लीटर 8.50 रुपये की कटौती करती है तो उसके रेवेन्यू टारगेट पर कोई असर नहीं पड़ेगा. यह 3.2 लाख करोड़ रुपये ही रहेगा, लेकिन आम लोगों को इससे बड़ी राहत मिल जाएगी.

उत्पाद शुल्क में कटौती की उम्मीद

ICICI सिक्योरिटीज ने उम्मीद जताई है कि मांग में सुधार आने, निजीकरण को बढ़ावा दिए जाने और मुद्रास्फीति को लेकर बढ़ती चिंता के बीच उत्पाद शुल्क में कटौती की उम्मीद है. लेकिन यह कटौती 8.5 रुपये प्रति लीटर से कम रह सकती है. पिछले साल मार्च से लेकर मई 2020 के बीच पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में 13 रुपये और डीजल में 16 रुपये लीटर की बढ़ोत्तरी की गई. वर्तमान में पेट्रोल पर कुल मिलाकर 32.90 रुपये और डीजल पर 31.80 रुपये लीटर उत्पाद शुल्क लागू है.

केंद्र सराकर ने टैक्स ऐसे समय में बढ़ाया था, जब कच्चे तेल की कीमत अपने 2 दशक के सबसे निचले स्तर पर थी. लेकिन जब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं तो सरकार ने यह टैक्स नहीं घटाया. इसी वजह से पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ गईं. केंद्र और राज्य सरकार के टैक्स को मिलाकर पेट्रोल पर 60 फीसदी और डीजल पर 54 फीसदी टैक्स है.

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