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सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा, हाईकोर्ट को सवाल उठाने से नहीं रोकेंगे, मीडिया रिपोर्टिंग पर भी पाबंदी नहीं

मद्रास हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी के खिलाफ चुनाव आयोग की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित, हाईकोर्ट ने आयोग को बताया है कोरोना के बढ़ते मामलों के लिए जिम्मेदार.

Updated: May 03, 2021 7:04 PM
देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के लिए मद्रास हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया तो आयोग ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

ECI Petition Against Madras HC Comment:  सुप्रीम कोर्ट ने आज केंद्रीय चुनाव आयोग की याचिका पर सुनवाई करते हुए कुछ बेहद अहम टिप्पणियां की हैं. देश की सबसे बड़ी अदालत ने साफ कहा कि हाईकोर्ट्स के टिप्पणी करने के अधिकार पर रोक लगाने का उसका कोई इरादा नहीं है. इतना ही नहीं, कोर्ट ने यह भी कहा कि सुनवाई के दौरान की गई जजों की टिप्पणियों को जनता के सामने पेश करने से मीडिया को रोका नहीं जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए कहा कि अदालतों में संवाद का मुक्त प्रवाह बना रहना चाहिए.

हाईकोर्ट को हतोत्साहित नहीं कर सकते : HC

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम देश के हाईकोर्ट्स को टिप्पणियां या सवाल नहीं करने की हिदायत देकर हतोत्साहित करना नहीं चाहते. वे हमारे लोकतंत्र के मजबूत स्तंभ हैं. डायलॉग पूरी आज़ादी के साथ होना चाहिए. बार और बेंच के बीच खुली चर्चा के दौरान कई बार बहुत सी बातें कही जाती हैं. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि वे यह बातें चुनाव आयोग को नीचा दिखाने के लिए नहीं कह रहे और इसे उस तरीके से नहीं लिया जाना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उच्च न्यायालय कोई जिला अदालत नहीं हैं. हाई कोर्ट बहुत काम कर रहे हैं और हम उनकी गरिमा को कम नहीं कर सकते. कोर्ट ने कहा कि अदालत को न्यायिक समीक्षा का अधिकार दिया गया है. इसका यह मतलब नहीं है कि हम संसद जैसी संप्रभु संस्था का अधिकार छीन रहे हैं. इसका यह मतलब नहीं है कि कोई एक संवैधानिक संस्था दूसरे से बड़ी है. हम चाहते हैं कि देश की संभी अहम संस्थाएं पूरी स्वतंत्रता के साथ काम करें.

मीडिया को रिपोर्टिंग से रोका नहीं जा सकता

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग की यह मांग जायज नहीं है कि अदालती कार्यवाही के दौरान की गई टिप्पणियों को रिपोर्ट करने से मीडिया को रोका जाए. जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एम आर शाह की खंडपीठ ने मद्रास हाईकोर्ट की हाल में की गई टिप्पणियों के खिलाफ चुनाव आयोग की याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रखा है.

मद्रास हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग पर तीखी टिप्पणियां की हैं

दरअसल, मद्रास हाईकोर्ट ने 26 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान कहा था कि देश में कोविड-19 के मामलों में अचानक हुई बढ़ोतरी के लिए चुनाव आयोग जिम्मेदार है. इतना ही नहीं, कोर्ट ने आयोग को “सबसे गैरजिम्मेदार संस्था” बताते हुए यहां तक कह दिया था कि उसके अधिकारियों के खिलाफ हत्या के आरोप में केस दर्ज किए जा सकते हैं. कोर्ट ने ये टिप्पणियां महामारी के बीच हुए चुनावों के दौरान भीड़ भरी रैलियों और रोड शो की इजाजत दिए जाने और महामारी की रोकथाम ने के लिए जरूरी नियमों का कड़ाई से पालन न कराए जाने पर नाराजगी जाहिर करते हुए की थी.

चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट की टिप्पणियों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी

चुनाव आयोग ने हाई कोर्ट की इन टिप्पणियों को अनुचित बताते हुए उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. साथ ही आयोग ने
सुप्रीम कोर्ट से यह मांग भी की है कि वह कोर्ट में सुनवाई के दौरान की गई जजों की उन टिप्पणियों को मीडिया में रिपोर्ट किए जाने पर रोक लगाए, जो अदालत के आदेश का हिस्सा नहीं हैं.

हाईकोर्ट की टिप्पणियों का मकसद नीचा दिखाना नहीं : SC

सुप्रीम कोर्ट ने आयोग की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मद्रास हाईकोर्ट की टिप्पणियों का मकसद संवैधानिक संस्था को नीचा दिखाना नहीं है. यह टिप्पणियां याचिका पर चर्चा के दौरान की गई होंगी और इसलिए उन्हें न्यायिक आदेश में शामिल नहीं किया गया है. कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग एक जिम्मेदार संवैधानिक संस्था है, जिस पर देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी है. उसे इस तरह की टिप्पणियों से विचलित नहीं होना चाहिए.

हालांकि इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वह अपने आदेश में चुनाव आयोग की इस चिंता का ध्यान रखेंगे कि मद्रास हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणियों में उनके खिलाफ जो गंभीर आरोप लगाए हैं, वे अनावश्यक हैं. कोर्ट ने कहा कि हम चाहते हैं दो संवैधानिक संस्थाओं के बीच संतुलन बना रहे.

अदालत में हुई बहस भी महत्वपूर्ण है : SC

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि आज के दौर में हम ऐसा नहीं कह सकते कि मीडिया कोर्ट में होने वाली बहस को रिपोर्ट न करे, क्योंकि ऐसा करना जनहित का काम है. अदालत में होने वाली बहस भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी अदालती आदेश. कोर्ट में संचालित होने वाली पूरी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान मीडिया एक ताकतवर वॉचडॉग का काम करता है और हम उसे इस प्रक्रिया की रिपोर्टिंग करने पर एतराज नहीं कर सकते.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र तभी सफल होता है जब उसकी संस्थाएं मजबूत होती हैं. डायलॉग संस्थानों को और मजबूत करता है. हमें इस प्रक्रिया की न्यायिक पवित्रता की रक्षा करनी है. हमें यह देखना है कि जज अपनी राय रखने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हों. हमें यह भी सुनिश्चित करना है कि अदालत में जो भी हो रहा है, उसे मीडिया रिपोर्ट करे, ताकि जज अदालती कार्यवाही का संचालन पूरी गरिमा के साथ करें. कोर्ट ने कहा, आयोग को समझना चाहिए जवाबदेही की भावना बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि मीडिया को हर बात रिपोर्ट करने की पूरी आजादी हो.

भारतीय अदालतों में खुलकर बहस होती है : SC

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जज वकीलों का जवाब जानने के लिए कई प्रश्न करते हैं. जिसका यह मतलब नहीं होता कि कोर्ट उस व्यक्ति या संस्था के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि हमारे यहां अदालतों के भीतर बहस की एक भारतीय परिपाटी है. यहां ऐसा नहीं होता कि लगातार एक व्यक्ति बोलता रहे और फिर उसके बाद जज बोले. हम हर पहलू पर खुलकर चर्चा और विचार विमर्श करते हैं.

चुनाव आयोग की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि हमें हाईकोर्ट में होने वाली चर्चाओं और टिप्पणियों पर एतराज नहीं है, लेकिन यह चर्चा और टिप्पणियां केस के संदर्भ में ही होनी चाहिए, मूल केस से हटकर नहीं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कई टिप्पणियां जनता के व्यापक हित में की जाती हैं. कई बार उसमें नाराज़गी होती है और कई बार किसी व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से निभाने के लिए प्रेरित करने के मकसद से कोई बात कही जाती है. कुछ जज कम टिप्पणियां करते हैं और कुछ खुलकर अपनी बात कह देते हैं.

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