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एक बार फिर घट सकती है रेपो रेट, RBI गवर्नर ने दिया संकेत

आर्थिक वृद्धि में गिरावट और मुद्रास्फीति में स्थिरता को देखते हुए नीतिगत दर में कटौती की और गुंजाइश

September 19, 2019 10:38 PM

Room for more rate cuts as govt hands tied, inflation under check & slump deepens, says Das

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बृहस्पतिवार को कहा कि आर्थिक वृद्धि में गिरावट और मुद्रास्फीति में स्थिरता को देखते हुए नीतिगत दर में कटौती की और गुंजाइश है. उन्होंने कहा कि महंगाई दर के अगले एक साल तक लक्ष्य से नीचे रहने की संभावना है. रिजर्व बैंक इस साल चार बार नीतिगत दर में कटौती कर चुका है. हालांकि गवर्नर ने तुंरत यह भी कहा कि आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए नरमी के चक्र से निपटने के उपायों को लेकर राजकोषीय गुंजाइश कम है.

उन्होंने नरमी से निपटने के लिए सरकार को बजट में निर्धारित खर्च को शुरू में ही करने का सुझाव दिया. दिसंबर में पदभार संभालने के बाद से दास ने लगातार चार बार नीतिगत दर में कटौती है. पिछली बार उन्होंने सबको चौंकाते हुए नीतिगत दर में 0.35 फीसदी की कटौती की. कुल मिलाकर चार बार में रेपो रेट में 1.10 फीसदी की कटौती की जा चुकी है. इससे रेपो रेट नौ साल के न्यूनतम स्तर 5.40 फीसदी पर आ गई है.

अगले एक साल तक महंगाई कंट्रोल में रहने की संभावना

दास ने ब्लूमबर्ग इंडिया इकोनॉमिक समिट में कहा, ‘‘कीमत की स्थिरता बनी हुई है और मुद्रास्फीति 4 फीसदी के नीचे बनी हुई है और अगले 12 महीनों में इसके इसी स्तर पर बने रहने की संभावना है. ऐसे में आर्थिक वृद्धि में नरमी को देखते हुए नीतिगत दर में कटौती की और गुंजाइश है.’’ उद्योग के कर कटौती के रूप में राहत देने की मांग पर दास ने कहा, ‘‘आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए नरमी के चक्र से निपटने के उपायों को लेकर मुझे लगता है कि राजकोषीय गुंजाइश काफी सीमित है. राजकोषीय घाटा 3.3 फीसदी है. सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के कर्ज को देखते हुए इस मामले में काफी कम गुंजाइश है. लेकिन टैक्स कलेक्शन के मामले में सरकार की क्या स्थिति है, वास्तिवक रूप से कितना व्यय होगा, ये कुछ ऐसी चीजें हैं जिस पर सरकार को विचार करना है.’’

पहली छमाही में डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 5.50 लाख करोड़

उल्लेखनीय है कि एडवांस टैक्स कलेक्शन की वृद्धि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में केवल 4.7 फीसदी रही, जबकि डायरेक्ट टैक्स वसूली में 17.5 फीसदी वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है. पहली छमाही का कुल डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 5.50 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में 5.25 लाख करोड़ रुपये की वसूली हुई थी.

इंपोर्ट-एक्सपोर्ट में गिरावट चिंता का विषय

गवर्नर ने बढ़ती वैश्विक चुनौतियों के आघात से अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए और संरचनात्मक सुधारों का भी आह्वान किया. उन्होंने निर्यात-आयात व्यापार में गिरावट को लेकर कहा कि यह चिंता का विषय है. दास ने उम्मीद जताई कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत दर में कटौती से देश में कोष प्रवाह को गति मिलेगी लेकिन ऐसे पूंजी प्रवाह को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि सब्सिडी की कम मात्रा को देखते हुए सऊदी संकट का मुद्रास्फीति और राजकोषीय घाटे पर केवल सीमित प्रभाव होगा. उल्लेखनीय है कि सऊदी अरब में दो तेल प्लांट पर ड्रोन के हमलों से कच्चे तेल के दाम में अच्छी-खासी वृद्धि देखी गई है. भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 83 फीसदी आयात करता है. इराक के बाद भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता सऊदी अरब है.

वैश्विक स्तर पर अभी कोई मंदी की स्थिति नहीं

आरबीआई गवर्नर ने यह भी कहा कि वैश्विक जोखिम बढ़ा है पर भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है. इसकी एक प्रमुख वजह कुल कर्ज में विदेशी ऋण का हिस्सा केवल 19.7 फीसदी होना है. दास ने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर अभी कोई मंदी की स्थिति नहीं है.

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