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सिर्फ ब्याज दर घटाने से दूर नहीं होगी आर्थिक सुस्ती, ग्रामीण मांग बढ़ाने की जरूरत: SBI रिसर्च

ग्रामीण क्षेत्र में मांग बढ़ाने के लिए सरकार को राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के जरिए आगे बढ़कर खर्च करना होगा.

September 16, 2019 7:33 PM
Rate cut alone can not arrest slump, boost rural demand: SBI reportImage: Reuters

अर्थव्यवस्था की सुस्ती दूर करने के लिए अकेले नरम मौद्रिक रुख अपनाने से कुछ नहीं होगा, इसके बजाय सरकार को विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र की मांग बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए. SBI रिसर्च की रिपोर्ट में यह बात कही गई है. SBI रिसर्च के अर्थशास्त्रियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में मांग बढ़ाने के लिए सरकार को राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के जरिए आगे बढ़कर खर्च करना होगा.

SBI रिसर्च के अर्थशास्त्रियों ने सोमवार को आगाह किया कि यदि सरकार राजकोषीय घाटे को काबू में रखने के लिए खर्च में किसी तरह की कटौती करती है तो यह वृद्धि की दृष्टि से ठीक नहीं होगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था की मौजूदा सुस्ती को केवल मौद्रिक नीति में होने वाले उपाय से ही हल नहीं किया जा सकता. सरकार को अर्थपूर्ण तरीके से मनरेगा और पीएम-किसान योजना के शुरू में ही खर्च बढ़ाकर मांग में गिरावट को रोकना होगा.

PM-किसान योजना में लानी होगी तेजी

PM-किसान पोर्टल के अनुसार इस योजना के लाभार्थियों की संख्या अभी 6.89 करोड़ ही है, जबकि लक्ष्य 14.6 करोड़ का है. किसानों के आंकड़ों के अनुमोदन की धीमी रफ्तार की वजह से यह स्थिति है. रिपोर्ट कहती है कि ग्रामीण मांग बढ़ाने के लिए इस काम को तेजी से करना होगा. मनरेगा की वेबसाइट के अनुसार केंद्र द्वारा 13 सितंबर तक कुल 45,903 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, लेकिन इसमें से सिर्फ 73 प्रतिशत यानी 33,420 करोड़ रुपये की राशि ही खर्च हुई है.

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पूंजीगत व्यय भी कम

पूंजीगत व्यय का बजट अनुमान 3,38,085 करोड़ रुपये है. जुलाई तक इसमें से सिर्फ 31.8 प्रतिशत राशि ही खर्च हुई थी. एक साल पहले समान अवधि में बजट अनुमान की 37.1 प्रतिशत राशि खर्च कर ली गई थी. रिपोर्ट के अनुसार 2007-14 के दौरान निजी निवेश का हिस्सा मूल्य के हिसाब से 50 प्रतिशत था, जबकि 2015-19 के दौरान यह उल्लेखनीय रूप से घटकर 30 प्रतिशत रह गया.

SBI रिसर्च की रिपोर्ट ने कहा है कि राजकोषीय घाटा 3.3 प्रतिशत तक रहना चाहिए. इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र खर्च के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रभाव इसके ऊपर होना चाहिए.

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