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राज्यसभा में इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड संशोधन बिल पास, समय से दिवाला समाधान प्रक्रिया पूरी करना है लक्ष्य

विधेयक के जरिये सात खंडों का संशोधन किया जाएगा. इनका मकसद कानून की अस्पष्टता को दूर करना है.

July 29, 2019 7:54 PM

Rajya Sabha passes the Insolvency and Bankruptcy Code (Amendment) Bill, 2019, इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (संशोधन) विधेयक, दिवाला समाधान प्रक्रिया, निर्मला सीतारमण

राज्यसभा में सोमवार को इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (संशोधन) विधेयक पारित हो गया. यह निगमित दिवाला समाधान प्रक्रिया को समयबद्ध ढंग से पूरा करने और शेयरधारकों के हितों के बारे में अधिक स्पष्टता देने के उद्देश्य से लाया गया है. विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से मूल कानून में किये गये संशोधनों की काफी समय से जरूरत महसूस की जा रही थी. विधेयक के जरिये सात खंडों का संशोधन किया जाएगा. इनका मकसद कानून की अस्पष्टता को दूर करना है.

वित्त मंत्री के जवाब के बाद उच्च सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया. इससे पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि बदलते भारत की भावना में हमें इस तरह के कानूनों की जरूरत है. सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि मूल कानून के जरिये चूककर्ताओं को कानून का सामना करना ही पड़ेगा.

समाधान प्रक्रिया के बाद नए मालिक पर नहीं रहेगा कोई दबाव

सीतारमण ने स्पष्ट किया कि समाधान प्रक्रिया हो जाने के बाद किसी कंपनी या उद्यम के नये बोलीदाता या चलाने वालों पर कर अधिकारियों का कोई दबाव नहीं रहेगा क्योंकि पुराना ऋण या अपराध उनका नहीं है बल्कि कंपनी चलाने वाले पुराने लोगों या व्यक्ति का है. उन्होंने कहा कि संविधान में दिए गए अधिकारों के तहत इस विधेयक के जरिए संशोधन लाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि हम अपने अनुभवों के आधार पर समय-समय पर मूल संहिता में संशोधन ला रहे हैं.

330 दिनों में पूरी होगी CERP

आगे कहा कि समाधान के तहत हमारा मकसद विलय, पुर्निवलय आदि की प्रक्रिया में स्पष्टता लाना है. CERP (निगमित दिवाला समाधान प्रक्रिया) 330 दिनों में होगी. इसी सीमा के भीतर मुकदमे एवं अन्य न्यायिक प्रक्रिया शामिल होंगी. विधेयक के कारणों एवं उद्देश्यों के अनुसार मूल कानून में प्रस्तावित संशोधनों से आवेदनों को समय रहते स्वीकार किया जा सकेगा और निगमित दिवाला समाधान प्रक्रिया को समय रहते पूरा किया जा सकेगा. विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि संबंधित प्राधिकार द्वारा किसी आवेदन को 14 दिनों के भीतर स्वीकार या खारिज नहीं किया गया तो उसे इसके बारे में लिखित में कारण बताना पड़ेगा.

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