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यूक्रेन में युद्ध के विरुद्ध गांधीवादियों की अपील, कहा- फौरन बंद हो हमला, 8 मार्च को गांधी समाधि पर देंगे धरना

Gandhians For Peace: यूक्रेन में शांति के लिए दिल्ली में सर्व धर्म प्रार्थना सभा, यूक्रेन समेत कई देशों के राजदूत हुए शामिल, गांधीजनों ने युद्ध के विरुद्ध पारित किया प्रस्ताव.

यूक्रेन में युद्ध के विरुद्ध गांधीवादियों की अपील, कहा- फौरन बंद हो हमला, 8 मार्च को गांधी समाधि पर देंगे धरना
यूक्रेन में शांति बहाली की अपील के साथ नई दिल्ली के राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय में सर्वधर्म प्रार्थना सभा आयोजित की गई, जिसमें वरिष्ठ गांधीवादियों के अलावा यूक्रेन समेत कई यूरोपीय देशों के राजदूत भी शामिल हुए.

Gandhians Against War : यूक्रेन पर रूस के हमले का दुनिया भर की शांति प्रिय जनता विरोध कर रही है. यहां तक कि खुद रूस में इस हमले के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं. विश्व को अहिंसा का संदेश देने वाले महात्मा गांधी के अनुयायी भी भारत में इस मसले पर अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं. देश की राजधानी दिल्ली में गांधीवादी संगठनों और गांधी विचार से प्रेरित लोगों ने यूक्रेन की निहत्थी जनता पर हो रहे हमले के खिलाफ सक्रियता दिखाते हुए पिछले दो दिनों में लगातार दो कार्यक्रम किए और अब उन्होंने मंगलवार 8 मार्च को राजघाट में महात्मा गांधी की समाधि पर शांतिमय प्रतिरोध का एलान भी किया है.

युद्ध के विरुद्ध गांधी समाधि पर जमा होने का एलान करने वाले संगठनों की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, “एक छोटा-सा देश यूक्रेन हमारी आंखों के सामने कुचला जा रहा है और उसकी हैसियत तार-तार की जा रही है. यह यूक्रेन की जनता का ही नहीं, सारी दुनिया की अमन व न्यायपसंद जनता का अपमान है. रूस हो या अमरीका के नेतृत्व में नाटो के देश, क्या इनमें से किसी को हक है कि वे मिल कर यूक्रेन की आम जनता को बमों और मिसाइलों की आग में जला कर राख कर दें? सत्ता व हिंसा का यह नंगा नाच है जो सारी दुनिया को खतरे में डाल रहा है. इस मनमानी के खिलाफ आवाज उठाने तथा इस दहशतगर्दी को तुरंत रोकने की मांग करने के लिए हम मंगलवार 8 मार्च 2022 को दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक बापू की समाधि राजघाट पर जमा हो रहे हैं. युद्ध, हिंसा व अन्याय के खिलाफ गांधी एक शाश्वत प्रतीक हैं. इसलिए हम गांधीजन दिल्ली के तमाम नागरिक मित्रों से निवेदन करते हैं कि आइए 8 मार्च को राजघाट पहुंचिए और यूक्रेन की जनता के समर्थन में इस शांतिमय प्रतिरोध में शामिल होइए.”

