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RBI फिर सस्ता कर सकता है कर्ज, मौद्रिक समीक्षा में 0.25% घट सकती हैं ब्याज दरें

यदि केंद्रीय बैंक ऐसा करता है तो यह लगातार तीसरा मौका होगा जब वह ब्याज दर घटाएगा.

June 2, 2019 5:39 PM
RBI may cut interest rate by at least 25 bps Thursday: ExpertsImage: Reuters

भारतीय रिजर्व बैंक बृहस्पतिवार को मौद्रिक नीति की समीक्षा में नीतिगत दरों में 0.25 फीसदी की कटौती कर सकता है. यदि केंद्रीय बैंक ऐसा करता है तो यह लगातार तीसरा मौका होगा जब वह ब्याज दर घटाएगा. विशेषज्ञों का कहना है कि 2018-19 की चौथी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर पांच साल के निचले स्तर पर आ गई है, जिसके मद्देनजर रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश बढ़ी है.

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) बृहस्पतिवार को चालू वित्त वर्ष की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा पेश करेगी. नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार के दूसरे कार्यकाल में यह पहली मौद्रिक समीक्षा होगी. पिछली दो बैठकों में भी एमपीसी नीतिगत दरों में चौथाई-चौथाई फीसदी की कटौती कर चुकी है.

चौथाई फीसदी से ज्यादा कटौती की जरूरत: SBI रिसर्च

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकान्त दास की अगुवाई वाली एमपीसी की तीन दिन की बैठक चार जून से शुरू होगी. देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने अपनी हालिया शोध रिपोर्ट में कहा था कि रिजर्व बैंक को ब्याज दरों में अधिक बड़ी कटौती करनी होगी, 0.25 फीसदी से अधिक, जिससे अर्थव्यवस्था में सुस्ती को रोका जा सके.

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन के लिए केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों में कटौती को जारी रखना होगा. उपभोक्ता सामान खंड में उत्पादन और बिक्री में कमी को दूर करने की जरूरत है. यात्री कारों, दोपहिया और गैर टिकाऊ सामान क्षेत्र में बिक्री में वृद्धि की जरूरत है.

कटौती के लिए अनुकूल परिस्थितियां

कोटक महिंद्रा बैंक की अध्यक्ष (उपभोक्ता बैंकिंग) शान्ति एकाम्बरम ने कहा कि रिजर्व बैंक के लिए ब्याज दरों में कटौती की दृष्टि से वृहद वातावरण अनुकूल है. उन्होंने कहा, ‘‘हम लिक्विडिटी बढ़ाने के उपाय और ब्याज दरों में कटौती दोनों की उम्मीद कर रहे हैं. ब्याज दरों में कटौती चौथाई से आधा फीसदी तक हो सकती है.

वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने हालांकि ब्याज दरों में कटौती पर कुछ नहीं कहा. उन्होंने यह जरूर कहा कि फरवरी से ब्याज दरों में दो बार कटौती की जा चुकी है. एमपीसी मुद्रास्फीति में कमी और आर्थिक वृद्धि नरम पड़ने पर गौर करते हुए फैसला करेगी.

 

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