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गुड न्यूज! अक्टूबर से ट्रेनों में रोज बढ़ेंगी 4 लाख सीटें, नई टेक्नोलॉजी आएगी काम

अक्टूबर 2019 से भारतीय रेल के करीब 5,000 डिब्बे एचओजी टेक्नोलॉजी से ऑपरेट होने लगेंगे. इससे ट्रेनों से जनरेटर बोगियों को हटाने में मदद मिलेगी और उनमें अतिरिक्त डिब्बे लगाने की सहूलियत भी मिलेगी.

July 10, 2019 6:46 PM
Railways to offer additional 4 lakh berths per day by October with green technologyसिर्फ एक नॉन एसी डिब्बे को बिजली आपूर्ति करने के लिए प्रति घंटा 120 यूनिट बिजली की जरूरत होती है.

आने वाले समय में रेल यात्रियों के लिए रेल का सफर आसान हो सकता है. रेलवे ऐसे टेक्नीक ला रही है जिससे अक्टूबर से गाड़ियों में रिजर्वेशन से सफर के लिए रोजाना चार लाख से अधिक सीटें (बर्थ) बढ़ेंगी. इसके लिये रेल विभाग ऐसी टेक्नोलॉजी अपनाने जा रहा है जिससे डिब्बों में रोशनी और एयर कंडीशनिंग के लिए बिजली को लेकर अलग से पावर कार (जनरेटर डिब्बा) लगाने की जरूरत नहीं होगी और यह जरूरत इंजन के माध्यम से ही पूरी हो जाएगी. रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी. फिलहाल लिंक हाफमैन बुश (एलएचबी) डिब्बों वाली हर रेलगाड़ी में एक से दो जनरेटर बोगी लगी होती है. इन्हीं डीजल जनरेटर बोगियों से सभी डिब्बों को बिजली की आपूर्ति की जाती है. इसे ‘एंड ऑन जनरेशन’ (ईओजी) टेक्नोलॉजी के तौर पर जाना जाता है.

बचेंगे सालाना 6 हजार करोड़ रुपये

अधिकारियों ने कहा कि जल्द ही विभाग दुनिया भर में चल रही ‘हेड ऑन जेनरेशन’ (एचओजी) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल शुरू करने जा रहा है. इस टेक्नोलॉजी में रेलगाड़ी के ऊपर से जाने वाली बिजली तारों से ही डिब्बों के लिए भी बिजली ली जाती है. अधिकारियों ने बताया कि अक्टूबर 2019 से भारतीय रेल के करीब 5,000 डिब्बे एचओजी टेक्नोलॉजी से ऑपरेट होने लगेंगे. इससे ट्रेनों से जनरेटर बोगियों को हटाने में मदद मिलेगी और उनमें अतिरिक्त डिब्बे लगाने की सहूलियत भी मिलेगी. इतना ही नहीं इससे रेलवे की ईंधन पर सालाना 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होगी. सिर्फ एक नॉन एसी डिब्बे को बिजली आपूर्ति करने के लिए प्रति घंटा 120 यूनिट बिजली की जरूरत होती है. इतनी बिजली पैदा करने के लिए जनरेटर प्रति घंटा 40 लीटर डीजल की खपत करता है. वहीं एसी डिब्बे के लिए ईंधन का यही खपत बढ़कर 65 से 70 लीटर डीजल प्रति घंटा हो जाती है.

नया सिस्टम इको-फ्रेंडली

अधिकारियों ने बताया कि ये नया सिस्टम पर्यावरण के अनुकूल है. इसमें वायु और ध्वनि प्रदूषण नहीं होगा. साथ ही यह हर रेलगाड़ी के हिसाब से कार्बन एमिशन में सालान 700 टन की कमी लाएगी. अधिकारियों के अनुसार, ‘‘उदाहरण के तौर पर प्रत्येक शताब्दी एक्सप्रेस में दो जनरेटर बोगियां लगायी जाती हैं. जब हम एचओजी सिस्टम को इस्तेमाल करना शुरू कर देंगे तो ऐसी ट्रेनों में स्टैंडबाय के लिए मात्र एक जनरेटर बोगी की जरूरत होगी.’’ अधिकारियों ने बताया कि उनके अनुमान के मुताबिक जब एलएचबी डिब्बों वाली सभी रेलगाड़ियां नयी टेक्नोलॉजी से चलने लगेंगी तो अतिरिक्त डिब्बों से हर दिन करीब चार लाख बर्थ उपलब्ध होंगी. इससे रेलवे की इनकम भी बढ़ेगी

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