प्रार्थना सभा में शामिल हुए कई देशों के राजदूत

गांधीवादी संस्थाओं और बापू के विचारों से प्रेरित लोगों ने इससे पहले शुक्रवार को महात्मा गांधी समाधि के पास ही बने राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय में एक सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया. इस महत्वपूर्ण सभा में यूक्रेन समेत अनेक यूरोपीय देशों के राजदूत और उनके परिवारों के सदस्य शामिल हुए. सभा में मौजूद वरिष्ठ गांधीवादियों ने कहा कि युद्ध की विनाशकारी शक्ति और तथाकथित महाशक्तियों का आपसी खेल यूक्रेन के नागरिकों की स्वतंत्रता, सम्मान और अस्तित्व को समाप्त कर रहा है. उन्होंने इस पीड़ादायक और लज्जाजनक स्थिति का सामूहिक विरोध करते हुए जल्द से जल्द युद्ध बंद करने और शांति बहाल किए जाने का अह्वान किया. प्रार्थना सभा में शामिल यूक्रेन के राजदूत ने भारत से अपने देश को बचाने के लिए सहयोग करने की अपील भी की. इसके साथ ही उन्होंने यूक्रेनी जनता के समर्थन में प्रार्थना सभा के आयोजन के लिए आभार भी व्यक्त किया.

यूक्रेन की जनता के साथ एकजुटता का प्रस्ताव पारित

सर्व धर्म प्रार्थना सभा से शुरू हुए सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए अगले ही दिन वरिष्ठ गांधीवादियों और गांधी विचार से प्रेरित लोगों की एक बैठक दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में हुई, जिसमें रूस के हमले के खिलाफ यूक्रेन की जनता के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए एक अहम प्रस्ताव पारित किया गया. इस प्रस्ताव में महात्मा गांधी के संदेश को याद करते हुए महाशक्तियों से युद्ध और हथियारों की होड़ को फौरन रोकने का आह्वान किया गया है. गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत के निमंत्रण पर आयोजित इस बैठक में गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष रामचंद्र राही, सचिव संजय कुमार और राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय के निदेशक अन्नामलाई समेत कई प्रमुख गांधीवादी शामिल हुए. बैठक में खुदाई खिदमतगार, खुदाई खिदमतगार हिंद, ऑल इंडिया पीस मिशन और युवा संवाद जैसे गांधी विचार प्रेरित संगठनों और समूहों के लोगों ने भी बढ़चढ़कर हिस्सा लिया.

क्या कह रहे हैं देश के गांधीवादी?

बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया है, “यूक्रेन में आज हमारी दुनिया का सबसे विकृत चेहरा दिखाई दे रहा है. स्वार्थी व नृशंस महाशक्तियां अपना खेल खेलते हुए किस हद तक जा सकती हैं, यूक्रेन में इसकी नई कहानी लिखी जा रही है. रूस व नाटो संधि वाले देशों की भूमिका का हम जितना भी विश्लेषण करें, यह बात छिपाई नहीं जा सकती कि यह वैसा ही नरसंहार है जैसा हमने कभी जालियांवालाबाग में और फिर तिब्बत में देखा है. निहत्थे लोगों को हथियार की ताकत से कुचल डालने का यह खेल नया नहीं है. लेकिन यह पहले से ज्यादा बेशर्मी व क्रूरता से खेला जा रहा है. महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह के अवसर पर हथियारों की ताकत से कुचली जा रही मानवता को लक्ष्य कर लिखा था : “ बाहुबल और न्याय के बीच आमने-सामने के इस युद्ध में मैं सारे संसार की सहानुभूति चाहता हूं.” आज यूक्रेन की निसहाय जनता गांधी की इसी गुहार की प्रतीक बन गई है.”

गांधी विचार से प्रेरित समूहों की तरफ से पारित इस प्रस्ताव में आगे कहा गया है, “आज हम सभी अपनी सम्मिलित आवाज में यूक्रेन पर हो रहे इस पाशविक हमले का हर संभव विरोध करते हैं और दोनों महाशक्तियों की अंतरात्मा का आह्वान करते हैं कि वे फौरन यह हमला और हथियारों की होड़ बंद करें. हम यह भी साफ कहना चाहते हैं कि यह बातचीत आक्रांता रूस और उसकी शिकार यूक्रेनी जनता के बीच होनी चाहिए. ऐसी वार्ता में नाटो देशों की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए. रूसी फौजी ताकत का यूक्रेन की जनता जिस बहादुरी से मुकाबला कर रही है हम उसकी सराहना करते हैं लेकिन यह भी कहना चाहते हैं कि उसे हथियारों को छोड़ कर, पूर्ण असहयोग व पूर्ण इंकार की भूमिका के लिए तैयार होना चाहिए. यूक्रेन के भीतर घुसने वाली रूसी फौज को न एक पाई मिले, न एक भाई मिले, न सहयोग मिले और न सम्मान. पूर्ण असहकार की यह भूमिका हथियारों के मुकाबले ज्यादा परिणामकारी सिद्ध होगी.”

