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RBI रेट कट: बैंक FD पर मिल सकता है 0.25% तक ज्यादा ब्याज, लोन सस्ता होने की भी उम्मीद

लिक्विडिटी हासिल करने के लिए बैंक अपने डिपॉजिट्स को आकर्षक बनाने के लिए रेट्स में बढ़ोत्तरी कर सकते हैं ताकि कस्टमर्स बैंक में पैसा जमा करने में रुचि दिखाएं.

February 8, 2019 8:11 AM
RBI's policy rate cut decision may give double benefit to bank customers fd rates likely to increaseRBI: पॉलिसी रुख न्यूट्रल किए जाने से मार्केट का सेंटिमेंट ठीक होगा. (Reuters)

RBI द्वारा मुख्य ब्याज दरों में कटौती किए जाने के बाद कस्टमर्स के लिए होम और ऑटो लोन सस्ते होने की गुंजाइश बन गई है. लेकिन साथ ही उनके लिए एक और अच्छी खबर है, वह यह कि सस्ते लोन के साथ बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के लिए ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी की संभावना भी है. हाल में आई रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की एक रिपोर्ट के अनुसार, बैंकों पर क्रेडिट बढ़ाने का दबाव है, जिसके लिए उन्हें ज्यादा कैपिटल की जरूरत है. ऐसे में वह डिपॉजिट पर ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं.

पंजाब एंड सिंध बैंक के पूर्व CGM जीएस बिंद्रा ने Financial Express Hindi को बताया कि पॉलिसी रुख ‘न्यूट्रल’ किए जाने से मार्केट का सेंटिमेंट ठीक होगा. रेट कम होने से बैंकों को RBI से कम दरों पर कर्ज मिल सकेगा, जिससे उनके पास पैसे रहेंगे. ऐसे में वे डिपॉजिट रेट्स में बढ़ोत्तरी कर सकते हैं. यह बढ़ोत्तरी लगभग 0.25 फीसदी की हो सकती है.

लिक्विडिटी के लिए बढ़ाए जा सकते हैं FD रेट्स

SBI के पूर्व CGM सुनील पंत ने बताया कि देश में इस वक्त क्रेडिट ग्रोथ काफी रीजनल पोजिशन में हैं यानी बैंकों द्वारा कर्ज दिया जाना बढ़ा है. इसके चलते बैंकों के समक्ष लिक्विडिटी का इश्यू आ रहा है. अब रेपो रेट घटने से बैंकों की कर्ज दरें कम होने की गुंजाइश बनी है, जिससे बैंकों के पास आने वाली EMI घटेगी. ऐसे में लिक्विडिटी हासिल करने के लिए बैंक अपने डिपॉजिट्स को आकर्षक बनाने के लिए रेट्स में बढ़ोत्तरी कर सकते हैं ताकि कस्टमर्स बैंक में पैसा जमा करने में रुचि दिखाएं.

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बल्क डिपॉजिट के लिए बदले मानदंड का असर

रिजर्व बैंक ने बैंकों के लिए थोक जमा यानी बल्क डिपॉजिट मानदंड को 1 करोड़ से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये कर दिया है यानी अब 2 करोड़ रुपये और इससे ज्यादा का अमाउंट एकमुश्त डिपॉजिट में आएगा. बिंद्रा के मुताबिक, इस फैसले के पीछे मकसद लिक्विडिटी हासिल करना रहेगा. बल्क डिपॉजिट पर भी ​ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद है. इससे कॉरपोरेट कस्टमर्स को फायदा होगा, जो बल्क में डिपॉजिट करते हैं. बल्क डिपॉजिट पर ब्याज दरें 0.50 फीसदी भी बढ़ सकती हैं.

थोक जमा पर ब्याज दर छोटी राशि की उसी अवधि की मियादी जमा के मुकाबले कुछ अधिक होती है. बल्क डिपॉजिट के लिए नई मानदंड लिमिट बनाने का कदम बैंकों को कोष जुटाने के मामले में अधिक स्वतंत्रता देने के लिए उठाया गया है.

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बल्क डिपॉजिट सेगमेंट में स्थिरता की उम्मीद

बल्क डिपॉजिट के नए मानदंड को लेकर पंत ने कहा कि यह सेगमेंट काफी वॉलेटाइल है. अगर मार्केट में लिक्विडिटी की कमी होती है तो बल्क डिपॉजिट की इंट्रेस्ट रेट आकर्षक बनाई जाती हैं लेकिन अगर पर्याप्त लिक्विडिटी है तो बल्क डिपॉजिट की रेट रिटेल डिपॉजिट जैसी या उनसे कम भी कर दी जाती हैं. नई 2 करोड़ रुपये की लिमिट बनाए जाने से इस सेगमेंट में स्थिरता आने की उम्मीद है. इस कदम के पीछे बैंकों का लिक्विडिटी इश्यू भी एक वजह हो सकती है.

बैंकों को जुटाने हैं 20 लाख करोड़

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकों पर कर्ज बढ़ाने का दबाव है. इसके लिए बैंकों अधिक कैपिटल की जरूरत पड़ेगी. ऐसे में बैंकों को लोगों को लंबी अवधि के डिपॉजिट के प्रति आकर्षित करने के लिए डिपॉजिट पर ब्याज बढ़ाना पड़ेगा.

क्रिसिल का अनुमान है कि बैंकों को मार्च 2020 तक 25 लाख करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी. इसमें से 20 लाख करोड़ रुपये डिपॉजिट से जुटाने पड़ेंगे. बाकी 5-6 लाख करोड़ रुपये एसएलआर कम होने से मिल जाएंगे. बैंकों को कुल डिपॉजिट का एक हिस्सा सरकारी बॉन्ड और सोने में निवेश करना पड़ता है, जिसे एसएलआर कहते हैं.

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