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4 घंटे की बहस के बाद लोकसभा में तीन तलाक बिल पास, कानून मंत्री बोले- मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाना है एकमात्र उद्देश्य

सरकार ने स्पष्ट किया कि यह विधेयक किसी को निशाना बनाने के लिए नहीं.

Updated: Dec 27, 2018 9:03 PM
triple talaq bill passed in loksabhaविधेयक में सजा के प्रावधान का कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया और इसे संयुक्त प्रवर समिति में भेजने की मांग की. (PTI)

मुस्लिम समाज में एक बार में (Instant) तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाए गए ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक’ यानी तीन तलाक बिल को लोकसभा की मंजूरी मिल गई.

विधेयक में सजा के प्रावधान का कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया और इसे संयुक्त प्रवर समिति में भेजने की मांग की. हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि यह विधेयक किसी को निशाना बनाने के लिए नहीं बल्कि मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लाया गया है.

सदन ने एन के प्रेमचंद्रन के सांविधिक संकल्प एवं कुछ सदस्यों के संशोधनों को नामंजूर करते हुए तीन तलाक बिल को मंजूरी दे दी. विधेयक पर वोटिंग के दौरान इस बिल के पक्ष में 245 वोट और विपक्ष में 11 मत पड़े. अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा. इससे पहले भी यह बिल लोकसभा में पास हुआ था, लेकिन राज्यसभा से इसे मंजूरी नहीं मिल सकी थी.

विपक्ष ने किया वॉकआउट

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के विधेयक पर चर्चा के जवाब के बाद कांग्रेस, सपा, राजद, राकांपा, तृणमूल कांग्रेस, तेदेपा, अन्नाद्रमुक, टीआरएस, एआईयूडीएफ ने सदन से वॉकआउट किया. विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए प्रसाद ने कहा कि इसे राजनीति के तराजू पर तौलने की बजाय इंसाफ के तराजू पर तौलने की जरूरत है. आगे कहा कि हमारी सरकार के लिए महिलाओं का सशक्तिकरण वोट बैंक का विषय नहीं है, हम मानते हैं कि महिलाओं का सम्मान होना चाहिए.

पहले इतने सुधारात्मक बिल आए, उन पर तो नहीं उठे सवाल

प्रसाद ने विधेयक को संयुक्त प्रवर समिति को भेजने की विपक्ष की मांग पर कहा कि इस मांग के पीछे एक ही कारण है कि इसे आपराधिक क्यों बनाया गया. उन्होंने आगे कहा कि संसद ने 12 वर्ष से कम उम्र की बालिका से बलात्कार के मामले में फांसी की सजा संबंधी कानून बनाया. क्या किसी ने पूछा कि उसके परिवार को कौन देखेगा? दहेज प्रथा के खिलाफ कानून में पति, सास आदि को गिरफ्तार करने का प्रावधान है. जो दहेज ले रहे हैं, उन्हें पांच साल की सजा और जो इसे प्रात्साहित करते हैं, उनके लिये भी सजा है. इतने कानून बने, इन पर तो सवाल नहीं उठाया गया.

बिल का विरोध वोट बैंक की राजनीति

तीन तलाक के मामले में सवाल उठाया जा रहा है, उसके पीछे वोट बैंक की राजनीति है. यह मसला वास्तव में वोट बैंक से जुड़ा है. कांग्रेस पर निशाना साधते हुए प्रसाद ने कहा कि शाह बानो मामले में जब संसद में बहस हुई तब डेढ़ दिनों तक कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ थी लेकिन बाद में वह बदल गई.

जनवरी 2017 के बाद से तीन तलाक के 417 मामले

प्रसाद ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन तलाक असंवैधानिक घोषित करने की पृष्ठभूमि में यह विधेयक लाया गया है. जनवरी 2017 के बाद से तीन तलाक के 417 वाकये सामने आए हैं. आगे कहा कि 20 से अधिक इस्लामी मुल्कों में तीन तलाक नहीं है. हमने पिछले विधेयक में सुधार किया है और अब मजिस्ट्रेट जमानत दे सकता है.

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