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GST Council की अगली बैठक में कुछ वस्तुओं के दरों में कमी की जा सकती है

इससे पहले नवंबर 2017 में हुई बैठक में भी परिषद ने 178 वस्तुओं को जीएसटी की सबसे ऊंची दर 28 प्रतिशत के वर्ग से हटाया था.

July 11, 2018 6:28 PM
gst gov in, gst login, gst registration, gst rates, gst full form, gst council, gst full form, business news in hindiइससे पहले नवंबर 2017 में हुई बैठक में भी परिषद ने 178 वस्तुओं को जीएसटी की सबसे ऊंची दर 28 प्रतिशत के वर्ग से हटाया था.

जीएसटी परिषद अपनी आगामी बैठक में कुछ वस्तुओं पर कर की दर घटा सकती है. ज्यादातर ऐसी वस्तुओं पर दर में कटौती की जा सकती है जिनका राजस्व प्राप्ति पर ज्यादा असर पड़ने की संभावना नहीं है. जीएसटी परिषद की बैठक 21 जुलाई को होगी. जिन उत्पादों पर जीएसटी दर में कटौती की जा सकती है उनमें हस्तशिल्प और हथकरघा सामान, नैपकिन तथा कुछ अन्य सेवायें शामिल हो सकतीं हैं.

माल एवं सेवाकर यानी जीएसटी देश में एक जुलाई 2017 को लागू किया गया था. इस व्यवस्था में चार दरें — पांच प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत — रखी गई है. कई उद्योग संगठनों और संबंध पक्षों ने असंगठित क्षेत्र में तैयार किये जाने वाले सामान्य स्वास्थ्य और रोजगार सृजन करने वाले उत्पादों पर दर में कटौती की मांग की है.

एक अधिकारी ने कहा, ‘‘विभिन्न पक्षों की तरफ से की गई मांग को देखते हुये परिषद कई तरह के उत्पादों पर कर दरों को तर्कसंगत बनाने के मुद्दे पर गौर कर सकती है. परिषद मुख्यतौर पर ऐसे उत्पादों पर गौर कर सकती है जो कि आम उपभोग का सामान हो और जिनका राजस्व पर भी ज्यादा असर नहीं हो.’’ ज्यादातर हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों के साथ – साथ सेनिटरी नैपकिन पर इस समय 12 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगता है. इन उत्पादों को जीएसटी से मुक्त करने की मांग उठती रही है.

जीएसटी के बारे में कोई भी निर्णय लेने के मामले में जीएसटी परिषद ही सर्वोच्च निकाय है. परिषद ने इससे पहले जनवरी 2018 में हुई बैठक में 54 सेवाओं और 29 वस्तुओं पर जीएसटी दर में कटौती का निर्णय लिया था. इससे पहले नवंबर 2017 में हुई बैठक में भी परिषद ने 178 वस्तुओं को जीएसटी की सबसे ऊंची दर 28 प्रतिशत के वर्ग से हटाया था. इस दौरान परिषद ने रेस्त्राओं के लिये भी कर की दर घटाकर पांच प्रतिशत कर दी थी.

पिछले वित्त वर्ष के दौरान जीएसटी से सरकार को कुल 7.41 लाख करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति हुई. इस लिहाज से पिछले वित्त वर्ष में औसत मासिक प्राप्ति 89,885 करोड़ रुपये रही. केन्द्रीय मंत्री अरूण जेटली ने विश्वास व्यक्त किया है कि जीएसटी के तहत राजस्व प्राप्ति बढ़ने के साथ कर दरों को अधिक तर्कसंगत बनाने की सरकार की क्षमता बढ़ेगी.

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