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पटेल की इस्तीफे से क्या आर्थिक मोर्चे पर मुश्किलें बढ़ेंगी? केंद्र-RBI के बीच इन 4 मुद्दों पर टकराव!

पटेल ने इस्तीफा ऐसे समय दिया है जब सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच लिक्विडिटी और क्रेडिट की कमी को लेकर खींचतान चल रही थी, जिसको लेकर 19 नवंबर को आरबीआई बोर्ड की एक असाधारण बैठक भी हुई थी.

December 10, 2018 9:29 PM
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर उर्जित पटेल ने सोमवार को ‘निजी कारणों’ का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे देश के राजनीतिक-आर्थिक परिदृश्य में एक बड़े संकट की आशंका पैदा हो गई है. पटेल ने इस्तीफा ऐसे समय दिया है जब सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच अर्थव्यवस्था में नकदी (लिक्विडिटी) और ऋण (क्रेडिट) की कमी को लेकर खींचातान चल रही थी, जिसको लेकर 19 नवंबर को आरबीआई बोर्ड की एक असाधारण बैठक भी हुई थी.

पटेल ने आरबीआई की ओर से जारी एक संक्षिप्त बयान में कहा, “निजी कारणों से मैंने अपने मौजूदा पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है.” पटेल ने 4 सिंतबर 2016 को तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए आरबीआई गवर्नर का पद संभाला था. इससे पहले रिजर्व बैंक के तत्कालीन गवर्नर रघुराम राजन के कार्यकाल में विस्तार नहीं हुआ था.

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सरकार-आरबीआई के बीच कब और बिगड़ गए संबंध

सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच संबंध अक्टूबर में तब फिर से खराब हो गए थे, जब आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने लोगों को संबोधित करते हुए रिजर्व बैंक की स्वतंत्रता की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि इस बाबत किसी भी प्रकार का समझौता अर्थव्यवस्था के लिए ‘संभावित विनाश’ का कारण बन सकता है.

सरकार ने वित्त मंत्रालय की ओर से इसका जवाब दिया और आरबीआई अधिनियम की धारा 7 के तहत (जिसका इस्तेमाल पहले कभी नहीं हुआ था) केंद्रीय बैंक से विचार-विमर्श करने का प्रस्ताव रखा. यह धारा सरकार को आरबीआई गवर्नर को दिशा-निर्देश देने का अधिकार देती है. इसके बाद गवर्नर ने बैंक बोर्ड की बैठक बुलाई थी.

चार मुद्दों पर था मतभेद?

सरकार का आरबीआई के साथ चार मुद्दों पर मतभेद था. सरकार क्रेडिट फ्रीज के किसी भी खतरे को दूर करने के लिए नकदी समर्थन चाहती है. दूसरा ऋणदाताओं के लिए पूंजी जरूरतों में छूट, तीसरा गैर निष्पादित संपत्ति या एनपीए से जूझ रहे बैंकों के त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) नियमों में छूट और चौथा सूक्ष्म, छोटे व मझौले उद्योग को समर्थन है.

नकदी मामले में सरकार की मांग थी कि आरबीआई अपने ‘आर्थिक पूंजी ढांचे’ में बदलाव कर अपने सरप्लस रिजर्व को सरकार को सुपुर्द करे. विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार ने भारी राजकोषीय घाटे और चुनावी वर्ष में अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए यह मांग रखी.

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पीएम मोदी ने की थी मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरबीआई बोर्ड बैठक से पहले पटेल से मुलाकात की थी. रिजर्व के मुद्दे पर, आरबीआई बोर्ड ने इसके आर्थिक पूंजीगत ढांचे की जांच करने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने का फैसला किया, जो यह निर्णय करेगी कि आरबीआई को कितना रिजर्व रखना है और कितना सरकार को सुपुर्द करना है.

पटेल के इस्तीफे पर PM मोदी क्या बोले?

PM मोदी ने पटेल को पूरी तरह पेशेवर और निष्कलंक बताया. PM ने ट्वीट में कहा कि उर्जित पटेल के नेतृत्व में रिजर्व बैंक ने वित्तीय मोर्चे पर स्थिरता कायम की. पटेल ने बैंकिंग प्रणाली को अराजकता से निकाला और अनुशासन सुनिश्चित किया. उन्होंने यह भी कहा कि पटेल एक ऐसे इकोनॉमिस्ट हैं, जिन्हें मैक्रो इकोनॉमिक मुद्दों की काफी गहरी और व्यावहारिक समझ है.

सरकार तुरंत एक नया गवर्नर नियुक्त करे: पूर्व RBI गवर्नर सी.रंगराजन

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर सी. रंगराजन ने सोमवार को कहा कि वह आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल के इस्तीफे से ‘दुखी’ और ‘हैरान’ हैं. रंगराजन ने आईएएनएस से कहा, “यह दुखद है, क्योंकि आरबीआई गवर्नर के इस्तीफे का असर वित्तीय बाजार पर पड़ेगा. सरकार को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए और तुरंत एक नया गवर्नर नियुक्त करना चाहिए.”

आंध्रप्रदेश के पूर्व राज्यपाल रंगराजन ने कहा, “उन्होंने इस्तीफा देने का निजी कारण बताया है, लेकिन उनके इस्तीफे के पीछे कुछ कारण जरूर रहे होंगे.” हैरान क्यों हैं? यह पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “मैंने सोचा था कि बोर्ड की अंतिम बैठक में आरबीआई और केंद्र सरकार के बीच कई मामले सुलझा लिए गए हैं और बाकी मुद्दे भी जल्द ही सुलझा लिए जाएंगे.”

रंगराजन वर्ष 2009-14 के दौरान प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष भी थे. रंगराजन के अनुसार, वह समझते थे कि आरबीआई और केंद्र के बीच मुद्दे सुलझा लिए गए हैं और समितियों के गठन को लेकर एक-दो चीजों को सुलझाया जाना बाकी रह गया है.

(Input: IANS)

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