RBI इस बार नहीं करेगा रेपो रेट में कटौती, ग्रोथ की धीमी रफ्तार बन सकती है वजह: रिपोर्ट

रेट्स में किसी भी तरह के बदलाव से पहले रिजर्व बैंक को कृषि उत्पादों पर मानसून के प्रभाव और पॉलिसी रेट्स में कटौती के आगे पहुंचाने का इंतजार करना चाहिए.

RBI expected to pause its rate cut cycle According to Dun & Bradstreet Report
घरेलू कंजम्पशन डिमांड में सुधार सुनिश्चित करने को और निवेश लाने की जरूरत है.

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से अगले महीने मॉनिटरी पॉलिसी रिव्यू (MPC) मीटिंग में रेपो रेट में किसी भी तरह का बदलाव नहीं करने की संभावना है. इसकी अहम वजह देश में ग्रोथ की रफ्तार का धीमा पड़ना है. डन एंड ब्रैडस्ट्रीट के अनुसार, मानसून का खाद्यान्न कीमतों पर क्या असर पड़ा है, यह अगले महीने के आखिर तक स्पष्ट हो जाएगा. हालांकि, मांग में नरमी के चलते कुल मिलाकर महंगाई केे नियंंत्रण में रहने की संभावना है. MPC की अगली बैठक 5 से 7 अगस्त को होनी है.

डन एंड ब्रैडस्ट्रीट इंडिया के चीफ इकोनॉमिस्ट अरुण सिंह ने कहा कि पिछले साल से वैश्विक और घरेलू स्तर पर ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ रही है. कारोबारी भरोसे का स्तर कई सालों के निचले स्तर पर पहुंच गया है और इससे वृद्धि में फिर सुधार को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं.

ब्‍याज दरों के ट्रांसमिशन का इंतजार करें RBI

अरुण सिंह ने कहा कि, ‘‘ बाजार में कैश मैनेजमेंट के लिए कई उपाय किए गए, इनमें पॉलिसी रेट्स में 0.75 फीसदी की कटौती भी शामिल रही. ऐसे में दरों में किसी भी तरह के बदलाव से पहले रिजर्व बैंक को कृषि उत्पादों पर मानसून के प्रभाव और पॉलिसी रेट्स में कटौती के आगे पहुंचाने का इंतजार करना चाहिए.”

बता दें, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने मंगलवार को इस साल के लिए भारत की ग्रोथ का अनुमान घटाकर 7 फीसदी और अगले साल के लिए 7.2 फीसदी कर दिया है. इसकी वजह उसने घरेलू मांग का कमजोर पड़ना बताया है.

घरेलू मांग को बढ़ाने की जरूरत

सिंह ने कहा कि अभी घरेलू खपत मांग में सुधार सुनिश्चित करने को और निवेश लाने की जरूरत है. उन्होंने कहा, ‘‘ मॉनिटरी इंसेंटिव्स के लिए पॉलिसी रेट्स में कटौती और लिक्विडिटी बढ़ाने जैसे कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं. अब यह बहुत हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार अगले दो-तीन महीने के लिए क्या रूपरेखा तैयार करती है. ’’

उन्होंने कहा कि राजकोषीय बाध्यताओं के चलते सरकार का ध्यान अब पूंजी के उपयोग का प्रदर्शन स्तर सुधारने पर और मार्केट से जुड़े सुधार पर होना चाहिए. रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक पांच से सात अगस्त को होनी है. इससे पहले जून की बैठक के बाद केंद्रीय बैंक ने पॉलिसी रेट्स में इस साल तीसरी बार कटौती की थी.

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