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चालान से राहत देने के लिए पुलिस का खास आइडिया; जांच चौकी पर बिक रहा है हेलमेट, इंश्योरेंस की भी सुविधा

देश भर में 1 सितंबर से नया मोटर वाहन कानून लागू हो गया है.

September 10, 2019 3:20 PM
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देश भर में 1 सितंबर से नया मोटर वाहन कानून लागू हो गया है, जिसके बाद ट्रैफिक के रूल तोड़ने पर भारी जुर्माना देना पड़ रहा है. हेलमेट न पहनने, पल्यूशन सर्टिफिकेट न होने से लेकर गाड़ी का इंश्योरेंस न होने या जरूरी कागज न रखने पर ट्रैफिक पुलिस ​कड़ा जुर्माना वसूल रही है. लेकिन इसी बीच पुलिसक अनोखा व्यवहार भी सामने आया है. पुलिस अपनी जांच चौकी पर भी हेलमेट बेचने से लेकर बीमा का नवीनीकरण कराने का इंतजाम कर, भूल सुधारने का मौका दे रही है.

कहां का है ये मामला

यह मामला है बिहार के मोतिहारी शहर का, जहां बिना हेलमेट चलने वालों या जिनका बीमा खत्म हो चुका है, उनका चालान काटने की जगह पुलिस उन्हें अपनी गलती सुधारने का मौका दे रही है. इसके लिए पुलिस ने जांच चौकियों पर ही व्यवस्था की है, ताकि सवारी तुरंत हेलमेट खरीद सकें और वाहन बीमा का नवीनीकरण करा सकें. इस अभियान की शुरुआत पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में छतौनी थाने के एसएचओ मुकेश चंद्र कुंवर ने की है.

जांच चौकियों के पास लगे स्टॉल

कुंवर ने न्यूज एजेंसी को बताया कि मैंने कुछ हेलमेट विक्रेताओं और बीमा एजेंटों से बात की है, जिन्होंने जांच चौकियों के पास स्टॉल लगाए हैं. सवारियों पर जुर्माना नहीं लगाया जा रहा है, क्योंकि इससे उन्हें महसूस होता है कि वे अपराधी हैं. इसके बजाय, वे अच्छी गुणवत्ता वाले हेलमेट खरीदने और अपने बीमा को नवीकृत कराने के लिए प्रोत्साहित होते हैं. अधिकारी ने कहा कि उन्होंने जिला परिवहन विभाग से एक अधिकारी को तैनात करने का भी अनुरोध किया है, जो बिना लाइसेंस के गाड़ी चला रहे लोगों को मौके पर ही लर्नर लाइसेंस जारी कर दें.

जनता की धारणा बदलेगी

उन्होंने कहा कि जनता के बीच इस बात की भी धारणा बढ़ रही है कि संशोधित मोटर वाहन अधिनियम ने पुलिस को जबरन पैसा निकलवाने के लिए खुली छूट दे दी है. इस तरह का अविश्वास पुलिस व्यवस्था के लिए हानिकारक है. एसएचओ ने कहा कि मोतिहारी का ऐतिहासिक महत्व है जहां महात्मा गांधी ने 1917 में चंपारण सत्याग्रह का शुभारंभ किया था. मैंने ऐतिहासिक विरासत से प्रेरणा ली और इस योजना को ले आया, जो हमें संशोधित एमवी एक्ट के उद्देश्य को प्रभावी तरीके से हासिल करने में मदद कर सकता है.

सभी अपराध माफ नहीं

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सद्भावना के आधार पर सभी अपराधों को माफ नहीं किया जा सकता है. अगर कोई व्यक्ति शराब के नशे में या शराब के प्रभाव में पाया जाता है, जिसकी बिक्री और खपत बिहार में प्रतिबंधित है, तो हमारे पास कानून के मुताबिक कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है.

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