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सरकार ने माना टेलीकॉम सेक्टर में वित्तीय दबाव, गठित समिति दो हफ्ते में देगी रिपोर्ट

केंद्र सरकार ने अंततः मान लिया कि टेलीकॉम सेक्टर वित्तीय दबाव से जूझ रही हैं और उन्हें सहारे की जरूरत है.

June 29, 2019 11:44 AM
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दूरसंचार कंपनियां इस समय वित्तीय संकट से जूझ रही है. अब केंद्र सरकार ने भी अंततः मान लिया कि टेलीकॉम सेक्टर वित्तीय दबाव से जूझ रही हैं और उन्हें सहारे की जरूरत है. लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज जैसी टेलीकॉम सेक्टर की देनदारी को रेशनलाइज कर सरकार सहारा दे सकती है. टेलीकॉम मिनिस्टर रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि टेलीकॉम सेक्टर की समस्याओं के समाधान के लिए उन्होंने एक समिति का गठन किया है. यह समिति दूरसंचार विभाग के सचिव अरुणा सुंदराजन की अगुवाई में गठित किया गया है. यह समिति दो हफ्ते के भीतर अपनी रिपोर्ट दाखिल करेगी. टेलीकॉम मिनिस्टर प्रसाद ने कहा कि वह टेलीकॉम ऑपरेटर्स की समस्याओं पर बातचीत करने के लिए उनसे जल्द मुलाकात करेंगे. प्रसाद का कहना है कि सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल और एमटीएनएल को बचाना उनकी प्रॉयरिटी में है.

दबाव के कारण मोबाइल और डेटा सस्ते में उपलब्ध

रवि शंकर प्रसाद का कहना है कि टेलीकॉम सेक्टर लंबे समय से दबाव से गुजर रहा है और इसे देखते हुए उन्होंने एक समिति का गठन किया है जो सभी शुल्क को तर्कसंगत बनाएगी और इस सेक्टर में ईज ऑफ डूइंग बिजनस पर भी विचार करेगी. उनका यह भी कहना है कि टेलीकॉम सेक्टर इस समय गहरे वित्तीय दबाव से जूझ रहा है लेकिन इसकी वजह से देश भर के लोगों को सस्ते मोबाइल और डेटा मिल रहे हैं.

स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज घटाने की ट्राई ने किया सिफारिश

टेलीकॉम इंडस्ट्री लंबे समय से कम टैक्स और लेवी की मांग करती रही है जो उनके कुल रेवेन्यू का करीब 30 फीसदी होती हैं. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में एक टेलीकॉम पॉलिसी स्टेटमेंट में कहा गया था कि सभी लेवीज को रेशनलाइज किया जाएगा. आउटस्टैंडिंग इंडस्ट्री का कर्ज इस समय करीब 7 लाख करोड़ रुपये है. इससे पहले ट्राई (टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया) ने ऑपरेटर्स को वित्तीय राहत देने के लिए कुछ लेवीज को कम करने की सिफारिश की थी.

ट्राई ने सिफारिश किया था कि ऑपरेटर्स से उनके एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू के 3 फीसदी के बराबर फिक्स्ड स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज लिया जाना चाहिए. इस समय ऑपरटेर्स 3 से 5 फीसदी का स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज चुकाते हैं क्योंकि वे प्रशासनिक तौर पर आवंटित स्पेक्ट्रम और नीलामी के जरिए मिले स्पेक्ट्रम दोनों का प्रयोग करते हैं.

ट्राई ने सुझाव दिया था कि 2014 के बाद से नीलामी में आवंटित सभी स्पेक्ट्रम के यूजेज चार्ज पर एक फिक्स्ड रेट 3 फीसदी की दर से यूजेज चार्ज लिया जाना चाहिए और इसे धीरे-धीरे कम कर 1 फीसदी किया जाना चाहिए. ट्राई का मानना था कि नीलामी में ऑपरेटर्स अधिक कीमत देकर बोली हासिल करते हैं, इसलिए स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज सिर्फ एडमिनिस्ट्रेटिव कॉस्ट के आधार पर तय किया जाना चाहिए जो कि बहुत कम होता है.

लाइसेंस फीस कम करने की भी सिफारिश

टेलीकॉम ऑपरेटर्स स्पेक्ट्रम यूजेज चार्जेज के अलावा अपने एडजस्टेड ग्रास रेवेन्यू का 8 फीसदी लाइसेंस फीस के रूप में जमा कराते हैं. ट्राई ने यहां भी सिफारिश किया है कि इस फीस को कम कर 6 फीसदी किया जाना चाहिए. इसके लिए टेलीकॉम कंपनियों की यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन कंपोनेंट (यूएसओ) को 2 फीसदी घटाकर 3 फीसदी किया जा सकता है. इस समय 8 फीसदी लाइसेंस फीस का 5 फीसदी यूएसओ में जाता है और शेष 3 फीसदी सरकार के पास जाता है.
(स्टोरीः किरण राठी)

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