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Budget 2021: कोविड का असर! आजादी के बाद पहली बार ऐसा होगा बजट, हुआ बड़ा बदलाव

Union Budget 2021-22: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2021-22 का बजट पेश करने वाली हैं.

Updated: Jan 11, 2021 7:26 PM
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Union Budget 2021: सरकार ने इस बार बजट डॉक्युमेंट की छपाई नहीं करने का फैसला किया है. इसके पीछे वजह कोविड19 प्रोटोकॉल हैं. बजट 2021 की कॉपी संसद के सदस्यों को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से बांटी जाएगी. आजादी के बाद ऐसा पहली बार होगा, जब बजट डॉक्युमेंट की फिजिकली छपाई नहीं होगी. स्वतंत्र भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को पेश हुआ था. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2021-22 का बजट पेश करने वाली हैं.

सूत्रों का कहना है कि कोविड19 के चलते फैसला किया गया है कि केन्द्रीय बजट 2021-22 से संबंधित डॉक्युमेंट्स की छपाई नहीं होगी. संसद के सभी सदस्यों को बजट व आर्थिक सर्वे की सॉफ्ट कॉपीज मिलेंगी.

बजट और हलवा सेरेमनी

आमतौर पर बजट पेश होने से कुछ दिन पहले हलवा सेरेमनी होती है. इसी के साथ बजट डॉक्युमेंट्स की छपाई शुरू होती है और वित्त मंत्रालय के करीब 100 कर्मचारी मंत्रालय के बेसमेंट में बनी प्रिंटिंग प्रेस में कुछ दिनों के लिए एक तरह से लॉक हो जाते हैं. बजट दस्तावेजों के प्रिंट होने, सील होने और बजट के दिन इसे डिलीवर किए जाने तक वे बेसमेंट में ही रहते हैं. सूत्रों के मुताबिक, कोविड19 संक्रमण के जोखिम को देखते हुए आजादी के बाद पहली बार देश के बजट की फिजिकल कॉपीज सांसदों को नहीं दी जाएंगी. इसकी जगह बजट और आर्थिक सर्वे की सॉफ्ट कॉपी शेयर की जाएंगी.

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BJP कार्यकाल में पहले भी टूटी हैं परंपराएं

इससे पहले भी मोदी सरकार के कार्यकाल में बजट के मामले में अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही परंपरा टूटी है. मोदी सरकार ने बजट को फरवरी माह के आखिरी दिन पेश होने की परंपरा को तोड़ फरवरी की पहली तारीख को पेश किए जाने की परंपरा शुरू की. दिवंगत अरुण जेटली ने वित्त मंत्री के तौर पर 1 फरवरी 2017 को पहली बार बजट को फरवरी के पहले दिन पेश किया था.

1999 में बीजेपी सरकार के केन्द्र में कार्यकाल के दौरान तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने बजट को शाम 5 बजे की बजाय सुबह 11 बजे पेश करेन की परंपरा की शुरुआत की. आजादी से पहले अंग्रेजों के शासनकाल में बजट शाम को इसलिए पेश किया जाता था क्योंकि ब्रिटेन की संसद ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ और ‘हाउस ऑफ लॉर्ड्स’ के सदस्य भी भारत का बजट सुनते थे. भारत और ब्रिटेन के वक्त में अंतर है.

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