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RBI monetary policy: रिजर्व बैंक ने की रेपो रेट में 0.35% कटौती, FY20 का ग्रोथ अनुमान घटाकर 6.9% किया

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को मौद्रिक नीति का एलान किया.

Updated: Aug 07, 2019 2:58 PM
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RBI monetary policy: रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में 0.35 फीसदी की कटौती की है. गुरुवार को चालू वित्त वर्ष 2019-20 की तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति का एलान करते हुए ​RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने रेपो रेट 0.35 फीसदी घटाकर 5.40 फीसदी कर दिया. इसके साथ ही रिवर्स रेपो रेट घटकर 5.15 फीसदी हो गया. रिजर्व बैंक ने CRR 4 फीसदी और SLR 19 फीसदी पर बरकरार रखा है. RBI ने इस साल लगातार चौथी बार ब्याज दरों में कटौती की है.

मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) के 4 सदस्य ब्याज दरों में 0.35 फीसदी की कटौती चाहते थे, जबकि 2 सदस्य 0.25 फीसदी कटौती के पक्ष थे. एमपीसी ने पॉलिसी का रुख अकोमेडेटिव’ बरकरार रखा है. मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक एक, तीन और चार अक्टूबर 2019 को होगी.

FY20 के लिए GDP अनुमान घटाया

रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान 7 फीसदी से घटाकर 6.9 फीसदी कर दिया है. इसके पहले जून में भी रिजर्व बैंक ने ग्रोथ का अनुमान 7.2 फीसदी से घटाकर 7.0 फीसदी कर दिया था. रिजर्व बैंक के अनुसार वित्त वर्ष 2020 की पहली छमाही में 5.8-6.6 फीसदी ग्रोथ का अनुमान है. जबकि दूसरी छमाही में 7.3-7.5 फीसदी ग्रोथ का अनुमान है.

रिटेल महंगाई अनुमान

वहीं, इस दौरान (FY20) रिटेल महंगाई अनुमान 3.6 फीसदी रखा है. कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स पर आधारित महंगाई दर मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 3.1 फीसदी रहने का अनुमान है. जबकि दूसरी छमाही यानी  अक्टूबर से मार्च तिमाही में रिटेल महंगाई 3.5-3.7 फीसदी रहने का अनुमान है.

RBI की नई ब्याज दरें

रेपो रेट : 5.40%
रिवर्स रेपो रेट : 5.15%
CRR : 4%
SLR : 19%

बैंकों पर होगा कर्ज सस्ता करने का दबाव

रिजर्व बैंक की ओर से रेपो दर में इस कटौती के बाद बैंकों पर कर्ज और सस्ता करने का दबाव बढ़ गया है. इसके चलते आने वाले दिनों में होम लोन, आटो लोन और पर्सनल लोन पर ब्याज दर कम हो सकती है. रेपो दर वह दर होती है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकाल के लिये नकदी उपलब्ध कराता है. रेपो दर में इस कटौती के बाद रिजर्व बैंक की रिवर्स रेपो दर भी कम होकर 5.15 फीसदी, सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) दर और बैंक दर घटकर 5.65 फीसदी रह गई है.

ग्रोथ को सपोर्ट देने के लिए फैसला

रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कटौती का फैसला महंगाई दर के तय लक्ष्य के मुताबिक रहने और ग्रोथ को सपोर्ट देने के लिए किया है. आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास का कहना है कि निजी निवेश और मांग को बढ़ाना आरबीआई की प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि खाद्य और तेलों के अलावा महंगाई नियंत्रण में है. दुनियाभर में महंगाई कंट्रोल में है. इसी वजह से सेंट्रल बैंक दरें घटा रहे हैं. भारत में कंस्ट्रक्शन में सुस्ती देखी जा रही है. बाजार में उतार चढ़ाव दुनियाभर में राजनैतिक गतिविधियों की वजह से है. ग्रोथ को सपोर्ट देने के लिए दरों में कटौती की गई है. उन्होंने कहा कि इस साल खरीफ फसलों की बुआई में 6.6 फीसदी कमी देखी गई है.

बता दें कि मुद्रास्फीति के संतोषजनक स्तर पर होने, वाहन क्षेत्र में नरमी, इंफ्रास्ट्रक्चर उद्योग में नाममात्र वृद्धि, मानसून को लेकर चिंता और शेयर बाजार में गिरावट को देखते हुये नीतिगत दर में एक और कटौती की उम्मीद की जा रही थी. हालांकि ज्यादातर विशेषज्ञों ने दरों में 0.25 फीसदी कटज्ञैती का अनुमान जताया था.

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