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  1. RBI लोन रिस्ट्रक्चरिंग पैकेज, 7 लाख छोटे कारोबारियों को कैसे मिल सकता है फायदा

RBI लोन रिस्ट्रक्चरिंग पैकेज, 7 लाख छोटे कारोबारियों को कैसे मिल सकता है फायदा

इस पैकेज से ऐसे MSME के एक लाख करोड़ रुपये के कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग में मदद मिलेगी.

February 11, 2019 1:43 PM
RBI's loan structuring package can help 7 lakh MSMEs, Rs 1 L cr loans: Fin secyरिजर्व बैंक ने पिछले महीने छोटी कारोबारी इकाइयों के लिए उनके कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग की एकबारगी सुविधा दी है. (Reuters)

रिजर्व बैंक द्वारा की गई लोन रिस्ट्रक्चरिंग (Loan Structuring) पैकेज की घोषणा से इसकी पात्रता रखने वाले 7 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (MSME) को फायदा मिल सकता है. इस पैकेज से ऐसे MSME के एक लाख करोड़ रुपये के कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग में मदद मिलेगी. यह अनुमान वित्तीय सेवा विभाग के सचिव राजीव कुमार ने जताया है.

रिजर्व बैंक ने पिछले महीने छोटी कारोबारी इकाइयों के लिए उनके कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग की एकबारगी सुविधा दी है. इसमें छोटे उद्योगों के कर्ज को NPA घोषित किए बिना कर्ज की अवधि और ब्याज दर में संशोधन किया जाएगा. रिजर्व बैंक ने यह सुविधा 25 करोड़ रुपये तक की मानक श्रेणी के कर्ज पर दी है.

इक्रा के अनुमान से है ज्यादा

कुमार का यह अनुमान घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा के अनुमान से काफी अधिक है. इक्रा का अनुमान है कि रिजर्व बैंक के पैकेज से 10,000 करोड़ रुपये के कर्ज की ही रिस्ट्रक्चरिंग हो सकेगी. राजीव कुमार का कहना है कि 7 लाख छोटी एवं मझोली इकाइयों को लोन रिस्ट्रक्चरिंग की जरूरत है.

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कैसे काम आएगी यह स्कीम

कुमार के मुताबिक, संपत्ति की श्रेणी को कम किए बिना इन सभी इकाइयों के कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग मार्च 2020 तक की जा सकती है. इसमें एक लाख करोड़ रुपये के कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग हो सकती है. उन्होंने कहा कि इस योजना से अतिरिक्त संसाधनों को मुक्त करने में मदद मिलेगी, जिससे मांग बढ़ेगी और उद्योग में नए अवसर सृजित होंगे.

एनालिस्ट्स और बैंकरों का क्या है कहना

हालांकि एनालिस्ट्स ने RBI की इस पहल को पीछे हटने वाला कदम बताया है क्योंकि रिजर्व बैंक ने आधिकारिक रूप से लोन रिस्ट्रक्चरिंग की गतिविधियों को बंद कर दिया था. इस तरीके को बैंकों के ऊंचे NPA के लिए जिम्मेदार कारकों में से एक माना गया है.

हालांकि, बैंकरों का कहना है कि MSME इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए आगे आने से कतरा रहे हैं. निजी क्षेत्र के एक बैंक ने कहा कि बेशक कर्ज मानक बना रहेगा लेकिन इससे कर्ज लेनदार का रिकॉर्ड प्रभावित होता है, जिससे उन्हें बाद में कभी परेशानी हो सकती है.

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