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Uttarakhand Updates: ग्लेशियर फटा या हिमस्खलन से आई तबाही? वैज्ञानिक लगाएंगे पता; अबतक 14 शव मिले

Uttarakhand Glacier Burst Updates: उत्तराखंड हासदे के बारे में वैज्ञानिकों की 2 टीम अध्ययन करेगी. फिलहाल रेस्क्यू आपरेशन जारी है और अबतक 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है.

Updated: Feb 08, 2021 9:53 AM
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Uttarakhand Glacier Burst Updates: उत्तराखंड के चमोली जिले में नंदा देवी ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने से भारी तबाही आई है. रेस्क्यू आपरेशन में अबतक 14 शव बरामद किए जा चुके हैं. करीब 150 लोगों के लापता होने की खबर आई है. आखिर यह हादसा कैसे हुआ, इसके पीछे कारणों का अध्ययन करने के लिए वैज्ञानिकों (ग्लेशियोलॉजिस्ट) की दो टीमें जोशीमठ-तपोवन जाएंगी. फिलहाल चमोली के तपोवन टनल में रेस्क्यू आपरेशन जारी है और अबतक 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है. वहीं, 14 शव अबतक बरामद हुए हैं. चमोली में अभी भी कुछ लोगों के टनल में फंसे होने की खबर है.

टनल को खोलने के लिए एक्‍सावेटर और पोकलैंड मशीन लगाई गई है. चमोली पुलिस ने ट्वीट करते हुए कहा है, टनल में फंसे लोगों के लिए राहत एवं बचाव कार्य जारी. जेसीबी की मदद से टनल के अंदर पहुंच कर रास्ता खोलने का प्रयास किया जा रहा है. आईटीबीपी का कहना है कि हमारी टीम ने दूसरी टनल में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है. हमें जानकारी है कि लगभग 30 लोग वहां फंसे हुए हैं. टनल को साफ करने के लिए लगभग 300 आईटीबीपी के जवान लगाए गए हैं.

मुआवजे का एलान

राज्‍य में आई तबाही के बाद राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है. केंद्र सरकार ने कहा क‍ि उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर के फटने से प्रभावित नदी के जल स्तर में बढ़ोत्तरी हुई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के परिवार को PMNRF से 2-2 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 50-50 हजार मुआवजे का एलान किया है. वहीं उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि इस घटना में जिन लोगों की मृत्‍यु हुई है, उन सभी के परिवार को राज्‍य सरकार 4-4 लाख रुपये मुआवजा के तौर पर देगी. उत्तराखंड में तबाही को देखते हुए उप्र और बिहार में गंगा किनारे के सभी जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है.

वैज्ञानिक करेंगे अध्ययन

वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के निदेशक कलाचंद सैन ने कहा है कि उत्तराखंड के चमोली जिले में नंदा देवी ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने के बाद आई व्यापक बाढ़ के कारणों का अध्ययन करने के लिए ग्लेशियर के बारे में जानकारी रखने वाले वैज्ञानिकों (ग्लेशियोलॉजिस्ट) की दो टीमें जोशीमठ-तपोवन जाएंगी. ग्लेशियोलॉजिस्ट की दो टीम हैं. एक में दो सदस्य हैं और एक अन्य में तीन सदस्य हैं.

वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, क्षेत्र में हिमनदों और भूकंपीय गतिविधियों सहित हिमालय के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करता है. इसने उत्तराखंड में 2013 की बाढ़ पर भी अध्ययन किया था. सैन ने कहा कि टीम त्रासदी के कारणों का अध्ययन करेगी. हमारी टीम ग्लेशियोलॉजी के विभिन्न पहलुओं को देख रही होगी. उन्होंने कहा कि रविवार की घटना अजीब थी, क्योंकि बारिश नहीं हुई थी और न ही बर्फ पिघली थी.

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