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G-sec yields: बॉन्ड यील्ड में आ रही है तेजी, क्या हो सकते हैं नुकसान? SBI रिपोर्ट ने किया आगाह

G-Sec Yield Rising: बजट के बाद से सरकारी बॉन्ड यील्ड में लगातार तेजी है.

February 23, 2021 8:18 AM
G-Sec Yield RisingG-Sec Yield Rising: बजट के बाद से सरकारी बॉन्ड यील्ड में लगातार तेजी है.

G-Sec Yield Rising: बजट के बाद से सरकारी बॉन्ड यील्ड में लगातार तेजी है. मार्केट प्लेयर्स द्वारा शॉर्ट सेलिंग के चलते हाल ही में यील्ड में तेजी देखने को मिली है. एसबीआई इकोरैप रिपोर्ट के अनुसार अगर बॉन्ड यील्ड इसी तरह से बढ़ता है और इसमें मौजूदा स्तर से 10 बेसिस प्वॉइंट की भी तेजी आती है तो इसके चलते बैंकों एसेट या लॉयबिलिटी में तेजी से उतार चढ़ाव आ सकता है. असल में बैंकों के पोर्टफोलियों में गवर्नमेंट सिक्योरिटीज का बड़ा शेयर होता है. ऐसे में जब यील्ड बए़ती है यानी बॉन्ड के रेट पर निगेटिव असर होता है तो बैंकों की एसेट क्वालिटी पर इससे खराब असर पड़ता है.

बॉरोइंग प्रोग्राम के चलते भी आई तेजी

बजट के बाद से देखें तो 3, 5 और 10 साल के बॉन्ड यील्ड में औसत तेजी 31 बेसिस प्वॉइंट के करीब देखने को मिली है. इस अवधि के दौरान AAA कॉरपोरेट बॉन्ड और SDL स्प्रेड में 25-41 बेसिस प्वॉइंट की बढ़ोतरी हुई है. वित्त वर्ष 2021 की पहली छमाही में RBI द्वारा इफेक्टिव यील्ड मैनेजमेंट के चलते बॉन्ड यील्ड 6 फीसदी से नीचे बनी रही थी. लेकिन बजट के बाद इसमें बदलाव आया है. सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने बॉरोइंग प्रोग्राम के बारे में एलान किया. यह भी संकेत दिए कि वित्त वर्ष 2022 में भी बॉरोइंग प्रोग्राम एग्रेसिव तरीके से जारी रहेगा.

बैंक बेचेंगे सरकारी बॉन्ड?

एक्सपर्ट के अनुमान के मुताबिक, सरकार अपने खर्च पूरे करने के लिए 2021-22 में 30 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज ले सकती है. इससे मार्केट में एडिशनल बॉन्ड की सप्लाई बढ़ेगी. दूसरी ओर, बैंकों के पास पहले से बहुत ज्यादा सरकारी बॉन्ड हैं. इसलिए जो नए बॉन्ड जारी किए जाएंगे, उसे खरीदने में शायद उनकी बहुत दिलचस्पी न हो. इधर, लोन की भी मांग बढ़ रही है. ऐसे में सरकारी बैंक बॉन्ड बेचना चाहेंगे. इससे बॉन्ड मार्केट में भी असिथरता आ सकती है.

RBI क्या कदम उठा सकती है

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक को बॉन्ड यील्ड में इस तरह की तेजी थामने के लिए अपरंपरागत साधनों का सहारा लेना होगा, जिसमें मार्केट प्लेयर्स से बात करना/ बाजार में हस्तक्षेप, इलिक्विड सिक्योरिटीज में ओपेन मार्केट आपरेशन (OMO) और बॉन्ड बाजार में उछाल को नियंत्रित करने के लिए शॉर्ट-सेलर्स को दंडित करना शामिल है. वहीं रेपो मार्केट में म्यूचूअल फंड और इंश्योरेंस कंपनियों को भी अनुमति देना चाहिए.

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