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NBFC संकट में RBI अभी दखल देने के मूड में नहीं, जरूरत लगेगी तब उठाएंगे कदम: RBI डिप्टी गवर्नर आचार्य

हमारा जो आकलन है उसमें फिलहाल इस प्रकार की जरूरत नहीं है.

December 6, 2018 7:04 AM
RBI deputy governor Viral Acharya said No need for RBI to help NBFCs as lender of last resortकेंद्रीय बैंक वित्तीय प्रणाली में नकदी की समस्या के समाधान के सिद्धांतों के अनुसार चलता है. (Representational Image)

रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य का कहना है कि वित्तीय संकट में फंसे NBFC क्षेत्र के लिए केंद्रीय बैंक मदद का कोई आखिरी ठिकाना नहीं बन सकता. साथ ही कहा कि कर्ज के लिए धन की कमी की समस्या दूर करने के लिए पिछले दो महीनों में जो उपाय किए गए हैं, उससे इस क्षेत्र की लिक्विडिटी की समस्या कम हुई है.

आचार्य ने NBFC की वित्तीय समस्या उजागर होने के बाद से उठाए गए कदमों को गिनाते हुए कहा कि केंद्रीय बैंक वित्तीय प्रणाली में नकदी की समस्या के समाधान के सिद्धांतों के अनुसार चलता है.

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उन्होंने पांचवीं द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद कहा, ‘‘RBI अंतिम कर्जदाता की भूमिका भी निभाता है लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि इस तरह के विरले कदम के लिए परिस्थिति है भी या नहीं. हमारा जो आकलन है उसमें फिलहाल इस प्रकार की जरूरत नहीं है.’’

इकोनॉमी मजूबत स्थिति में

आचार्य ने कहा कि अर्थव्यवस्था की स्थिति मजबूत है. कर्ज में वृद्धि मौजूदा बाजार मूल्य पर GDP वृद्धि दर से ऊपर है और विभिन्न क्षेत्रों में इसका उपयुक्त डिस्ट्रीब्यूशन है. ऐसे में RBI को भरोसा है कि किसी क्षेत्र के लिए इस प्रकार के किसी विशेष समर्थन की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि RBI ने विभिन्न कदमों के जरिए पूरी प्रणाली में कर्ज के लिए धन की उपलब्धता में बढ़ोत्तरी की है.

RBI अगस्त से NBFC सेक्टर पर रख रहा नजर

विभिन्न रिपोर्ट के अनुसार, सरकार NBFC के लिये विशेष कर्ज सुविधा चाहती है. इसकी वजह है कि उनके साथ लाखों लोगों का रोजगार जुड़ा है. आचार्य ने कहा कि RBI पिछले अगस्त से इससे जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखे हुए है और इसके संभावित उपायों को लेकर पूंजी बाजार नियामक सेबी के संपर्क में है. उल्लेखनीय है कि IL&FS में संकट अगस्त में उत्पन्न हुआ था और इसको लेकर पूरे NBFC क्षेत्र में चिंता फैल गई.

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अब तक ये उठाए गए कदम

अब तक उठाए गए कदमों का ब्योरा देते हुए आचार्य ने कहा कि बैंक, NBFC और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFC) को कर्ज देने के लिए गवर्मेंट सिक्योरिटीज को गिरवी रखकर अधिक कर्ज ले सकते हैं और उसकी सीमा में वृद्धि की गई है. उन्होंने कहा कि हमारा अनुमान है कि इन उपायों से पिछले दो महीनों में कोष को लेकर दबाव धीरे-धीरे कम हुआ है. इससे NBFC तथा HFC को संपत्ति और देनदारी के मामले में बही खातों के समायोजन को लेकर समय और अवसर मिला है.’

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