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GSTN का टैक्स चोरी रोकने के लिए एक और कदम, मंथली सेल रिटर्न का E-Way बिल से होगा मिलान

GST नेटवर्क ने टैक्स चोरी को पकड़ने के लिए एक और कदम उठाया है. अब कारोबारियों की मंथली सेल रिटर्न के साथ उनके द्वारा भेजे गये सामान के ई-वे बिल के आंकड़ों को मैच भी किया जा सकेगा.

Updated: Jan 31, 2019 7:21 AM
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GST नेटवर्क ने टैक्स चोरी को पकड़ने के लिए एक और कदम उठाया है. अब कारोबारियों की मंथली सेल रिटर्न के साथ उनके द्वारा भेजे गये सामान के ई-वे बिल के आंकड़ों का मिलान भी किया जा सकेगा. अब 50 हजार रुपये से अधिक का सामान भेजने वाले व्यापारियों को GSTR-A के तहत आखिरी मंथली सेल रिटर्न दायर करते वक्त ई-वे बिल की जानकारी शामिल करने का ऑप्शन भी होगा.

टैक्स जानकारों का मानना है कि ई-वे बिल के रसीदों का GSTR-A के बिक्री आंकड़ों से मैच करने पर कर अधिकारियों को यह पता करने में मदद मिलेगी कि बिक्री रिटर्न और उस पर किया गया GST भुगतान सही है या नहीं. इससे सप्लाई के बारे में अलग आंकड़े पेश कर रहे टैक्स चोरी करने वालों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी.

GST नेटवर्क ने कहा कि दो बार आंकड़े डालने से बचने के लिये GSTN ने टैक्स भरने वालों को ऐसी सुविधा दी है, जिसके तहत मंथली ई-वे बिल के आंकड़े ड्राफ्ट में दिखेंगे और GSTR-A का फॉर्म भरते समय टैक्स पेयर्स को इसकी जरूरत पड़ेगी. टैक्स पेयर्स GSTR-A फॉर्म में आंकड़े इंपोर्ट कर सकेंगे या GSTR-A रिटर्न फॉर्म तैयार करने के लिये इसे इंपोर्ट कर GSTR-1 ऑफलाइन टूल के साथ इस्तेमाल कर सकेंगे.

एक राज्य से दूसरे राज्य में 50 हजार रुपये से अधिक का सामान ले जाने के लिये एक अप्रैल 2018 से ई-वे बिल की शुरुआत की गयी थी. इसी तरह एक ही राज्य के अंदर सामान ले जाने के लिये ई-वे बिल की शुरुआत 15 अप्रैल 2018 से फेस बाइ फेस तरीके से की गयी थी. इसके बाद जांच अधिकारियों ने पाया कि कुछ ट्रांसपोर्टर एक ही ई-वे बिल पर कई बार सामान ले जा रहे हैं या GSTR-1 भरते समय ई-वे बिल की रसीदों का जिक्र नहीं कर रहे हैं. इसके अलावा यह भी जानकारी में आया कि आपूर्ति के बाद भी ई-वे बिल उत्पन्न नहीं किया गया है.

GSTN ने कहा कि ई-वे बिल निकालते समय सप्लायर की जानकारी, सामान लेने वाले की जानकारी, नंबर, तारीख, सामान, गुणवत्ता, HSN कोड जैसी जानकारियां ई-वे बिल पोर्टल पर दी जाती हैं. अब इन आंकड़ों को GST पोर्टल पर ट्रांसफर कर दिया जाएगा. GSTN के CEO प्रकाश कुमार ने कहा, ‘‘इस सुविधा के साथ टैक्सपेयर्स को ई-वे बिल के सभी रसीदों की जानकारी GSTR-A फॉर्म में देने की जरूरत नहीं होगी. इससे टैक्सपेयर्स को एक ही आंकड़े दो बार दिए जाने से छुटकारा मिलेगा. यह GSTR-1 भरने में समय कम करने में भी मदद करेगा। इससे आंकड़े दिए जाने में गलतियां भी कम होंगी.

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