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निमोनिया से लड़ाई में सीरम इंस्टीट्यूट को मिली बड़ी सफलता, तैयार की पहली स्वदेशी वैक्सीन

यूनिसेफ के डेटा के मुताबिक हर साल भारत में पांच साल से कम उम्र में ही एक लाख से अधिक बच्चों की निमोनिया से मौत हो जाती है.

December 24, 2020 11:35 AM
Serum Institute developed first indigenous vaccine against pneumonia to be launched next weekसीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने निमोनिया की पहली स्वदेशी वैक्सीन तैयार किया है. (Image- PTI)

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने निमोनिया की पहली स्वदेशी वैक्सीन तैयार की है. इसे अगले हफ्ते केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन अगले हफ्ते लांच करेंगे और फिर जल्द ही यह अगले हफ्ते घरेलू बाजार में उपलब्ध हो जाएगी. स्रोत से मिली जानकारी के मुताबिक यह वैक्सीन अधिक अफोर्डेबल होगी. वर्तमान में निमोनिया के लिए दो विदेशी कंपनियों फाइजर और ग्लैक्सोस्मिथलाइन द्वारा तैयार की गई वैक्सीन का प्रयोग किया जाता है.

भारतीय दवा नियामक ने जुलाई में सीरम इंस्टीट्यूट को निमोकोकल पॉलीसैकेराइड कांजुगेट वैक्सीन के लिए मार्केट अप्रूवल दे दिया था. दवा नियामक ने यह फैसला इंस्टीट्यूट द्वारा पहले, दूसरे और तीसरे चरण के लिए क्लीनिकल ट्रॉयल डेटा का रिव्यू करने के बाद लिया. यह ट्रॉयल भारत और अफ्रीकी देश गैम्बिया में किया गया था.

देश की पहली निमोनिया वैक्सीन को स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया के कारण बच्चों में होने वाले निमोनिया और इंवैसिव डिजीज (तेजी से फैलने वाली बीमारियां) के खिलाफ एक्टिव इम्यूनाइजेशन के तौर पर प्रयोग किया जाएगा.

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कोरोना महामारी के बीच ऐतिहासिक उपलब्धि

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को लिखे गए पत्र में सीरम इंस्टीट्यूट के एडीशनल डायरेक्टर (गवर्नमेंट एंड रेगुलेटरी अफेयर्स) प्रकाश कुमार सिंह ने लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना आत्मनिर्भर भारत की तरफ बढ़ते हुए सीरम इंस्टीट्यूट ने कोरोना महामारी के बीच एक और ऐतिहासिक माइलस्टोन हासिल कर लिया है.

सीरम इंस्टीट्यूट ने देश की पहली विश्व स्तरीय निमोकॉकल कांजुगेट वैक्सीन (पीसीवी) तैयार किया है. पत्र में लिखा गया है कि सीरम इंस्टीट्यूट ने प्रधानमंत्री की योजना वोकल फॉर लोकल और मेकिंग इन इंडिया को लेकर लगातार प्रयास जारी रखा है.

सालाना 1 लाख से अधिक बच्चों की कम उम्र में मौत

यूनिसेफ के डेटा के मुताबिक, हर साल भारत में पांच साल से कम उम्र में ही एक लाख से अधिक बच्चों की निमोकॉकल बीमारियों से मौत हो जाती है. चूंकि निमोनिया एक श्वास संबंधी बीमारी है, कोरोना महामारी के बीच बच्चों को पीसीवी देना बहुत महत्वपूर्ण है. बता दें कि कोरोना वायरस भी रेस्पिरेटरी समस्याएं पैदा करता है.

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