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आरटीआई पर केंद्रीय बैंक को सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी, दिया ‘आखिरी मौका’

सूचना का अधिकार कानून के तहत आरबीआई की नीति पर सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी है.

Updated: Apr 27, 2019 6:02 PM
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सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत आरबीआई की नीति पर सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी है. इस नीति के तहत RBI को बैंकों की वार्षिक निरीक्षण रिपोर्ट का खुलासा करने से छूट मिली हुई है. सुप्रीम कोर्ट ने इस नीति को वापस लेने के लिए आखिरी मौका दिया है और कहा कि भविष्य में इस तरह के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा. शीर्ष न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) आरटीआई के तहत ‘‘राष्ट्रीय आर्थिक हित के विषयों’’ को छोड़ कर निरीक्षण रिपोर्ट के बारे में सभी सूचनाएं और अन्य साम्रगी देने के लिए कर्तव्यबद्ध है. आरबीआई ने न्यायालय के समक्ष कहा कि खुलासा नीति को वेबसाइट से हटा दिया जाएगा.

दिसंबर 2015 के फैसले के उल्लंघन का आरोप

जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने इस तथ्य पर कड़ी आपत्ति जताई कि आरबीआई ने उसके 16 दिसंबर 2015 के फैसले का उल्लंघन किया और न्यायालय के अवमानना याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लेने के बाद केंद्रीय बैंक ने 12 अप्रैल को अपनी वेबसाइट पर नयी खुलासा नीति जारी की. नयी नीति के तहत आरबीआई ने विभिन्न विभागों को निर्देश दिया था कि वे उन सूचनाओं का खुलासा नहीं करें जिनका शीर्ष अदालत ने अपने पूर्व के फैसलों में खुलासा करने को कहा था.

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘हमारी राय में प्रतिवादियों (आरबीआई) ने उन सामग्रियों के खुलासे से मना करके इस अदालत की अवमानना की है, जिन्हें इस अदालत ने देने का निर्देश दिया था.’’ पीठ ने यह बात केंद्रीय बैंक को इसमें सुधार करने का अंतिम अवसर देते हुए कही.

जनवरी में अवमानना नोटिस जारी

इस साल जनवरी में शीर्ष अदालत ने सूचना के अधिकार कानून के तहत बैंकों की वार्षिक निरीक्षण रिपोर्ट का खुलासा नहीं करने के लिए आरबीआई को अवमानना नोटिस जारी किया था. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट और केंद्रीय सूचना आयोग ने कहा था कि आरबीआई तब तक पारर्दिशता कानून के तहत मांगी गई सूचना देने से इनकार नहीं कर सकता जब तक कि उसे कानून के तहत खुलासे से छूट ना प्राप्त हो. रिजर्व बैंक ने अपने बचाव में कहा था कि वह अपेक्षित सूचना की जानकारी नहीं दे सकता क्योंकि बैंक की वार्षिक निरीक्षण रिपोर्ट में ‘‘ट्रस्टी’’ जानकारी भी शामिल हैं.

बैंकों पर लगाए गए जुर्माने को लेकर आरटीआई

कोर्ट रिजर्व बैंक के खिलाफ सूचना के अधिकार कार्यकर्ता एस सी अग्रवाल की अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रहा था. अग्रवाल ने नियमों का उल्लंघन करने वाले बैंकों पर लगाये गये जुर्माने से संबंधित दस्तावेजों सहित रिजर्व बैंक से इस बारे में पूरी जानकारी मांगी थी. उन्होंने उन बैंकों की सूची भी मांगी थी जिन पर जुर्माना लगाने से पहले रिजर्व बैंक ने कारण बताओ नोटिस जारी किये थे. रिजर्व बैंक ने आर्थिक हितों के आधार पर ऐसी जानकारी देने से इंकार कर दिया था.

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