जानिए साल भर बाद देश में क्या है RERA कानून के हालात

RERA कानून जम्मू और कश्मीर राज्य को छोड़कर देश के हरेक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में लागू किया जाना था लेकिन एक साल होने के बाद भी 8 राज्यों में रेरा कानून नोटिफाई तक नहीं हो सका है.

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RERA कानून जम्मू और कश्मीर राज्य को छोड़कर देश के हरेक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में लागू किया जाना था लेकिन एक साल होने के बाद भी 8 राज्यों में रेरा कानून नोटिफाई तक नहीं हो सका है.

RERA रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट 15 मार्च 2016 को लोकसभा से पारित किया गया था. रेरा अधिनियम 1 मई 2016 से लागू हो गया था. रेरा अधिनियम बिल्डर द्वारा की जा रही मनमानी पर रोक लगाने के लिए लागू किया गया था ताकि ग्राहकों को फायदा हो सके. रेरा कानून के बनने के एक साल के बाद भी सभी राज्यों में यह कानून पूरी तरह से लागू नहीं हो सका है. कुछ राज्यों ने कानून को कमजोर करके लागू कर रहे हैं तो कुछ राज्यों ने रेरा को लागू करने से ही मना कर दिया है.

शहरी विकास मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, पूर्वोत्तर के 6 राज्यों में रेरा कानून लागू नहीं हो सका है. सिर्फ 8 राज्यों में परमानेंट रेगुलेटर का गठन किया गया है जबकि 19 राज्यों में अंतरिम रेगुलेटर हैं. 15 राज्यों में सिर्फ रेरा रजिस्ट्रेशन की वेबसाइट बनाई गई है. केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने अब तक रेरा नहीं अपनाया है.

RERA ACT के कुछ महत्वपूर्ण नियम समझ लें.

  • बिल्डर के लिए रेरा में रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है. बिल्डर को अपना प्रोजेक्ट स्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी में रजिस्टर कराना होगा, साथ ही प्रॉजेक्ट से जुड़ी सभी जानकारी देनी होगी.
  • बिल्डर किसी खरीदार से धोखाधड़ी करता है तो खरीददार रेग्युलेटरी अथॉरिटी से इस बात को लेकर इसकी शिकायत कर सकेगा. ऐसे में बिल्डर को तीन साल तक की सजा हो सकती है.
  • रियल एस्टेट कंपनी के साथ रियल एस्टेट एजेंट को भी अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा. एजेंट भी अगर दोषी पाते हैं तो इन्हें एक साल तक की सजा हो सकती है.
  • बिल्डर्स को हरेक प्रॉजेक्ट के लिए अलग अकाउंट बनाना होगा और इसमें खरीदारों से मिले पैसे का 70 फीसदी हिस्सा जमा करना होगा, जिसका इस्तेमाल सिर्फ उसी प्रॉजेक्ट के लिए किया जा सकेगा. इससे प्रॉजेक्ट में देरी नहीं होती है.
  • बिल्डर को अथॉरिटी की वेबसाइट पर संबंधित प्रॉजेक्ट से जुड़ी सभी जानकारी वेबसाइट पर देनी होगी. हर तीन महीने पर प्रॉजेक्ट की स्थिति का अपडेट देना होगा. इससे खरीददारों को अपडेट मिलता रहेगा. रेरा से रजिस्ट्रेशन के बिना किसी प्रॉजेक्ट का विज्ञापन नहीं दिया जा सकता है.
  • बिल्डर शुरूआती फीस या आवेदन शुल्क के रूप में कुल रकम का 10 फीसदी से अधिक नहीं ले सकते, जब तक कि बिक्री के लिए रजिस्टर्ड अग्रीमेंट न हो जाए.
  • खरीदार को अगर समय पर पजेशन नहीं मिलता है तो खरीदार अपना पूरा पैसा ब्याज समेत वापस ले सकता है या फिर पजेशन मिलने तक हर महीने ब्याज ले सकता है.

वर्तमान में RERA की स्थिति समझें

RERA कानून जम्मू और कश्मीर राज्य को छोड़कर देश के हरेक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में लागू किया जाना था लेकिन एक साल होने के बाद भी 8 राज्यों में रेरा कानून नोटिफाई तक नहीं हो सका है. आपको बता दें कि मध्यप्रदेश जैसे बड़े राज्य में रेरा के आधिकारिक वेबसाईट पर अभी तक सिर्फ 337 एजेंट्स ने रजिस्टर किया है.

महाराष्ट्र ने रेरा कानून को सबस पहले लागू किया था. महाराष्ट्र रेरा के आधिकारिक वेबसाईट के मुताबिक महाराष्ट्र में कुल 14039 रजिस्टर्ड एजेंट हैं. महाराष्ट्र रेरा को अब तक 2540 शिकायत मिली है जिसमें सिर्फ 1221 शिकायत पर ही आर्डर पास किए गए हैं. 922 शिकायत अभी भी चल रही है और शिकायतकर्ताओं द्वारा 309 शिकायतों के डाक्यूमेंट्स नहीं दिए गए हैं.

अगर आपको लगता है कि आपके बिल्डर ने आपसे धोखाधड़ी की है तो आप रेरा एक्ट के तहत ऑनलाइन और ऑफलाइन शिकायत कर सकते हैं. राज्यों के रेरा के लिए अलग-अलग वेबसाईट हैं.

कैसे करें शिकायत?

  • सबसे पहले संबंधित राज्य की वेबसाइट पर जाएं और अपना अकाउंट बनाएं. कुछ राज्यों के वेबसाइट्स पर बिना अकाउंट बनाए भी शिकायत कर सकते हैं.
  • इसके बाद वेबसाइट के होम पेज पर complaint पर क्लिक करें. इसके बाद register complaint में जाकर पूरी जानकरी दें.
  • यहां आपको प्रॉपर्टी से संबंधित सारे कागज़ात जैसे कि पेमंट रसीद, अग्रीमेंट की कॉपी, लेआउट प्लान आदि को स्कैन कर अपलोड करना होगा.
  • इसके बाद आपको पेमंट करना होगा. यह ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से किया जा सकता है. यूपी, दिल्ली, हरियाणा में इसके लिए फीस 1000 रुपये निर्धारित है.
  • पेमेंट करने के बाद आपको कंप्लेंट नंबर मिलेगा. इस नंबर और डॉक्युमेंट्स को मिलाकर कम से कम 3 प्रति तैयार रखें. तैयार प्रति की एक हार्डकॉपी रेरा को, एक बिल्डर को देनी होगी और एक अपने पास रखें.
  • इसके बाद कंप्लेंट नंबर डालकर अपनी शिकायत का स्टेटस चेक करते रहें.

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