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पुतिन के दौरे से भारत के लिए क्या हासिल कर पाए मोदी

पुतिन के इस दौरे पर भारत और रूस के बीच कई साझेदारियां हुई हैं. आइये जानते हैं उन प्रमुख बातों को जिससे भारत के लिए पुतिन का यह दौरा फायदेमंद रहा.

Updated: Oct 06, 2018 2:04 PM
india russia relations, russia india market, india russia bilateral ties, narendra modi, vladimir putin, india russia partnershipपुतिन के इस दौरे पर भारत और रूस के बीच कई साझेदारियां हुई हैं. आइये जानते हैं उन प्रमुख बातों को जिससे भारत के लिए पुतिन का यह दौरा फायदेमंद रहा. (PIB)

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिनों के भारत दौरे पर गुरुवार और शुक्रवार को भारत में थे. पुतिन के इस दौरे पर भारत और रूस के बीच कई साझेदारियां हुई हैं. आइये जानते हैं उन प्रमुख बातों को जिससे भारत के लिए पुतिन का यह दौरा फायदेमंद रहा.

भारत-रूस का व्यापार 2025 तक 30 अरब डॉलर का होगा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और रूस के बीच व्यापार बढ़ने की उम्मीद जाहिर करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़कर 2025 तक 30 अरब डॉलर हो जाएगा. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस को भारत में डिफेंस इंडस्ट्री पार्क बनाने का न्योता दिया. द्विपक्षीय व्यापार में बढ़ोतरी की बात को महसूस करते हुए मोदी ने कहा कि दोनों देश आने वाले दिनों में नई और रिन्यूएबल एनर्जी, न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी और रक्षा के क्षेत्र में और नज़दीकी से काम करेंगे.

पुतिन ने कहा, “आपसी व्यापारिक कारोबार में काफी इज़ाफा हुआ है. वर्ष 2017 में 21 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ व्यापार 9.36 अरब डॉलर तक पहुंच गया. इस साल जनवरी से जुलाई के दौरान 20 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ छह अरब डॉलर का व्यापार हुआ और हम इसे 10 अरब डॉलर या उससे अधिक करना चाहते हैं.” उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी में प्रगति से अधिक ग्रोथ और निवेश हासिल करना संभव हुआ है. उन्होंने कहा, “हम अपना आपसी व्यापार बढ़ाकर 2025 तक 30 अरब डॉलर करना चाहते हैं. साथ ही, दोनों में से प्रत्येक देश में आपस में 15 अरब डॉलर का निवेश करना चाहते हैं.” प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले दो साल में दोनों देशों के बीच परस्पर व्यापार काफी बढ़ा है और वर्ष 2017-18 में द्विपक्षीय व्यापार में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

भारत में 6 अतिरिक्त परमाणु रिएक्टर लगाए जाएंगे

भारत और रूस ने एडवांस्ड फ्यूल से लैस VVIR-1200 केटेगरी के रिएक्टरों के साथ भारत में नए एटॉमिक पॉवर प्रोजेक्ट में सहयोग के डाक्यूमेंट्स पर हस्ताक्षर किए. यह समझौता तमिलनाडु में मौजूदा 6,000 मेगावाट की कुडनकुलम परियोजना के समानांतर 6 रिएक्टरों की स्थापना के लिए किया गया है, जिसके लिए जगह तय होने हैं.

दोनों देशों ने कुडनकुलम के बाद दूसरी न्यूक्लियर पॉवर प्रोजेक्ट के लिए सहमति जताई है, जिसके तहत पहले की पीढ़ी के 1000 मेगावाट क्षमता वाले 6 VVIR का निर्माण किया गया था. VVIR-1200, VVIR-1000 से 20 गुना अधिक पॉवरफुल है.

रूस भारत के 2008 में परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) में शामिल होने से पहले से ही भारत को इस क्षेत्र में सहयोग कर रहा है. भारत, रूस के साथ मिलकर बांग्लादेश के रूपपुर में उसके पहले न्यूक्लियर प्लांट के निर्माण में सहयोग कर रहा है.

स्थानीय करेंसी में व्यापार को प्रोत्साहन देने के पक्ष में हैं भारत, रूस

भारत और रूस ने द्विपक्षीय व्यापार में दोनों देशों की राष्ट्रीय करेंसी को प्रोत्साहन देने का समर्थन किया. समझौते में कहा गया है कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार राष्ट्रीय मुद्राओं में करने का समर्थन किया. मतलब दोनों देश अब भारतीय रुपये और रूसी रूबल में व्यापार करेंगे. दोनों देशों में बहुमूल्य धातु, खनिज, प्राकृतिक संसाधन और वन उत्पाद क्षेत्रों में आपसी सहयोग से संभावनाएं तलाशने की सहमति बनी है. इसके साथ ही भारत और रूस ने यूरेशिया इकोनॉमिक यूनियन और उसके सदस्य देशों के साथ फ्री ट्रेड अग्रीमेंट को तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत बताई.

S-400 Air Defence System

अमेरिका द्वारा प्रतिबंध की धमकी को दरकिनार करते हुए भारत और रूस ने लंबी दूरी तक सतह से हवा में मार करने वाली S-400 मिसाइल सौदे को अंतिम रूप दे दिया. यह रक्षा सौदा 5.4 अरब डॉलर (करीब 40,000 करोड़ रुपये) का हुआ. नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन ने मीडिया के सामने अपने बयानों में हालांकि इसका कोई जिक्र नहीं किया. अमेरिका द्वारा भारत को इस सौदे को न करने का दवाब डालने से इसकी संवेदनशीलता का अंदाजा लगाया जा सकता है.

S-400 के बारे में विस्तार से जानिए  S-400 Air Defence System: भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम को मिलेगा बूस्ट

S-400 समझौते के बाद अमेरिका

हालांकि भारत और रूस द्वारा S-400 समझौते के बाद अमेरिकी दूतावास ने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों का मकसद रूस पर प्रतिबंध को लागू करना है न कि अपने सहयोगियों की सैन्य क्षमताओं को नुकसान करना.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

भारत और रूस के बीच हुए S-400 डील के बारे में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल रिलेशन डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर राजन कुमार बताते हैं, “S-400 डील से भारतीय एयर फोर्स को बूस्ट मिलेगा. यह डील भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. चीन के पास भी S-400 मिसाइल हैं लेकिन इससे बेहतर मिसाइल चीन के पास भी नहीं है. किसी कारणवश यदि भारत को दो फ्रंट पर युद्ध लड़ना पड़े तो यह भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि इसे स्ट्रेटेजिक लोकेशन पर इसे रखा जा सकता है. इसमें एक साथ कई लेयर से मिसाइल फायर करते हैं जिसके कारण इसकी क्षमता काफी बढ़ जाती है,”

अमेरिका के संभावित बैन को लेकर राजन बताते हैं, “अमेरिका इस चीज को समझता है कि चीन और रूस के बेहतर संबंध हैं. चीन, अमेरिका को कई जगहों पर जोरदार टक्कर दे रहा है और इस सन्दर्भ में भारतीय उपमहाद्वीप में भारत, अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण साथी है और ऐसे में अमेरिका ऐसा कुछ नहीं करना चाहेगा जिससे भारत से उसके संबंध खराब हों.”

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