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UAPA संशोधन बिल राज्यसभा से पास; आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई होगी और सख्त, विपक्ष को दुरुपयोग की आशंका

राज्यसभा ने UAPA बिल को 42 के मुकाबले 147 मतों से मंजूरी दे दी.

Updated: Aug 02, 2019 3:28 PM
Rajya sabha passed UAPA amendment Bill यह तीसरा मौका है जब राज्यसभा में सरकार ने समुचित संख्या बल नहीं होने के बावजूद विवादास्पद विधेयक को पारित कराया है.

संसद ने शुक्रवार को किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने तथा आतंकवाद की जांच के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को और अधिकार देने वाले एक महत्वपूर्ण विधेयक को मंजूरी दे दी. सरकार ने इसके प्रावधानों के दुरूपयोग की विपक्ष की आशंकाओं को निराधार करार देते हुए कहा कि इसके प्रावधान जांच एजेंसियों को आतंकवाद से ‘‘चार कदम आगे रखने के लिए हैं.’’ राज्यसभा ने विधि विरूद्ध क्रियाकलाप निवारण संशोधन (UAPA) विधेयक को 42 के मुकाबले 147 मतों से मंजूरी दे दी. सदन ने विपक्ष द्वारा इसे प्रवर समिति में भेजने के प्रस्ताव को 85 के मुकाबले 104 मतों से खारिज कर दिया. लोकसभा इसे पिछले हफ्ते ही मंजूरी दे चुकी है.

सिर्फ संगठन पर प्रतिबंध काफी नहीं

विधेयक में व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने के प्रावधान के दुरूपयोग होने की आशंका को निर्मूल ठहराते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयक पर हुई चर्चा के जवाब में कहा कि आतंकवाद से मुकाबले के लिए ऐसा करना जरूरी है. उन्होंने कहा कि कानून में अगर इस तरह का प्रावधान 2009 में रहा होता तो कोलकाता पुलिस द्वारा पकड़ा गया कुख्यात आतंकवाद यासीन भटकल कभी नहीं छूट पाता और आज एनआईए की गिरफ्त में होता.

शाह ने कहा कि हमें इस बात को समझना होगा कि व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने का क्या मतलब है? उन्होंने कहा कि ये बड़े जटिल तरह के मामले होते हैं जिनमें साक्ष्य मिलने की संभावना कम होती है. ऐसे मामले अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय किस्म के होते हैं. उन्होंने कहा कि कुछ विपक्षी सदस्यों ने तर्क दिया कि संस्था व्यक्ति से बनती है.

शाह ने कहा कि उनका भी यही तर्क है कि संस्था व्यक्ति से बनती है, संगठन के संविधान से नहीं. गृह मंत्री ने कहा कि आतंकवाद के मामले में अक्सर यह देखने में आया है कि एक संगठन पर प्रतिबंध लगाने पर व्यक्ति दूसरा संगठन खोल लेते हैं. उन्होंने कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवाद संगठन नहीं, व्यक्ति करता है.

आतंकवादी घोषित करने के बारे में जानकारी नहीं

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम ने शाह से स्पष्टीकरण पूछते हुए कहा कि इस विधेयक में किसी व्यक्ति को किस स्थिति में आतंकवादी घोषित किया जाएगा, इसे लेकर कोई स्पष्टता नहीं है. इस पर गृह मंत्री ने कहा कि विधेयक में कुछ अस्पष्टता अवश्य है लेकिन यह स्थिति की जटिलता के कारण है.

उन्होंने कहा कि मान लीजिए कि हम यह कहें कि पूछताछ के बाद किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करेंगे तो इस शर्त पर हम हाफिज सईद या दाऊद इब्राहिम को कैसे आतंकवादी घोषित कर पाएंगे, क्योंकि उससे पूछताछ करना अभी संभव नहीं है.

उन्होंने कहा कि परिस्थिति के आधार पर यह तय किया जाएगा. उन्होंने कहा कि व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने के बाद भी कई स्तर पर समीक्षा होगी. उन्होंने कहा कि चार स्तर पर इसकी समीक्षा होगी. इसलिए इसे लेकर शंका नहीं की जानी चाहिए.

तीसरा विवादास्पद बिल राज्यसभा में पास

वर्तमान सत्र में यह तीसरा मौका है जब राज्यसभा में सरकार ने समुचित संख्या बल नहीं होने के बावजूद विवादास्पद विधेयक को पारित कराया है. इससे पहले आरटीआई कानून में संशोधन और तीन तलाक संबंधित विधेयकों को राज्यसभा में मतदान के दौरान सरकार को सफलता मिली थी.

इस विधेयक में एनआईए द्वारा किसी मामले की जांच किये जाने पर एजेंसी के महानिदेशक को संपत्ति की कुर्की के लिये मंजूरी देने का अधिकार दिया गया है. इसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार को प्रस्तावित चौथी अनुसूची से किसी आतंकवादी विशेष का नाम जोड़ने या हटाने के लिये और उससे संबंधित अन्य परिणामिक संशोधनों के लिये सशक्त बनाने हेतु अधिनियम की धारा 35 का संशोधन करना है. एनआईए के निरीक्षक के दर्जे के किसी अधिकारी को अध्याय 4 और अध्याय 6 के अधीन अपराधों का अन्वेषण करने के लिये सशक्त बनाया गया है .

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