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RBI लगातार चौथी बार दे सकता है सस्ते कर्ज का तोहफा, 0.25% घट सकती है रेपो रेट

MPC की बैठक 5 से 7 अगस्त तक तीन दिन चलेगी.

August 4, 2019 5:23 PM
RBI may go for 25 basis point rate cut for fourth time in rowImage: Reuters

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बुधवार को चालू वित्त वर्ष की तीसरी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा जारी करेगा. इसमें नीतिगत दर में लगातार चौथी बार 0.25 प्रतिशत की कटौती की जा सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेतों के बीच केंद्रीय बैंक एक बार फिर रेपो रेट में कटौती कर सकता है.

उद्योग जगत उम्मीद कर रहा है कि रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC), सिस्टम में नकदी की स्थिति में सुधार और ब्याज दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए कदम उठा सकती है. MPC की बैठक 5 से 7 अगस्त तक तीन दिन चलेगी. इस समय रिजर्व बैंक की रेपो रेट 5.75 प्रतिशत पर है.

इस साल कब-कब हो चुकी है कटौती

दिसंबर 2018 में शक्तिकांत दास के रिजर्व बैंक गवर्नर का पदभार संभालने के बाद पहली बार फरवरी की मौद्रिक समीक्षा में रेपो दर में 0.25 प्रतिशत कटौती की गई. उसके बाद चार अप्रैल 2019 को और फिर छह जून को हुई मौद्रिक नीति समीक्षा में 0.25-0.25 प्रतिशत कटौती की गई.

वृद्धि को प्रोत्साहन देने की जरूरत

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ राजकिरण राय जी ने कहा कि MPC इस बार भी ब्याज दर में चौथाई प्रतिशत की कटौती कर सकती है. इस समय वृद्धि को प्रोत्साहन देने की जरूरत है. मुझे भरोसा है कि केंद्रीय बैंक दरों में कटौती करेगा.

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने कहा कि रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कटौती का चक्र फरवरी 2019 से शुरू किया था. हालांकि, अंतिम उपभोक्ता तक कटौती का लाभ काफी धीमी गति से पहुंच रहा है. सीआईआई ने कहा कि रिजर्व बैंक को नकद आरक्षित अनुपात (CRR) में आधा प्रतिशत की कटौती करनी चाहिए. इससे प्रणाली में 60,000 करोड़ रुपये की नकदी उपलब्ध होगी.

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सस्ता कर्ज कराया जाए उपलब्ध

उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा कि वृद्धि दर को प्रोत्साहन के लिए सस्ता कर्ज उपलब्ध कराने की जरूरत है. इससे निवेश बढ़ेगा. मुद्रास्फीति नियंत्रण में है. ऐसे में कटौती का लाभ तेजी से ट्रांसफर किया जाना चाहिए. एसोचैम ने कहा कि एनबीएफसी के नकदी के संकट को दूर करते हुए ब्याज दर में कटौती से आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहन मिलेगा. इससे उपभोक्ता खर्च बढ़ेगा और यात्री एवं कमर्शियल वाहनों की मांग में इजाफा होगा.

रियल एस्टेट सहित कई उद्योग और क्षेत्र पकड़ेंगे रफ्तार

CBRE के चेयरमैन एवं सीईओ (भारत, दक्षिण पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका) अंशुमान मैगजीन ने कहा कि निवेशकों का भरोसा बढ़ने और उपभोक्ता खर्च में इजाफा होने से आर्थिक धारणा अब बेहतर हुई है. हमें उम्मीद है कि रियल एस्टेट सहित कई उद्योग और क्षेत्र इसी साल उल्लेखनीय रफ्तार पकड़ेंगे.

पूर्वांकर लि. के प्रबंध निदेशक आशीष आर पूर्वांकर ने कहा कि रिजर्व बैंक के गवर्नर ने जून में मौद्रिक समीक्षा में बैंकों को कटौती का लाभ ग्राहकों को ट्रांसफर करने को कहा था, जो काफी उत्साहवर्धक है. जहां तक रियल एस्टेट क्षेत्र की बात है तो कोष की लागत कम होने से हम इसका लाभ सीधे उपभोक्ताओं को ट्रांसफर कर सकेंगे, जिससे क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलेगा.

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अर्थव्यवस्था में व्यापक सुस्ती

एडलवेइस रिसर्च की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था में व्यापक सुस्ती है. वाहन बिक्री में गिरावट, निवेश में कमी और निर्यात घटने से अर्थव्यवस्था की रफ्तार घटी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि हमारा विचार है कि 7 अगस्त की बैठक में रिजर्व बैंक को रेपो दर में आधा प्रतिशत की कटौती करनी चाहिए. हालांकि रिजर्व बैंक गवर्नर के एक हालिया इंटरव्यू से संकेत मिलता है कि ब्याज दर में संभवत: चौथाई प्रतिशत की कटौती होगी.

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