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दो बार अटार्नी जनरल रह चुके सोली सोराबजी का निधन, कोरोना संक्रमण का चल रहा था इलाज

वरिष्ठ अधिवक्ता, वेटेरन ज्यूरिस्ट और देश के पूर्व अटार्नी जनरल Soli Sorabjee का आज 30 अप्रैल को 91 वर्ष की उम्र में निधन हो गया.

Updated: Apr 30, 2021 10:11 AM
Soli Sorabjee Senior Advocate and former Attorney General passes awayसोली सोराबजी ने दो बार देश के अटार्नी जनरल के तौर पर काम किया था.

वरिष्ठ अधिवक्ता, वेटेरन ज्यूरिस्ट और देश के पूर्व अटार्नी जनरल सोली सोराबजी का आज 30 अप्रैल को 91 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. उन्हें कोरोना संक्रमण था और इसका इलाज चल रहा था. सोराबजी दो बार देश के अटार्नी जनरल भी रह चुके हैं. एक बार 1989-90 में और दूसरी बार 1998-2004 में. सोराबजी को मानव अधिकारों की रक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की वकालत के लिए मार्च 2002 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई संगठनों में उन्होंने काम किया था. सोराबजी सुप्रीम कोर्ट में कई लैंडमार्क केसेज में अपीयर हो चुके हैं जैसे कि मेनका गांधी बनाम भारत सरकार (1978), एसआर बोम्मई बनाम भारत सरकार (1994), बीपी सिंघल बनाम भारत सरकार (2010) इत्यादि.

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Soli Sorabjee की लाईफ प्रोफाइल

  • सोराबजी का जन्म मार्च 1930 में एक पारसी परिवार में हुआ था.
  • उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई और गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, मुंबई से अपनी पढ़ाई समाप्त कर 1953 में बार में भर्ती हुए.
    1977-80 तक वह देश के सॉलिसिटर जनरल रहे.
  • इसके बाद वह 1989-1990 और 1998-2004 के बीच वह दो बार अटार्नी जनरल भी रहे. मार्च 2002 में उन्हें मानव अधिकारों की रक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की वकालत के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया.
  • मार्च 2006 में ऑस्ट्रेलिया और भार के बीच बाईलैटरल लीगल रिलेशंस की सर्विस के लिए उन्हें ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया के ऑनरेरी मेंबर चुना गया.
  • 1997 में यूनाइटेड नेशंस ने उन्हें नाइजीरिया में मानवाधिकारों की स्थिति पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए विशेष प्रतिवेदक नियुक्त किया.
  • इसके अलावा वे 1998-2004 के बीच मानवाधिकारों की रक्षा और इसे बढ़ावा देने के लिए बनी यूएन-सब कमीशन के चेयरमैन रहे.
  • उन्होंने केशवानंद भारती, मेनका गांधी, एसआर बोम्मईस आईआर कोएल्हो इत्यादि के मामलों की सुनवाई में शामिल रहे.
  • वह बीपी सिंघल के केस के लिए सुनवाई में भी अपीयर हुए जिसकी सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि बिना किसी ठोस वजह से राज्यों को गवर्नर को हटाया नहीं जा सकता.
  • 2000-2006 के बीच हेग में स्थित परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के सदस्य के तौर पर उन्होंने कार्य किया.

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