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माइकल देबब्रत पात्रा RBI के चौथे डिप्टी गवर्नर नियुक्त, विरल आचार्य की लेंगे जगह

बतौर RBI डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा का कार्यकाल उनकी ​नियुक्त से अगले तीन साल के लिए होगा.

January 14, 2020 11:53 AM
who is Michael Debabrata Patra government appoints patra as forth RBI deputy governor post left vacant by Viral Acharyaबतौर RBI डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा का कार्यकाल उनकी ​नियुक्त से अगले तीन साल के लिए होगा. (Reuters)

सरकार ने मंगलवार को माइकल देबब्रत पात्रा (Michael Debabrata Patra) को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का चौथा डिप्टी गवर्नर नियुक्त कर दिया. फिलहाल, पात्रा RBI में कार्यकारी निदेशक पद पर कार्यरत हैं. माइकल पात्रा आरबीआई में विरल आचार्य की जगह लेंगे. आचार्य ने पिछले साल डिप्टी गवर्नर के पद से इस्तीफा दे दिया था. बतौर आरबीआई डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा का कार्यकाल उनकी ​नियुक्त से अगले तीन साल के लिए होगा.

आरबीआई में ​अभी तीन डिप्टी गवर्नर एनएस विश्वनाथन, बीपी कानूनगो और एमके जैन हैं. चौथे डिप्टी गवर्नर के पद पर नियुक्ति के लिए फाइनेंशियल सेक्टर रेग्युलेटरी अप्वाइंटमेंट सर्च कमिटी (FSRASC) ने नवंबर 2019 में साक्षात्कार के लिए सात कैंडिडेट के नाम शार्टलिस्ट किये थे. इस पैनल में मौजूदा आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास, वित्तीय सेवाओं के सचिव और कुछ अन्य स्वतंत्र सदस्य थे.

कौन हैं ​माइकल पात्रा?

डिप्टी गवर्नर पद पर नियुक्त हुए माइकल देबब्रत पात्रा आरबीआई मॉनिटरी पॉलिसी डिपार्टमेंट में कार्यकारी निदेशक रह चुके हैं. वह एमपीसी के एक सदस्य भी हैं. पिछली तीन आरबीआई पॉलिसी में पात्रा ने अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए ब्याज दरों में कटौती का समर्थन किया था.

पात्रा IIT Mumbai से अर्थशास्त्र में पीएचडी हैं. अक्टूबर 2015 में मॉनिटरी पॉलिसी ​डिपार्टमेंट में शामिल होने से पहले वह आर्थिक विश्लेषण विभाग में एक सलाहकार थे और अंतरराष्ट्रीय फाइनेंस, मनी एंड बैंकिंग के पॉलिसी प्रभारी थे. पात्रा ने 1985 में रिजर्व बैंक ज्वाइन किया था और इस दौरान केंद्रीय बैंक में कई जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं. वह हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक फेलो हैं.

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जुलाई 2019 में विरल आचार्य ने दिया था इस्तीफा

आरबीआई में चार डिप्टी गवर्नर होते हैं लेकिन ​जुलाई 2019 में ​विरल आचार्य ने समय से पहले इस्तीफा दे दिया था, जिसके चलते एक डिप्टी गवर्नर का पद रिक्त था. आचार्य ने अपना कार्यकाल पूरा होने के छह माह पहले ही इस्तीफा ​दिया था.

विरल आचार्य का कई मसलों पर सरकार के साथ मतभेद रहा, जिसके चलते उन्होंने पद छोड़ दिया. अक्टूबर 2018 में दिए गए एक भाषण के बाद यह तय हो गया था कि विरल अचार्य इस्तीफा दे देंगे. बता दें, विरल आचार्य को जनवरी 2017 में आरबीआई का डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया गया था. उनका कार्यकाल तीन साल का था.

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