“दुनिया को तीसरे विश्वयुद्ध की ओर धकेल रहा है साम्राज्यवाद”

गांधीवादी संगठनों ने तीसरे विश्व युद्ध के खतरे के प्रति आगाह करते हुए प्रस्ताव में कहा है, “यूक्रेन की त्रासदी के पीछे महाशक्तियों का वही संकीर्ण दिमाग काम कर रहा है जो मानता है कि सारी दुनिया उनके स्वार्थों की पूर्ति का साधन भर है. हम यह स्पष्ट कहना चाहते हैं कि यह वही साम्राज्यवाद है जिसने संसार को दो-दो विश्वयुद्धों में जलने को मजबूर किया है. दोनों महाशक्तियां नागरिक स्वतंत्रता व अधिकारों का कोई सम्मान नहीं करती हैं. हम राष्ट्रों की और वहां के नागरिकों की लोकतांत्रिक संप्रभुता को अखंड व अनुल्लंघनीय मानते हैं. यूक्रेन की आड़ में तथाकथित महाशक्तियां धन व धरती हड़पने का खेल खेल रही हैं, इस बारे में हमें रंचमात्र भी भ्रम नहीं है”

हम गांधी की विरासत को भूल नहीं सकते

प्रस्ताव में आगे कहा गया है, “महात्मा गांधी ने महायुद्ध के नाजुक दौर में भी, पराधीन भारत की नैतिक भूमिका को पूरी ताकत से उजागर किया था. हम गांधी नहीं हैं लेकिन इतिहास की उस विरासत को भूल कर चलने को तैयार नहीं हैं. हम यह सच रेखांकित करना जरूरी समझते हैं कि संकल्प से कमजोर व सामाजिक स्तर पर विभाजित कोई राष्ट्र स्वतंत्र व नैतिक विदेश-नीति न बना सकता है, न उस पर चल सकता है. अगर भारत की ऐसी स्थिति न होती तो उसे हमारे दोस्त रूस से गहरे मैत्री-भाव से यह कहने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए थी कि हम आपकी दोस्ती की इतनी इज्जत करते हैं कि आपको ऐसी गलती करने से रोकना अपना धर्म समझते हैं. हमें रूस को बताना चाहिए था कि यूक्रेन में आपकी गलती बताने का यह मतलब कतई नहीं है कि हम अमरीका के नाटो खेमे का समर्थन करते हैं. एक गलती का विरोध, दूसरी गलती का समर्थन नहीं हो सकता है.”

युद्ध के खिलाफ नागरिकों के प्रदर्शन का समर्थन

गांधीवादी समूहों ने युद्ध के विरोध में दुनिया भर में हो रहे प्रदर्शनों के साथ एकजुटता जाहिर करते हुए प्रस्ताव में कहा है, “रूस समेत सारी दुनिया में नागरिक स्तर पर यूक्रेन के प्रति सहानुभूति व युद्ध के निषेध का जैसा स्वतःस्फूर्त प्रदर्शन हो रहा है, वह नागरिकों के प्राणवान होने की घोषणा है. हम इसकी सराहना और समर्थन करते हैं और भारत में हर स्तर पर ऐसे प्रदर्शन व प्रस्ताव का आह्वान करते हैं.”

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First published on: 06-03-2022 at 06:16:28 pm

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