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RBI और कम कर सकता है ब्याज दरें, महंगाई और ग्रोथ में बैलेंस पर है फोकस

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने यह भी संकेत दिया कि आगे चलकर दरों में और भी कमी की जा सकती है लेकिन यह महंगाई और ग्रोथ के आंकड़ों पर निर्भर करेगा.

February 7, 2019 3:55 PM
RBI may give more relief in policy rates in next mpc meetingsRBI: छठी मौ​द्रिक नीति समीक्षा बैठक में RBI ने पॉलिसी रेट्स में 0.25% की कटौती कर दी. इसके चलते अब रेपो रेट 6.25% और रिवर्स रेपो रेट 6% हो गई है.

छठी मौ​द्रिक नीति समीक्षा बैठक में RBI ने पॉलिसी रेट्स में 0.25 फीसदी की कटौती कर दी. इसके चलते अब रेपो रेट 6.25 फीसदी और रिवर्स रेपो रेट 6 फीसदी हो गई है. ब्याज दरों में की गई इस कमी की वजह महंगाई का काफी वक्त से निचले स्तर पर रहना और क्रूड की कीमतों में आई गिरावट को बताया गया. इसके अलावा पॉलिसी रुख को न्यूट्रल यानी तटस्थ कर दिया गया है.

इसके साथ ही RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने यह भी संकेत दिया कि आगे चलकर दरों में और भी कमी की जा सकती है लेकिन यह महंगाई और ग्रोथ के आंकड़ों पर निर्भर करेगा. जापान की फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी नोमुरा का कहना है कि ‘न्यूट्रल’ रुख से दरों में और कटौती के संकेत हैं. GDP ग्रोथ को लेकर रिजर्व बैंक पॉजिटिव है.

घटा दिया मुद्रास्फीति अनुमान

रिजर्व बैंक ने 2018-19 की चौथी तिमाही यानी जनवरी-मार्च के लिए महंगाई मुद्रास्फीति अनुमान को कम कर 2.8 फीसदी कर दिया है. मानसून बेहतर रहने की संभावना समेत अन्य अनुकूल कारकों को ध्यान में रखते हुए महंगाई दर का अनुमान घटाया गया. वहीं अगले वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल-सितंबर के लिए खुदरा महंगाई अनुमान को भी कम कर 3.2-3.4 फीसदी कर दिया. साथ ही 2019-20 की तीसरी तिमाही यानी अक्टूबर-दिसंबर के लिए मुद्रास्फीति अनुमान 3.9 फीसदी रखा गया है. इससे पहले पिछली समीक्षा बैठक में रिजर्व बैंक ने अगले 2019-20 अप्रैल-सितंबर के लिए 3.8 से 4.2 फीसदी मुद्रास्फीति का अनुमान लगाया था.

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फूड एंड फ्यूल के दाम में लगातार गिरावट से खुदरा महंगाई दर दिसंबर 2018 में 2.19 फीसदी पर आ गई, जो 18 महीने का न्यूनतम स्तर है. वहीं, थोक महंगाई दर दिसंबर में 3.80 फीसदी रही जो आठ महीने का निचला स्तर है.

खाद्य महंगाई आश्चर्यजनक तरीके से ​कम

RBI ने कहा कि आने वाले समय में कई कारक महंगाई के रास्ते को निर्धारित करेंगे. सबसे पहले खाद्य महंगाई दर आश्चर्यजनक तरीके से निचले स्तर पर बनी हुई है. इसका कारण कई कमोडिटीज के दाम में कमी और अनाज की महंगाई दर में उल्लेखनीय नरमी है. न केवल घरेलू स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई खाद्य समूहों में अत्यधिक आपूर्ति की स्थिति बनी हुई है. इसलिए दरों में कटौती का फैसला इकोनॉमिक ग्रोथ को समर्थन देते हुए 2 फीसदी घट-बढ़ के साथ खुदरा महंगाई के 4 फीसदी के मध्यम अवधि के लक्ष्य हासिल करने के उद्देश्य के अनुकूल है.

2018-19 में ग्रोथ रेट 7.4% रहने के अनुमान पर बरकरार

RBI ने अगले वित्त वर्ष में देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) ग्रोथ रेट 7.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया है. यह केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) के चालू वित्त वर्ष के लिए 7.2 फीसदी के अनुमान से अधिक है. RBI की ओर से कहा गया कि बैंक कर्ज बढ़ने और कमर्शियल क्षेत्र को ग्रॉस फाइनेंशियल फ्लो बढ़ने का सकल घरेलू उत्पादन पर अनुकूल असर पड़ सकता है लेकिन वैश्विक स्तर पर मांग सुस्त पड़ने का इस पर प्रतिकूल असर हो सकता है.

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RBI ने दिसंबर की बैठक में 2018-19 में GDP ग्रोथ रेट 7.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया था. दूसरी छमाही यानी अक्टूबर-मार्च के लिए यह अनुमान 7.2 फीसदी से 7.3 फीसदी रखा था, हालांकि 2019-20 के अप्रैल-सितंबर के लिए अनुमान 7.5 फीसदी रखा था.

MPC ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने और शुद्ध निर्यात के चलते रुपये में आई हालिया गिरावट का प्रभाव कम होने के बावजूद वैश्विक मांग के कमजोर रुख से वृद्धि दर प्रभावित हो सकती है.

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