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Electoral Bond: क्या है चुनावी बांड, राजनीतिक दलों को कैसे मिलता है चंदा; 10 खास बातें

चुनावी बांड से जुड़ी 10 खास बातें (Representational)

April 12, 2019 1:17 PM
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केंद्र सरकार ने देश के राजनीतिक दलों के चुनावी चंदे को पारदर्शी बनाने के लिए वित्त वर्ष 2017-18 के बजट में चुनावी बांड (Electoral Bond) शुरू करने का एलान किया था. चुनावी बांड से मतलब एक ऐसे बांड से होता है जिसके ऊपर एक करंसी नोट की तरह उसकी वैल्यू या मूल्य लिखा होता है. चुनावी यानी इलेक्टोरल बांड का इस्तेमाल व्यक्तियों, संस्थाओं और संगठनों द्वारा राजनीतिक दलों को चंदा देने के लिए किया जा सकता है.

चुनावी बांड से जुड़ी 10 खास बातें…

  1.  चुनावी बांड 1000, 10,000 और 1 लाख और 1 करोड़ रुपये के मल्टीपल में खरीदे जा सकते हैं. ये बांड्स देश भर में SBI के चुनिंदा ब्रांचेज पर उपलब्ध होंगे.
  2. चुनावी बांड सिर्फ वही खरीद सकते हैं जिनके खाते का केवाईसी वेरिफाइड होगा.
  3. चंदा देने वाले लोग इन बांड्स को अपनी पसंद की पार्टी को बांड खरीदने के 15 दिन के भीतर देना होगा.
  4. पॉलिटिकल पार्टी इस बांड को बैंक में वेरिफाइड एकाउंट के जरिए कैश कराएगी. बांड पर चंदा देने वाले का नाम नहीं होगा और इसकी डिटेल्स सिर्फ बैंक के पास रहेगी. Electoral Bonds: सभी राजनीतिक दल बताएं कितना मिला चंदा, चुनावी बांड्स पर SC का आदेश
  5. रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल्स एक्ट (43 ऑफ 1951) के सेक्शन 29A के तहत उन्हीं रजिस्टर्ड कंपनियों को चुनावी बांड के तहत चंदा दिया जा सकता है, जिन्होंने लेटेस्ट लोकसभा या राज्य विधानसभा के चुनाव में कम से कम एक फीसदी वोट पाए हों.
  6. पार्टियों को बांड कलेक्ट करने के लिए बैंक में अपना खाता खोलना होगा और इसे चुनाव आयोग से वेरिफाई कराना होगा.
  7. केंद्र सरकार के निर्देशों के मुताबिक हर तिमाही की शुरुआत में 10 दिनों तक बांड खरीदे जा सकते हैं.
  8. चुनावी बांड जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर के शुरुआती 10 दिन में खरीदे जा सकते हैं.
  9. लोकसभा चुनाव वाले वर्ष में अतिरिक्त 30 दिनों तक बांड उपलब्ध रहेंगे. हालांकि ये 30 दिनों की यह अवधि केंद्र सरकार निर्धारित करेगी.
  10. चुनावी बॉन्ड खरीदने वालों के नाम गोपनीय रखा जाएगा. इन बांड्स पर बैंक कोई ब्याज नहीं देता है.

 

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