विजय माल्या प्रत्यर्पण मामला: 10 दिसंबर को फैसला सुनाएगी यूके कोर्ट, जेटली से मुलाकात पर माल्या ने दी सफाई

भारत दिसंबर 2017 से माल्या के फ्रॉड मामले में दोषी होने को सिद्ध करने की कोशिश कर रहा है.

 माल्‍या पर भारतीय बैंकों का लगभग 9000 करोड़ रुपये का बकाया है. (Reuters)

विजय माल्या को भारत को सौंपे जाने के मामले में लंदन की वेस्टमिन्स्टर मजिस्ट्रेट्स कोर्ट 10 दिसंबर 2018 को अंतिम फैसला करेगी. इस मामले में आज हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने भारतीय अथॉरिटीज द्वारा मुंबई की आर्थर रोड जेल के तैयार किए गए एक वीडियो का रिव्यू किया. विजय माल्या को भारत को सौंपे जाने पर वह इसी जेल में रहेंगे. बता दें कि माल्‍या पर बैंकों का लगभग 9000 करोड़ रुपये का बकाया है और वह इस वक्‍त ब्रिटेन में हैं. उन्हें पिछले साल अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था लेकिन कुछ ही देर बाद उन्हें जमानत मिल गई थी.

वहीं दूसरी ओर माल्या ने कोर्ट से बाहर आने के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ मुलाकात वाले बयान को लेकर सफाई दी. न्यूज एजेंसी ANI के एक ट्वीट के मुताबिक, माल्या ने कहा कि वह देश छोड़ने से पहले जेटली से मिले जरूर थे लेकिन यह एक आकस्मिक मुलाकात थी, जो संसद में हुई थी. उस वक्त उन्होंने जेटली से अपने लंदन जाने की बात कही थी. उनकी जेटली के साथ कोई औपचारिक मुलाकात नहीं हुई थी.

जेटली ने बताया था तथ्यात्मक रूप से गलत

बता दें कि दोपहर में कोर्ट में पेश होने से पहले माल्या ने बयान दिया था कि भारत छोड़ने से पहले उन्होंने वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की थी. साथ ही बैंकों के साथ सेटलमेंट के अपने आॅफर को भी दोहराया था. माल्या के इस बयान के बाद वित्त मंत्री जेटली ने भी अपनी ओर से बयान जारी किया और माल्या की बात को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया.

न्यूज एजेंसी ANI के एक ट्वीट के मुताबिक जेटली ने कहा, “माल्या का बयान तथ्यात्मक रूप से झूठा है. 2014 के बाद से मैंने माल्या को खुद से मिलने के लिए कोई अपॉइंटमेंट नहीं दिया. इसलिए मेरा माल्या से मिलने का सवाल ही पैदा नहीं होता.”

 

 

मुझ पर लगे आरोप गलत: माल्या

माल्या ने कोर्ट के बाहर यह भी कहा कि वह उन पर लगे आरोपों से सहमत नहीं हैं. लेकिन अब कोर्ट ही फैसला करेगा. ANI के एक ट्वीट के मुताबिक, कोर्ट के बाहर माल्या से पूछा गया कि क्या उन्होंने कोर्ट को इस बात का भरोसा दिला दिया है कि वह बैंकों के बकाए का भुगतान कर देंगे. इस पर माल्या ने कहा कि भरोसा दिला दिया इसीलिए तो सेटलमेंट का आॅफर दिया.

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने मांगा था आर्थर रोड जेल का वीडियो

लंदन की वेस्टमिन्स्टर मजिस्ट्रेट्स कोर्ट में इससे पहले जुलाई को हुई सुनवाई में जज एमा आर्बथनॉट ने भारतीय अथॉरिटीज से एक वीडियो की मांग की थी. यह वीडियो मुंबई की आर्थर रोड जेल के बैरक 12 का है. भारत को सौंपे जाने के बाद अगर भारतीय कोर्ट विजय माल्या को दोषी पाते हैं तो उन्हें इसी बैरक में रखने की संभावना है. वीडियो के जरिए यूके कोर्ट इस बैरक की स्थिति का जायजा लेना चाहता है.

दरअसल माल्या की डिफेंस टीम ने इस बैरक की जांच की मांग की थी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह बैरक प्रत्यर्पण की कार्रवाई से संबंधित ब्रिटेन की ह्यूमन राइट्स शर्तों को पूरा करती है या नहीं.

भारत की ओर से मान ली गई थी मांग

भारत की ओर से यूके कोर्ट में मुकदमा लड़ रही क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) ने कोर्ट का यह निर्देश मान लिया था और वीडियो सबमिट कर दिया था. सीपीएस की ओर से कहा गया था कि भारतीय सरकार ने जांच के लिए पर्याप्त मैटेरियल उपलब्ध करा दिया है.

दिसंबर 2017 से माल्या के प्रत्यर्पण की हो रही कोशिश

यूके कोर्ट में भारत दिसंबर 2017 से माल्या के फ्रॉड मामले में दोषी होने को सिद्ध करने की कोशिश कर रहा है. साथ ही लगातार यह भी साबित करने में जुटा है कि माल्या को भारत को सौंपने में कोई रुकावट नहीं है और माल्या के साथ भारत में किसी भी तरह का अन्याय नहीं होगा.

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