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RBI MPC: कल से होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग टली, जल्द नई तारीखों का होगा एलान

RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक ने कल यानी 29 अक्टूबर से होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक का कार्यक्रम बदल दिया है.

Updated: Sep 28, 2020 3:48 PM
So far since March, the RBI MPC has cut rates by 115 basis points to fight the coronavirus pandemic and its economic fallout.

RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कल यानी 29 अक्टूबर से होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक का कार्यक्रम बदल दिया है. केंद्रीय बैंक ने सोमवार को इस बारे में जानकारी दी है. इस बारे में नई तारीख का एलान जल्द किया जाएगा. पहले यह मीटिंग 29 और 30 सितंबर के अलावा 1 अक्टूबर को होनी थी. हालांकि केंद्रीय बैंक ने एमपीसी की बैठक का कार्यक्रम बदलने की वजह नहीं बताई है. बता दें कि ज्यादातर एक्सपर्ट मान रहे हैं कि इस बार केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को पहले की तरह बनाए रख सकता है.

2020: 115 बेसिस प्वॉइंट की हो चुकी है कटौती

रिजर्व बैंक आफ इंडिया (RBI) की अगस्त महीने में पिछली मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की मीटिंग में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया था. रेपो रेट को 4 फीसदी पर बरकरार रखा गया था. इसके पहले मई में ब्याज दरों में 40 बेसिस प्वॉइंट और मार्च में 75 बेसिस प्वॉइंट की कटौती की गई थी. इस साल अबतक दरों में 115 बेसिस प्वॉइंट की कटौती हो चुकी है. रिवर्स रेपो रेट 3.35 फीसदी और कैश रिजर्व रेश्यो को 3 फीसदी ​पर हैं. वहीं बैंक रेट 4.25 फीसदी है.

1 वित्त वर्ष में 4 मीटिंग जरूरी

रिजर्व बैंक आफ इंडिया एक्ट, 1934 के सेक्शन 45ZI (1) और (2) के अनुसार आरबीआई को एक वित्त वर्ष में कम से कम 4 बार मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की मीटिंग करना जरूरी है. इस साल की बात करें तो जून में 3 से 5 तारीख के बीच और अगस्त में 4 से 6 तारीख के बीच 2 बार एमपीसी की मीटिंग हो चुकी है. तीसरी बार के लिए 29 सितंबर, 30 सितंबर और 1 अक्टूबर की डेट रखी गई थी. जबकि इसके बाद 2 से 4 दिसंबर और 3 से 5 फरवरी 2021 के दौरान मीटिंग की डेट रखी गई थी.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) का कहना है कि रिजर्व बैंक को अपने नरम रुख को जारी रखना चाहिए. खुदरा मुद्रास्फीति बढ़ने की वजह से अभी केंद्रीय बैंक को दरों में कटौती से बचना चाहिए. वृद्धि को समर्थन महत्वपूर्ण है, लेकिन रिजर्व बैंक को मुद्रास्फीति में कुछ कमी आने का इंतजार करना चाहिए. एसोचैम के महासचिव दीपक सूद ने कहा कि कोविड-19 महामारी की वजह से अर्थव्यवस्था में गिरावट के मद्देनजर रिजर्व बैंक को अपने नरम रुख को जारी रखना चाहिए. यूनियन बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजकिरण राय जी. का कहना है कि रिजर्व बैंक यथास्थिति बरकरार रखेगा. मुद्रास्फीति इतनी ऊंची होने की वजह से इस बार ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद नहीं दिखती.

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