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RBI के इस फैसले से लोन मिलना होगा आसान! अगली नोटिस तक बैंक नहीं दे पाएंगे डिविडेंड

रिजर्व बैंक आफ इंडिया (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास रिवर्स रेपो रेट में 25 बेसिस प्वॉइंट की कटौती कर दी है.

April 17, 2020 1:12 PM
RBI cur reverse repo rate by 25 basis points, RBI, COVID-19 measures, bank dividend, moratorium period, NPA, RBI governor,, Shaktikant dasरिजर्व बैंक आफ इंडिया (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास रिवर्स रेपो रेट में 25 बेसिस प्वॉइंट की कटौती कर दी है.

रिजर्व बैंक आफ इंडिया (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास रिवर्स रेपो रेट में 25 बेसिस प्वॉइंट की कटौती कर दी है. अब यह 4 फीसदी से घटकर 3.75 फीसदी रह गया है. साफ है कि इस फैसले से बैंकों को RBI के पास जमा पैसे पर कम ब्याज मिलेगा. इससे आम आदमी को बैंकों से लोन मिलने में भी आसानी होगी. दास ने कहा है कि 3 महीने के मोरेटोरियम पीरियड को नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) के वर्गीकरण से बाहर रखा गया है. वहीं, आरबीआई ने यह भी कहा है कि बैंक फिस्कल ईयर 2020 से अगले नोटिस तक डिविडेंड नहीं देंगे.

 

लोन मिलने में आसानी

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बड़ा एलान करते हुए रिवर्स रेपो रेट में 0.25 फीसदी कटौती का ऐलान किया है. रिवर्स रेपो रेट 0.25 फीसदी घटकर 3.75 फीसदी पर आ गई है. इस फैसले से बैंकों को आरबीआई के पास जमा पैसे पर कम ब्याज मिलेगा. लिहाजा बैंक अब अपनी रकम को अन्य जगह निवेश करेंगे. ऐसे में बांड मार्केट में तेजी आने की उम्मीद है. इससे बैंकों के पास ज्यादा लिक्विडिटी रहेगी यानी उनके पास पैसा ज्यादा होगा. इससे आम लोगों को भी लोन मिलने में पहले से आसानी होगी.

सैमको सिक्युरिटीज के फाउंडर और सीईओ जिमित मोदी का कहना है कि आरबीआई ने रिवर्स रेपो रेट में 25 बेसिस प्वॉइंट की कटौती की है, इससे सिस्टम में लिक्विडिटी बेहतर होगी. वहीं बेंकों की कर्ज देने की क्षमता में सुधार होगा. इससे निश्चित रूप से यह भरोसा भी बढ़ेगा कि आगे कॉरपोरेट्स के तिमाही नंबर में भी सुधार होगा. मौजूदा स्थिति में आरबीआई का यह कदम स्वागत योग्य है.

क्या होता है रिवर्स रेपो रेट

जैसा इसके नाम से ही साफ है, यह रेपो रेट से उलट होता है. यह वह दर होती है जिस पर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा धन पर ब्याज मिलता है. रिवर्स रेपो रेट बाजारों में नकदी की तरलता को नियंत्रित करने में काम आती है. बाजार में जब भी बहुत ज्यादा नकदी दिखाई देती है, आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देता है, ताकि बैंक ज्यादा ब्याज कमाने के लिए अपनी रकम उसके पास जमा करा दे. रेपो रेट वह दर होती है जिस पर बैंकों को आरबीआई कर्ज देता है. बैंक इस कर्ज से ग्राहकों को ऋण देते हैं. रेपो रेट कम होने से मतलब है कि बैंक से मिलने वाले कई तरह के कर्ज सस्ते हो जाएंगे. जैसे कि होम लोन, व्हीकल लोन वगैरह.

NPA नियमों में बैंकों को 90 दिन की राहत

रिजर्व बैंक आफ इंडिया (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को कहा है कि 3 महीने के मोरेटोरिसम पीरियड को नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) के वर्गीकरण से बाहर रखा गया है. साफ है कि आरबीआई गवर्नर ने एनपीए नियमों में बैंकों को 90 दिन की राहत दी है. यानी आरबीआई द्वारा दिए गए 3 महीने के मोरेटोरियम पीरियड में एनपीए को नहीं गिना जाएगा. बता दें कि आरबीआई के नियमों के अनुसार अगर कोई 3 महीने यानी 90 दिनों तक लोन रीपेमेंट करने में डिफाल्ट कर जाता है तो इसे एनपीए मान लिया जाता है. पिछले दिनों को कोविड 19 की समस्या से निपटने के लिए आरबीआई ने 3 महीने के मोरेटोरियम पीरियड का एलान किया था. जिसके बाद से इन 90 दिनों के मोरेटोरियम और एनपीए को लेकर चिंता बनी हुई थी.

दास ने कहा कि नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां (एनबीएफसी) अपने कर्जदारों को एनपीए वर्गीकरण में छूट दे सकती हैं. बैंकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्टैंड स्टिल खातों पर 10 फीसदी की अतिरिक्त व्यवस्था बनाए रखें.

अगली नोटिस तक डिविडेंड नहीं

आरबीआई गवर्नर ने यह भी कहा है कि वित्त वर्ष 2020 से अगली नोटिस तक बैंक डिविडेंड नहीं देंगे. आरबीआई के अनुसार शिड्यूल कमर्शियल बैंक और दूसरे फाइनेंशियल संस्थानों को अतिरिक्त 20 फीसदी का प्रोविजन करना होगा. लोन अकाउंट के रिजॉल्यूशन की चुनौतियों को देखते हुए रिजॉल्यूशन की अवधि को बढ़ाकर 90 दिन कर दिया गया है. डिफॉल्ट करने वाले बड़े लोन अकाउंट के रिजॉल्यूशन के लिए 180 दिनों का समय दिया जाएगा. 7 जून के सर्कुलर के तहत अतिरिक्त 20 फीसदी प्रोविजनिंग से छूट दी जाएगी.

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