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RBI Monetary Policy: आरबीआई ने नहीं बदली दरें, रेपो रेट 4% पर बरकरार; FY22 में 10.5% रह सकती है GDP ग्रोथ

RBI Monetary Policy April 2021:  रिजर्व बैंक आफ इंडिया (RBI) ने वित्त वर्ष 2022 की पहली मॉनेटरी पॉलिसी में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है.

Updated: Apr 07, 2021 11:50 AM
RBI Monetary PolicyRBI on Wednesday permitted SFBs to classify fresh lending to smaller MFIs with asset size of up to Rs 500 crore for on-lending to individual borrowers as priority sector lending.

RBI Monetary Policy April 2021:  रिजर्व बैंक आफ इंडिया (RBI) ने वित्त वर्ष 2022 की पहली मॉनेटरी पॉलिसी में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट को 4 फीसदी पर बरकरार रखा गया है. वहीं सेंट्रल बैंक ने आगे के लिए अपना अकोमोडेटिव रुख बरकरार रखा है. रिवर्स रेपो रेट में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है और इसे 3.35 फीसदी बनाए रखा गया है. बता दें कि आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने 7 अप्रैल को मॉनेटरी पॉलिसी का एलान किया है. इससे पहले भी फरवरी में ब्याज दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ था. विशेषज्ञ भी मान रहे थे कि कोरोना वायरस मामलों में बढ़ोतरी की वजह से पैदा हुई अनिश्चित्ता के बीच, आरबीआई द्वारा मौद्रिक नीति समीक्षा में यथास्थिति बनाए रखने की उम्मीद है.

मौजूदा स्थिति

रेपो रेट: 4.00% VS 4.00%

कैया रिजर्व रेश्यो: 4.00% VS 3.00%

रिवर्स रेपो रेट: 3.35% VS 3.35%

क्या कहा शक्तिकांत दास ने

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि रेपो रेट 4% और रिवर्स रेपो रेट 3.35% पर बरकरार रहेगा. जबतक ग्रोथ स्टेबल नहीं हो जाती तब तक पॉलिसी रेट अकोमडेटिव ही रहेगी. आरबीआई गवर्नर ने साल 2021-22 के लिए 10.5% जीडीपी ग्रोथ का अनुमान जताया है.

चुनौतियों से निपटने को तैयार

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि कोरोना का प्रसार बढ़ने के बावजूद इकोनॉमी में सुधार हो रहा है. हालांकि हाल में जिस तरह से मामले बढ़े हैं, उससे थोड़ी अन‍िश्चिचतता पैदा हुई है. उन्होंने कहा कि हाल में देश के कई राज्यों में कोरोना के जिस तरह से मामले बढ़े हैं, उससे थोड़ी अन‍िश्चिचतता बढ़ी है, लेकिन भारत चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार है. केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक रुख को उदार बनाए रखा है. रिजर्व बैंक के गवर्नर ने बताया कि कोरोनावायरस के नए मामले बढ़ने की वजह से ग्रोथ आउटलुक पर अनिश्चितता बनी है. कई राज्य सरकारों द्वारा कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लगाए जा रहे प्रतिबंध की वजह से आर्थिक रिकवरी को झटका लग सकता है.

जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 10.5%

वित्त वर्ष 2022 के लिए आरबीआई ने जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 10.5 फीसदी रखा है. नए कर्ज उपलब्ध कराने के लिए वित्तीय कंपनियों को 50,000 करोड़ रुपये की मदद देने का प्रावधान किया गया है. कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के हिसाब से साल 2021 की चौथी तिमाही में महंगाई दर पांच फीसदी, साल 2021-22 की पहली तिमाही में 5.2 फ़ीसदी, साल 2021-22 की दूसरी तिमाही में 5.2 फीसदी और साल 2022 की तीसरी तिमाही में 4.4 फ़ीसदी रहने का अनुमान है. चालू वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में महंगाई दर 5.1 फ़ीसदी रह सकती है.

लिक्विडिटी के उपाय

आरबीआई गवर्नर दास ने कहा है कि केंद्रीय बैंक सिस्टम में पर्याप्त तरलता उपलब्ध कराने के लिए कदम उठा रहा है. भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि देश में ग्रामीण इलाके से ग्राहकों की मांग में तेजी दर्ज की जा रही है, जबकि अब शहरी इलाकों से भी ग्राहकों की मांग में सुधार के संकेत मिल रहे हैं. दास ने कहा कि दुनिया भर में कोरोनावायरस का टीकाकरण चलने की वजह से आर्थिक रिकवरी आ रही है. इसके साथ ही दुनियाभर के बैंकिंग नियामक मौद्रिक नीतियों को नरम कर रहे हैं, जिससे ग्लोबल जीडीपी को मदद मिल सके. देश में बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलने की वजह से भारत की जीडीपी ग्रोथ की उम्मीद भी मजबूत हुई हैं.

बता दें कि रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर रिजर्व बैंक SBI समेत दूसरे बैंकों को कम समय के लिए कर्ज देता है. अगर इसमें कटौती होती है तो बैंकों को RBI को कम ब्‍याज देना होता है. इसका असर आपकी EMI पर भी पड़ता है. अगर रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए उसे कर्ज लेना महंगा हो जाता है. इससे होम लोन कार लोन समेत अन्य लोन की ब्‍याज दरें बढ़ जाती हैं. वहीं, वर्तमान में RBI का रेपो रेट 4% है जबकि रिवर्स रेपो रेट 3.5% है. रिवर्स रेपो रेट वह दर है जो RBI बैंकों को ब्‍याज के तौर पर देता है.

पिछली बैठक में नहीं हुआ था बदलाव

इससे पहले तीन दिनों की मौद्रिक नीति समीक्षा (MPC) की बैठक आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में होगी. 5 फरवरी को आखिरी मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद, केंद्रीय बैंक ने मुद्रास्फीति की चिंताओं का जिक्र करते हुए, मुख्य ब्याज दर (रेपो) में कोई बदलाव नहीं किया था. वहीं इस बार भी जानकारों का कहना था कि आरबीआई द्वारा उदार मौद्रिक नीति रवैये को जारी रखने और मॉनेटरी कदम का एलान करने के लिए सही समय का इंतजार करने की उम्मीद है. यह ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए सबसे बेहतर संभावित आउटकम सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा, जिसमें मुद्रास्फीति को काबू में रखने के मुख्य उद्देश्य को छोड़ा नहीं जाएगा.

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