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  1. चुनाव के बाद किसी की भी सरकार बने, RBI गवर्नर शक्तिकांत दास की नौकरी रहेगी सेफ!

चुनाव के बाद किसी की भी सरकार बने, RBI गवर्नर शक्तिकांत दास की नौकरी रहेगी सेफ!

दास का कार्यकाल दिसंबर 2021 में खत्म होगा.

May 2, 2019 4:52 PM
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RBI Governor: लोकसभा का चुनाव चल रहा है और 23 मई को यह स्पष्ट हो जाएगा कि किसकी सरकार केंद्र में बन रही है. अगर मोदी सरकार की सत्ता में वापसी नहीं होती है तो यह माना जा रहा है कि कुछ लोगों की अहम पदों से विदाई हो सकती है. हालांकि किसकी विदाई होगी और कौन बना रहेगा, इन सबके अनुमानों के बीच एक शख्स ऐसा है जो किसी की भी सरकार बनने की स्थिति में अपने पद पर बना रह सकता है.

यह शख्स मोदी सरकार के सबसे अहम फैसलों के दौरान महत्त्वपूर्ण भूमिका में था. यहां बात हो रही है RBI Governer शक्तिकांत दास की. वह ऐसे शख्स हैं जिन्होंने भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रमुख पार्टियों के साथ काम किया हुआ है और वह अगली सरकार किसी भी पार्टी की बनने पर अपने पद पर बने रह सकते हैं.

उर्जित पटेल के इस्तीफे के बाद बने थे गवर्नर

केंद्र सरकार के साथ कई मुद्दों पर मतभेद के चलते उर्जित पटेल ने आरबीआई गवर्नर के पद से इस्तीफा दे दिया था. उनके बाद शक्तिकांत दास को तीन साल के कार्यकाल के लिए गवर्नर बनाया गया. दास का कार्यकाल दिसंबर 2021 में खत्म होगा. वित्त मंत्रालय में दास के साथ कार्य कर चुके एक पूर्व शीर्ष अधिकारी अशोक चावला के मुताबिक दास ने यूपीए और एनडीए दोनों सरकारों के साथ बेहतर तरीके से काम किया है, इसलिए उनका कार्यकाल पूरा होने की पूरी संभावना है.

नोटबंदी के समय निभाई बड़ी भूमिका

केंद्रीय बैंक का गवर्नर बनने से पहले दास मोदी सरकार में वित्त मामलों के सचिव थे. जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी की घोषणा की थी तो उसके बाद से सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर शक्तिकांत दास ने बड़ी भूमिका निभाई थी. यूपीए सरकार में वह वित्त मंत्रालय में काम कर रहे थे. पी. चिंदबरम उस समय वित्त मंत्री थे और केंद्रीय बजट बनाने में दास की भी भूमिका होती थी. इसके बाद उन्हें दिसंबर 2013 में फर्टिलाइजर मिनिस्ट्री में भेज दिया गया था. मोदी सरकार में वह उन्हें टैक्स डिपार्टमेंट का हेड बनाया गया.

RBI Governer बनने के बाद कई बड़े फैसले

आरबीआई का गवर्नर बनने के बाद दास ने अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए कई महत्त्वपूर्ण फैसले लिए. दास ने ब्याज दरों में कटौती की, क्रेटिड फ्लो बढ़ाने के लिए बैंकों के लेंडिंग नॉर्म्स में ढील दी और आरबीआई के सरप्लस फंड को सरकार के पास ट्रांसफर करने के प्रस्ताव पर विचार के लिए एक समिति गठित किया है.

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